जलालपुर (अंबेडकरनगर) नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत पौराणिक तमसा नदी के पुनरोद्धार को लेकर दिल्ली से आई अधिकारियों की टीम ने नदी का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने नदी में गिरने वाले प्रमुख नालों का भी जायजा लिया।


निरीक्षण में पाया गया कि ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व की तमसा नदी आज गंभीर दुर्दशा का शिकार है। नदी का स्वाभाविक जलस्रोत लगभग समाप्ति की ओर है और कई स्थानों पर जलधारा अत्यंत क्षीण हो चुकी है। नदी की वर्तमान स्थिति को देखकर टीम ने चिंता व्यक्त की और आवश्यक बिंदुओं को संज्ञान में लेते हुए आगे की कार्यवाही के संकेत दिए। निरीक्षण उपरांत टीम वापस रवाना हो गई।




इस निरीक्षण दल में दिल्ली से कीर्ति वर्मा और सतीश महावत, जिला पर्यावरण अधिकारी सत्यम श्रीवास्तव, पर्यावरण समिति सदस्य केशव प्रसाद श्रीवास्तव तथा ईओ अरविंद कुमार शामिल रहे।


ज्ञात हो कि रामायण कालीन श्रवण क्षेत्र तथा दुर्वाशा आश्रम जैसे तीर्थ स्थल तथा अकबरपुर और जलालपुर जैसे प्रमुख कस्बे तमसा नदी के किनारे बसे हुए हैं। इन क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों टन कूड़ा नदी के तटों पर डाला जाता है। इसके अतिरिक्त दोनों कस्बों के सैकड़ों नाले सीधे नदी में गिरते हैं, तथा पावर लूम उद्योग में प्रयुक्त धागों की रंगाई व धुलाई के बाद बचा केमिकल भी सीधे नदी में ही छोड़ दिया जाता है जिससे जल प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है। पिछले कई वर्षों में नदी में बड़ी संख्या में मछलियों के मरकर सतह पर तैरने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं, जो पर्यावरणीय संकट की गंभीरता को दर्शाती हैं।


तमसा संरक्षण के लिए सक्रिय संस्था तमसा श्रेष्ठ ट्रस्ट के अध्यक्ष केशव प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से नदी की रक्षा और पुनर्जीवन हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से शीघ्र ही ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनः जीवन मिल सके।


         Author 

Jeevan_Prakash 


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