यूजीसी के समर्थन में करनैलगंज में सौंपा गया सामूहिक ज्ञापन
न्यायालय द्वारा रोके गए प्रावधानों पर पुनर्विचार की उठी मांग
करनैलगंज (गोंडा)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के समर्थन एवं उच्च शिक्षा से जुड़े न्यायालय द्वारा रोके गए प्रावधानों के संदर्भ में शनिवार को करनैलगंज तहसील में नागरिकों ने एकजुट होकर उप जिलाधिकारी को सामूहिक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छात्र, युवा, अधिवक्ता, शिक्षक एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे और शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।
ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता, समान अवसर और शैक्षणिक मानकों को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का समाज के व्यापक वर्ग द्वारा समर्थन किया जा रहा है। साथ ही न्यायालय द्वारा जिन प्रावधानों पर रोक लगाई गई है, उनके संबंध में निष्पक्ष, संवैधानिक और समानता आधारित पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता जताई गई। ज्ञापनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी भी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों विशेषकर ओबीसी, एससी, एसटी अल्पसंख्यक एवं अन्य वंचित वर्गों के जागरूक नागरिकों द्वारा सामाजिक हित में की गई है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था किसी भी प्रकार के जाति, धर्म या वर्ग आधारित भेदभाव से मुक्त होनी चाहिए और शिक्षा नीति का आधार योग्यता, पारदर्शिता तथा संविधान प्रदत्त समानता का सिद्धांत होना चाहिए। नागरिकों ने मांग की है कि इस सामूहिक सामाजिक ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए संबंधित मंत्रालय एवं विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षा व्यवस्था में न्याय और समान अवसर सुनिश्चित हो सके। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे आंदोलन किया जाएगा,जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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