बलरामपुर-तुलसीपुर ब्लॉक के ग्राम पूरेछीटन में बना सामुदायिक शौचालय पिछले लगभग नौ वर्षों से बंद पड़ा है। शासन की स्वच्छता योजनाओं के तहत निर्मित यह शौचालय ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया गया था,लेकिन लंबे समय से ताला लटका होने के कारण इसका लाभ गांववासियों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालय संचालन के नाम पर कर्मचारियों की तैनाती दिखाकर वेतन का भुगतान लगातार किया जाता रहा,जबकि जमीनी हकीकत में सुविधा पूरी तरह ठप है।
ग्रामीणों के अनुसार,इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गईं और स्थानीय समाचार पत्रों में खबरें भी प्रकाशित हुईं। मामला चर्चा में आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने जांच की बात कही थी। उस समय खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नए चयन एवं संचालन समिति के गठन की बात कही थी,ताकि शौचालय को पुनः चालू कराया जा सके। लेकिन कुछ समय बाद केवल औपचारिकता पूरी हुई और स्थिति फिर जस की तस बनी रही।
बताया जाता है कि नए चयन और संचालन की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद शौचालय नियमित रूप से नहीं खुल रहा। भवन की साफ-सफाई नहीं होती और अधिकांश समय परिसर बंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार कर्मचारी कागजों पर कार्यरत दिखाए जा रहे हैं,लेकिन वास्तविक रूप से वे अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर रहे। इसके बावजूद वेतन उठाया जा रहा है,जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि इतने वर्षों से बंद पड़े सामुदायिक शौचालय के लिए किस प्रकार भुगतान होता रहा। ग्रामीणों ने दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शौचालय को तत्काल सुचारु रूप से चालू कराने की अपील की है। उनका कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ गांव तक तभी पहुंचेगा, जब ऐसी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

             हिन्दी संवाद न्यूज से
               रिपोर्टर वी. संघर्ष
                  बलरामपुर। 

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