महिला दिवस विशेष: संघर्ष और संकल्प की मिसाल बनीं तहसीलदार गरिमा भार्गव

तहसीलदार गरिमा भार्गव 


जलालपुर, अंबेडकरनगर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जलालपुर की तहसीलदार गरिमा भार्गव की सफलता की कहानी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पड़ोसी जनपद अयोध्या की निवासी गरिमा भार्गव ने अयोध्या के उदय पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वनस्थली विद्यापीठ से स्नातक और देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से एनवायरमेंटल साइंस में मास्टर डिग्री पूरी की।


सिविल सेवा की तैयारी करते हुए उन्होंने वर्ष 2017 में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर नायब तहसीलदार पद पर ज्वाइन किया। पहली पोस्टिंग सुल्तानपुर जनपद में मिली, इसके बाद बाराबंकी की विभिन्न तहसीलों में कार्य किया। वर्ष 2025 में पदोन्नति के बाद वह कौशांबी जनपद के सिराथू तहसील में तहसीलदार बनीं।


गरिमा भार्गव के पिता सरकारी डॉक्टर हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। उनके पति पुलिस विभाग में क्षेत्राधिकारी हैं। वह बताती हैं कि पति और पिता के अमूल्य सहयोग से ही वह अपने लक्ष्य को हासिल कर सकीं। दो वर्षीय बच्ची की मां होने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और बच्ची के महज पांच महीने की होने पर ही पुनः ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी।


महिलाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि संकल्प, मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की असली कुंजी है। गरिमा भार्गव की यह कहानी महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल है। 🌸



        Author 

Jeevan_Prakash 


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