मुख्यमंत्री ने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उ0प्र0 के प्रथम मुख्यमंत्री तथा भारत के पूर्व गृह मंत्री भारत रत्न पं0 गोविन्द बल्लभ पंत की जयन्ती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी
स्वाधीनता संग्राम सेनानी, महान अधिवक्ता और उ0प्र0 के प्रथम
मुख्यमंत्री के रूप में पंत जी का अविस्मरणीय योगदान : मुख्यमंत्री
पंत जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रान्तिकारियों की मजबूती से पैरोकारी की थी
उ0प्र0 के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में पंत जी ने सुशासन और आर्थिक उन्नयन
की मजबूत नींव रखी तथा भूमि सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मॉडल प्रस्तुत किया
गृह मंत्री के रूप में देश की एकता और
अखण्डता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी
हिन्दी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में पंत जी का महत्वपूर्ण
योगदान, उनका जीवन राष्ट्रसेवा, जनसेवा और सुशासन की प्रेरणा देता
लखनऊ : 10 सितम्बर, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री तथा भारत के पूर्व गृह मंत्री भारत रत्न पं0 गोविन्द बल्लभ पंत की जयन्ती पर आज यहाँ लोक भवन स्थित उनकी प्रतिमा के सम्मुख चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी का जीवन राष्ट्रसेवा, जनसेवा, सुशासन और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उनके योगदान को देश और प्रदेश सदैव स्मरण करता रहेगा।
मुख्यमंत्री जी ने पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि पंत जी एक महान अधिवक्ता और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए चलाए गए आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उनका पूरा जीवन राष्ट्रहित और समाजहित के लिए समर्पित रहा। काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत द्वारा क्रान्तिकारियों के खिलाफ अभियोग दर्ज किया गया था। उस समय पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी ने इन क्रान्तिकारियों की पैरोकारी पूरी मजबूती के साथ की। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर रहे देशभक्त क्रान्तिकारियों के पक्ष को निर्भीकता और दृढ़ता के साथ न्यायालय के समक्ष रखा।
पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी ने स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण में सक्रिय भूमिका निभायी। वर्ष 1937 में उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रीमियर के रूप में चुना गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर स्वयं को पुनः स्वाधीनता आन्दोलन में समर्पित कर दिया। भारत छोड़ो आन्दोलन सहित स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आन्दोलनों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के पश्चात पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखण्ड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में स्थापित करना एक बड़ी जिम्मेदारी थी। पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी ने इस जिम्मेदारी का पूरी प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के आर्थिक उन्नयन के साथ ही, समाज के प्रत्येक तबके के हितों को ध्यान में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत की। भूमि सुधार के क्षेत्र में उनके द्वारा प्रस्तुत मॉडल महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला रहा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी केवल उत्तर प्रदेश के निर्माण और विकास तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश की एकता, अखण्डता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उस समय देश के भीतर भाषायी संघर्ष की परिस्थितियाँ थीं। समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयास भी हो रहे थे। पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, दूरदर्शिता और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता के साथ इन चुनौतियों का समाधान निकालने का प्रयास किया। हिन्दी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। राष्ट्र की एकता और भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयासों में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी का सार्वजनिक जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सत्ता और पद का उद्देश्य व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उत्तर प्रदेश के निर्माण और केन्द्र सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व तक उन्होंने प्रत्येक भूमिका का निर्वहन राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए किया। आज पं0 गोविन्द वल्लभ पंत जी की पावन जयन्ती के अवसर पर हमें उनके आदर्शों और संकल्पों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए। उनके द्वारा स्थापित सुशासन, जनकल्याण और राष्ट्रहित की परम्परा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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