उतरौला बलरामपुर - उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उतरौला विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी हसीब खान को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही साथ पार्टी ने उन्हें पूर्वांचल के 15 महत्व पूर्ण जिलों का भी प्रभार सौंपा है। इन 15 जिलों में कुल 85 विधान सभा क्षेत्र भी शामिल हैं।हसीबखान को मिली इस बड़ी जिम्मेदारी के बाद कांग्रेस पार्टी के कार्य कर्ताओं और उनके समर्थकों में भारी उत्साह का देखनें को मिला।कांग्रेस पार्टीकी ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक हसीब खान को बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, बस्ती, सन्त कबीर नगर,जौन पुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, चन्दौली, वाराणसी, गाजीपुर, अम्बेडकर नगर और सुल्तानपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले इन जिलों में संगठन को और भी मजबूत करना है और अल्पसंख्यक समाज के बीच पार्टी की पहुंच को बढ़ाना है उनके प्रमुख दायित्वों में भी शामिल होगा।
2022 के चुनाव में दर्ज कराया था, मज बूत प्रदर्शन, हसीब खान ने वर्ष 2022 में सक्रिय राजनीति में अपना कदम रखा था। विधान सभा चुनाव में उन्होंने समाज वादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। बेहद करीबी मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन चुनाव परिणाम में उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन भी किया। उनके सम र्थकों के अनुसार, वह उस विधान सभा क्षेत्र में सपा के इतिहास में सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले प्रत्याशी बने।प्रेस नोट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठ बंधन के दौरान सपा को लगभग 56 हजार वोट मिले थे। वहीं पर 2022 में सपा और कांग्रेस के अलग- अलग चुनाव लड़ने के बावजूद हसीब खान ने 66,132 वोट हासिल किए। इस प्रदर्शन को उनके राज नीतिक जनाधार के विस्तार के तौर पर देखा गया।सामाजिक गतिविधियों से बनाई अलग पहचान, हसीब खान की राजनीतिक सक्रियता के साथ- साथ सामाजिक गति विधियों में भी भागी दारी रही है। लगातार जनता के बीच रहना, लोगों की समस्याओं को उठाना और विभि न्न सामाजिक कार्य क्रमों में सक्रिय भागी दारी उनकी राजनी तिक शैली का हिस्सा रही है। युवाओं के बीच भी उनकी सक्रि यता चर्चा में भी बराबर रहती है।
अल्पसंख्यक समाज के बीच उनके सम्पर्क और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक वर्गों के लोगों से संवाद को भी उनकी राजनीतिक ताकत के रूप मेंदेखा जा रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस संगठन ने उन्हें अल्पसंख्यक विभाग में प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी देने के साथ-साथ पूर्वांचल के 15 जिलों जैसे महत्व पूर्ण क्षेत्र का प्रभार सौंपा है।‍ 85 विधान सभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की चुनौती,हसीब खान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पूर्वांचल के 15 जिलों में कांग्रेस संगठन को सक्रिय और मजबूत करने की होगी। इन जिलों में बहराइच से लेकर वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर और सुल्तान पुर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल हैं।पार्टी के लिए अल्पसंख्यक समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़मज बूत करना भी अहम माना जा रहा है। ऐसे में हसीब खान की नई जिम्मेदारी को केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।15 जिलों की जिम्मेदारी हसीबखान को जिन जिलों का प्रभार सौंपा गया है, उनमें बहराइच में 7, श्रावस्ती में 2, बलराम पुर में 4, सिद्धार्थनगर में 5, बस्ती में 5, सन्त कबीर नगर में 3, जौन पुर में 9, बलिया में 7, मऊ में 4, आजमगढ़ में 10, चन्दौली में 4, वाराणसी में 8, गाजी पुर में 7, अम्बेडकर नगर में 5 और सुल्तानपुर में 5 विधान सभा क्षेत्र में शामिल हैं। इस तरह कुल 85 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी हसीब खान के कंधों पर होगी। पार्टी की इस घोषणा के बाद अब राजनीतिक गलि यारों में चर्चा है कि वह इतने बड़े क्षेत्र में कांग्रेस के संगठन को किस तरह से मजबूत करते हैं और पार्टी के लिए नया जनाधार तैयार करने में कितने सफल होते हैं। हसीब खान को मिली यह जिम्मेदारी उनके राज नीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। अब देख ना यह है कि उनकी असली परीक्षा पूर्वां चल के इन 15 जिलों में संगठनात्मकसक्रिय ता बढ़ाने और कांग्रेस के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करने में होगी।

            हिन्दी संवाद न्यूज से
           असगर अली की खबर
             उतरौला बलरामपुर। 

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