उत्तर प्रदेश /गोण्डा के कौड़िया क्षेत्र के पैड़ी बरा मे चल रही राजन जी महराज के मुखराबिंद की श्री राम कथा केअष्टम् दिवस पर श्रीराम कथा के 
भरत चरित्र एवं शबरी प्रसंग का वर्णन किया गया।
राजन जी महराज ने कहा राजकुमार भरत जी का त्याग, धर्म और निष्कलंक भ्रातप्रेम की दिव्य प्रतिमूर्ति है।भरत जैसे भाई का दर्शन मात्र होना वास्ताव मे दुर्लभ है।
चित्रकूट पहुंचकर भरत ने श्रीराम को ही अयोध्या का अधिपति स्वीकार किया।
महराज भरत जी का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम ही सच्चा राज्य है इसकी संतुष्टि ही सबसे बड़ा सुख है।
इसके साथ ही शबरी राम मिलन प्रकरण सुनाकर भक्ति भाव मे लोगो को शराबोर कर दिया। समाज मे ऊंच नींच जाति पाती और तरह तरह के भेद पैदा करने वालों के लिए यह कथा एक उदाहरण है, राजा दशरथ के पुत्र होते हुए शबरी माँ के झूठे बेर भगवान ने प्रेम और भक्ति मे खा लिए कोई ऊंच नीच जाति प्रथा का बंधन नहीं।
वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण का शबरी के आश्रम में आगमन भक्ति के शाश्वत आदर्श को प्रकट करता है। वर्षों की प्रतीक्षा में तप, सेवा और श्रद्धा से जीवन अर्पित करने वाली शबरी किसी जाति, वेश या विद्या से नहीं, बल्कि निष्कलुष प्रेम से प्रभु को प्राप्त करती हैं।

अष्टम दिवस पर फ़िल्मी कलाकार और सांसद गोरखपुर रविकिशन शुक्ला, प्रदीप शुक्ला (विधायक - सहजनवा) सहित दर्जनों लोग और अपार भीड़ उपस्थित रही।इस अपार भीड़ के लिए आयोजको ने पहले से पंडाल के बाहर भारी मात्रा मे कुर्सी लगवा दिया था काफी ज्यादा मात्रा मे बैठने कि व्यवस्था कि थी।

उमेश चन्द्र तिवारी 
9129813351
हिंदी संवाद न्यूज़ 
उत्तर प्रदेश 

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