- इलाज हेतु आर्थिक मदद, चिकित्सीय मदद जैसे प्रकरणों में अधिकारियों से की वार्ता।

- सड़क, पानी, भूमि पैमाईश, पीएम और सीएम आवास जनसमस्या की शिकायत प्राप्त हुई।

- 'जनता दर्शन' में सुनीं जन-समस्याएं; अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश।

उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ | 16 मार्च, 2026

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज अपने आवास पर आयोजित 'जनता दर्शन' कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नागरिकों की समस्याओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुना। उपमुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार हर पात्र व्यक्ति को न्याय दिलाने और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रमुख व्यक्तिगत प्रकरण एवं मानवीय दृष्टिकोण
जनता दर्शन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने विशेष रूप से महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया:

पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा: जनपद सम्भल निवासी श्रीमती शांति देवी (पत्नी लक्ष्मण कुमार) ने विधवा पेंशन दिलाने हेतु अनुरोध किया पर जिलाधिकारी से वार्ता कर निर्देश दिए।

स्वास्थ्य एवं उपचार: लखनऊ की श्रीमती कमला देवी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने तथा वाराणसी की श्रीमती सरिता सेठ (पत्नी रामकुमार सेठ) ने कैंसर जैसे असाध्य रोग के उपचार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई। उक्त पर कार्यवाही हेतु अधिकारी को आदेश दिए।

आवास योजना: फिरोजाबाद से आई श्रीमती संध्या (पत्नी अमित कुमार) ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर दिलाने का अनुरोध किया।

प्रशासनिक सक्रियता और दूरभाष पर निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने जन-शिकायतों के निस्तारण में विलंब पर कड़ा रुख अपनाते हुए मौके से ही संबंधित जिलों के उच्चाधिकारियों से फोन पर वार्ता की। उन्होंने जिलाधिकारी बुलंदशहर, प्रतापगढ़, शामली, अंबेडकर नगर, मिर्जापुर, गाजियाबाद, अयोध्या, और फर्रुखाबाद को निर्देशित किया कि वे लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें।

साथ ही, कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उन्होंने पुलिस अधीक्षक संभल, रायबरेली, बदायूं, ललितपुर और चित्रकूट को निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य जी ने कहा कि "जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हमारी प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि गरीब और असहाय लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।"

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