बलरामपुर- महारानी लाल कुंवरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बी.एड. विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। संगोष्ठी का विषय था— “वैश्विक शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनर्स्थापन: नई शिक्षा नीति 2020 से प्राप्त अंतर्दृष्टियाँ”।
समापन दिवस पर पाँच से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा प्राध्यापकों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा हुई।
तकनीकी सत्र-III की अध्यक्षता प्रो. वीणा सिंह (मुख्य नियंता, एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज, बलरामपुर) ने की। इस सत्र में अजय कुमार, डॉ. लोकनाथ (बहरामपुर विश्वविद्यालय, उड़ीसा), डॉ. अखिलेश पटेल (एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग, रामनगर पीजी कॉलेज, बाराबंकी) तथा पंकज कुमार कुशवाहा ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। सत्र का संचालन डॉ. राम रहीस, आयोजन सचिव, द्वारा किया गया।
तकनीकी सत्र-IV की अध्यक्षता प्रो. रेखा विश्वकर्मा, सांस्कृतिक निदेशक, एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज ने की। इस सत्र में मुख्य वक्ता का संक्षिप्त परिचय डॉ. बी.एल. गुप्ता ने प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता प्रो. ज्ञानेंद्र नाथ तिवारी, शिक्षक शिक्षा संकाय, नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोहिमा ने “शिक्षा का उपनिवेश-मुक्तिकरण: वैश्विक दक्षिण के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने शिक्षा के डिकॉलोनाइजेशन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित करने हेतु अपनी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
तकनीकी सत्र-V में मुख्य वक्ता प्रो. संजय निंबालकर (महाराष्ट्र) रहे। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. दिनेश कुमार मौर्य ने की। मुख्य वक्ता का संक्षिप्त परिचय डॉ. भानु प्रताप सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, गणित विभाग, एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज ने प्रस्तुत किया। प्रो. निंबालकर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता एवं समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह परंपरा जिज्ञासा एवं प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने शून्य (Zero) के महत्व को रेखांकित करते हुए गणितीय विकास में भारत के योगदान को विशेष रूप से उल्लेखित किया तथा कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु भारतीय ज्ञान प्रणाली को अपनाना अनिवार्य है।
तकनीकी सत्र-VI में डॉ. हंसराज कुशवाहा (सहायक प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग, रतन सिंह डिग्री कॉलेज, बांसी) ने ब्रेनस्टॉर्मिंग शिक्षण विधि पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से कक्षा के भीतर एवं बाहर रचनात्मक तथा आलोचनात्मक सोच का विकास किया जा सकता है।
प्रो. बृजेश पांडेय (रामसहाय पीजी कॉलेज, रुद्रपुर, देवरिया) ने भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी है। इसमें आध्यात्मिकता, समग्र विकास, गुरु-शिष्य परंपरा, मूल्य-आधारित शिक्षा तथा समावेशिता जैसे तत्व निहित हैं। प्रो. पांडेय का संक्षिप्त परिचय रसायन शास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ऋषि रंजन पांडेय ने प्रस्तुत किया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सिंह (पूर्व अध्यक्ष, बी.एड. विभाग एवं डीन, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय) ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को भारत की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि यह विश्व में मानवता एवं नैतिक मूल्यों का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। उन्होंने भारतीय सभ्यता एवं ज्ञान परंपरा के पुनरुत्थान की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन सत्र की अध्यक्षता बी.एड. विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र सिंह ने की तथा मंच पर प्रो. रेखा विश्वकर्मा भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के सफल संयोजन में आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. श्री प्रकाश मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अंत में संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. राम रहीस ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. आशीष कुमार लाल, डॉ. आलोक शुक्ल, डॉ. सद्गुरु प्रकाश, डॉ. स्वदेश भट्ट, डॉ. अमित कुमार वर्मा, डॉ. अभिषेक कुशवाहा, श्री रिंकू, मानसी पटेल सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का संक्षिप्त सारांश डॉ. बसंत कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन शास्त्र विभाग, एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज ने प्रस्तुत किया।
यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक शिक्षा परिदृश्य में पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुई।

           हिन्दी संवाद न्यूज से
            रिपोर्टर वी. संघर्ष
              बलरामपुर। 

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