अम्बेडकरनगर : लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए विवादित लाठीचार्ज के मामले ने अब पूरे प्रदेश में तूल पकड़ लिया है। इसी कड़ी में बुधवार को जलालपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने ताबड़तोड़ प्रदर्शन करते हुए राज्यपाल को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ता सिर्फ अपने साथी वकीलों की पिटाई का बदला नहीं लेना चाहते, बल्कि पूरे प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा का सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी वकीलों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

✍️ ये थीं मुख्य माँगें (एक नज़र में)

मांग का विषय विस्तृत मांग
जाँच लखनऊ लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
मुकदमे रद्द अधिवक्ताओं पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएँ।
कार्रवाई लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करो, कठोर सजा दो।
चैंबर और मुआवज़ा लखनऊ में ध्वस्त चैंबरों का पुनर्निर्माण कराओ और मुआवजा दो।
स्थायी व्यवस्था प्रदेश के सभी वकीलों के बैठने की पुख्ता और समुचित व्यवस्था करो।
भविष्य सुरक्षा अधिवक्ता संरक्षण बिल (Protection Bill) तुरंत पारित करो।
पेंशन (वरिष्ठ) 65+ आयु के गैर-आयकरदाता वकीलों को ₹25,000/माह पेंशन दो।
स्वास्थ्य बीमा गैर-आयकरदाता वकीलों व उनके परिवार को आयुष्मान कार्ड दो।

🎤 चेतावनी भी, एकजुटता भी

ज्ञापन सौंपने वालों में एसोसिएशन अध्यक्ष कृपा शंकर मौर्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हाशिम राजा और कोषाध्यक्ष चंद्र विजय समेत तमाम वकील मौजूद रहे।

अधिवक्ताओं की साफ़ चेतावनी:
"अगर हमारी माँगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में व्यापक रूप दिया जाएगा।"

यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी राहुल गुप्ता और ग्राम न्यायालय के अधिकारी  को सौंपा गया, जिनसे इसे राज्यपाल तक पहुँचाने की अपील की गई।


संक्षेप में: जलालपुर बार ने पूरी तरह से एकजुट होकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब वे ‘लाठीचार्ज और चैंबर विध्वंस’ को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस “अल्टीमेटम” पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं।

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