उतरौला बलरामपुर - उत्तर प्रदेश की राज नीति में इन दिनों जिस  नाम की चर्चा लगातार बढ़ रही है,वह है हसीब खान। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने सक्रिय राजनीति करते हुए अपने एक अलग पहचान बनाई है, जिससे उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक सफर एक नए चरण में प्रवेश करता हुआ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2021 में राजनीति में कदम रखने वाले हसीब खान ने खुद को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित रखने के बजाय जन-सम्पर्क और सामाजिक गति विधियों के जरिए अपनी उपस्थिति को दर्ज कराने का प्रयास किया और सफल भी हो गये। हसीब खान ने 2022 के विधान सभा चुनाव में जनवादी पार्टी को पूर्वांचल की चर्चित तीन सीटें दिलाई वो तब जब जनवादी पार्टी एक स्थानीय छोटीपार्टी थी। अगर हसीब खान एक छोटी सी पार्टी को 3 सीटें दिला सकते हैं तो वो कांग्रेस के लिए भी सीटों की गिनती काफी बढ़ सकती है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से लगातार संवाद बना ए रखा, और स्थानीय मुद्दों को उठाने की काफी कोशिश की। यही वजह है कि पूर्वां चल की राजनीति में उनका नाम समय- समय पर चर्चा का विषय बनता चला आ रहा है। हाल ही में हसी ब खान ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद उनका दिल्ली दौरा भी सुर्खियों में हो रहा है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिका अर्जुन खड़गे केअलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुला कात की। इन बैठकों में उत्तर प्रदेश की राजनी तिक स्थिति, संगठन को मजबूत करने और भविष्य की रणनीति जैसे विषयों पर चर्चा होने की जानकारी भी सामने आई है। राज नितिक जानकारों का कहना है की उनके सम्पर्क में कई छोटे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक समुदायों के लोग भी शामिल हैं। जिनमे राज भर निषाद चौहान समाज सहित कई वर्गों के लोग कांग्रे स के साथ जुड़ सकते हैं।अगर इन सभी छोटे दल हसीब खान के कहने से कांग्रेस में शामिल हो जाते हैं, तो इससे हसीब खान का कद और भी बढ़सकता है, जिससे आने वाले समय में राहुल गाँधी के काफी करीबी भी हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नेता की वास्तविक राजनी तिक ताकत केवल लोकप्रियता से नहीं, बल्कि संगठन में उस की भूमिका, जनाधार और चुनावी प्रदर्शन से तय होती है। ऐसे में कांग्रेस में हसीब खान की नई जिम्मेदारियां और आने वाले समय में उनकी सक्रियता यह तय करेगी, कि वह पूर्वांचल की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या हसीब खान कांग्रेस के संगठन को पूर्वांचल में नई ऊर्जा दे पाएंगे, क्या वह नए सामाजिक समीकरण तैयार करने में सफल होंगे, और क्या आगामी विधान सभा चुनावों में उनकी भूमिका निर्णायक साबित होगी, इन सवा लों के जवाब आने वाला समय ही बताए गा।आपकी क्या राय है, क्या हसीब खान कांग्रेस के लिए पूर्वांचल में नई राजनीतिक संभावनाएं तैयार कर पायेंगे या नहीं।

                हिन्दी संवाद न्यूज से
               असगर अली की खबर
                उतरौला बलरामपुर। 

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