रायबरेली, 04 मई 2026
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत रायबरेली जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए एफसीएम (Ferric Carboxymaltose) इंजेक्शन की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलोन में सोमवार को इस सेवा का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा द्वारा किया गया। इस दौरान पात्र गर्भवती महिलाओं को एफसीएम की डोज दी गई और उन्हें एनीमिया से बचाव व उपचार के बारे में जागरूक किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि एनीमिया गर्भावस्था के दौरान एक गंभीर समस्या है, जिसका असर मां और शिशु दोनों पर पड़ता है। एफसीएम थेरेपी के माध्यम से गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का प्रभावी उपचार संभव है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले में इस सेवा की शुरुआत मार्च माह में एफआरयू ऊंचाहार से की गई थी। वर्तमान में सलोन के अलावा डलमऊ, लालगंज और बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यह सुविधा उपलब्ध है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान 11 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया। उन्होंने कहा कि इस इंजेक्शन की खासियत यह है कि केवल एक डोज से ही हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार होता है, जिससे बार-बार अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ती। पहले आयरन सुक्रोज की पांच डोज देनी पड़ती थीं, जिसके कारण कई महिलाएं पूरा उपचार नहीं कर पाती थीं।
उन्होंने एनीमिया के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि थकान, चक्कर आना, कमजोरी, सांस फूलना और दिल की धड़कन तेज होना इसके प्रमुख संकेत हैं, जिन्हें अक्सर महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने बताया कि एफसीएम उपचार, मौखिक आयरन की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रतिकूल प्रभावों से जुड़ा पाया गया है। साथ ही, यह मातृ जटिलताओं के जोखिम को लगभग 21 प्रतिशत तक कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एफसीएम के उपयोग से हीमोग्लोबिन स्तर तेजी से और अधिक मात्रा में बढ़ता है, जिससे गंभीर एनीमिया के मामलों में शीघ्र सुधार संभव होता है।
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को संतुलित पोषण, आयरन युक्त आहार और नियमित एएनसी (एंटिनेटल केयर) जांच के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शुभ करन, डॉ. शरद, डॉ. साक्षी और डॉ. शिवांगी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

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