उतरौला, बलरामपुर-नगर क्षेत्र की सबसे पहली पुलिस चौकी सभी सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद अपनी उपयोगिता साबित करने में असफल साबित हो रही है।
 पांच महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद यहां का  ताला तक नहीं खुल सका है। लाखों रुपये खर्च करके नगरपालिका ने यहां दो वर्ष पहले दो पक्के कमरों का भी निर्माण कराया था। ताकि चौकी पर तैनात बीट आरक्षी व उपनिरीक्षक यहां सुनवाई करने के साथ विश्राम भी कर सकें। सुनसान पड़े इस चौकी में मुहल्ले के लोग ठेले और बाइक खड़ी करते है। एक गार्ड तक की ड्यूटी इस चौकी पर नहीं लगाई जाती। कहने के लिए यहां एक चौकी इंचार्ज व जह आरक्षियों की तैनाती है लेकिन उन्हे कभी किसी ने लगभग पांच महीनों से देखा तक नहीं है। इस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत गांधी नगर के पांच वार्ड, आर्यनगर के पांच वार्डों समेत अल्ला नगर, बंजारीबाग, राजाजोत, गोसाईं जोत, प्यालाजोत, अमया देवरिया, हरडीहवा के लगभग पंद्रह हजार की आबादी की सुरक्षा और मामलों की सुनवाई का क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों के लोगों को अपनी छोटी-बड़ी शिकायतें लेकर कोतवाली में जाने की और सुनवाई होने की प्रतीक्षा करने की विवशता है। एक तरफ महकमा नई चौकियां बनाने का कीर्तिमान स्थापित कर रहा है तो दूसरी तरफ पुरानी चौकी की बदहाल स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि अधिकारी जनता की सुरक्षा-संरक्षा के प्रति कितने जागरूक हैं। सीओ राघवेंद्र सिंह का कहना हैं कि अगर चौकी पर आरक्षी और प्रभारी की तैनाती है तो उन्हें जनता दर्शन की समयावधि में चौकी पर बैठने का निर्देश दिया जाएगा। कम से कम एक आरक्षी और गार्ड को नियमित रूप से वहां उपस्थित रहने का भी आदेश जारी किया जाएगा।

              हिन्दी संवाद न्यूज से
             असगर अली की खबर
              उतरौला बलरामपुर। 

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