प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार किसी तहसीलदार की निजी बताई जा रही है, जिस पर लाल-नीली बत्ती लगी थी। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने घायल युवक को खेत से निकालकर तत्काल एक निजी अस्पताल भिजवाया, जहां उसका इलाज कराया गया।
घटना के बाद इलाके में वीआईपी कल्चर को लेकर नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि निजी वाहनों पर लाल-नीली बत्ती लगाकर तेज रफ्तार में चलना आम लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। मौके पर उपस्थित आक्रोशित ग्रामीणों ने कार को घटना स्थल से ले जाने का प्रयास करने पर आंदोलन कर मार्ग जाम करने की बात कही ।
मामले की सूचना मिलने पर मालीपुर थानाध्यक्ष स्वतंत्र कुमार मौर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से मामला निपट गया है और किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
हालांकि इस घटना के बाद एक बार फिर निजी वाहनों पर वीआईपी अंदाज में लाल-नीली बत्ती लगाने और सड़क पर बेलगाम रफ्तार से चलने के चलन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल के दौरान सरकार ने वर्ष 2017 में वीआईपी कल्चर खत्म करने के उद्देश्य से लाल बत्ती (VIP Beacon) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। केंद्रीय कैबिनेट ने 19 अप्रैल 2017 को यह फैसला लिया था, जिसके बाद 1 मई 2017 से पूरे देश में लाल बत्ती लगाने पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया।
इस नियम के तहत मंत्री, सांसद, विधायक, अफसर या किसी भी वीआईपी की निजी गाड़ी पर लाल बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है। केवल पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही फ्लैशिंग लाइट इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद क्षेत्र में अक्सर निजी गाड़ियाँ आए दिन बत्ती व हूटर का इस्तेमाल करती दिखाई पड़ती हैं जो दुर्घटना का कारण बनते नजर आ रहे हैं।
Author
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| Jeevan_Prakash |


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