निर्मल हृदय ही प्रभु का निवास स्थान है

-- डा. भारती गाँधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.

लखनऊ, 16 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, प्रधान कार्यालय के सभागार में आयोजित आध्यात्मिक सभा में बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने निर्मल हृदय ही प्रभु का निवास स्थान है, ऐसे में, प्रत्येक मनुष्य को अपना हृदय हमेशा भेदभाव, लालच, ईष्या, द्वेष से रहित रखना चाहिए। इस आध्यात्मिक सभा में  विभिन्न धर्मों के अनुयाइयों ने परमेश्वर का सर्वश्रेष्य रचना अर्थात मानव रचना पर गहन चर्चा हुई और मनुष्य जीवन के उदद्ेश्यों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। 

सभा में अपने विचार रखते हुए डा. गाँधी ने आगे कहा कि सभी धर्मों के अवतारों द्वारा प्रार्थना, दान, उपवास एवं शिक्षा के द्वारा ईश्वर को पाने का रास्ता बताया हैं। जब हमारा हृदय सभी दुर्गुणों से भरा रहेगा तो प्रभु का वास नहीं होगा। इसलिए हमें अपना हृदय निर्मल एवं पवित्र बनाये रखना चाहिए। आज लोगों में एक दूसरे के प्रति नफरत और वैमनस्यता बढ रही है और इसका सबसे बड़ा कारण है प्रभु के अवतारों की दी गयी शिक्षाओं का ज्ञान ना होना। इसीलिए यह जरूरी है कि भावी पीढ़ी को शुरू से ही भौतिक ज्ञान के साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी प्रदान करनी चाहिए।

संगोष्ठी में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को अंको के साथ ही अच्छे चरित्र और पवित्र हृदय वाला मनुष्य भी बनाना चाहिए। सभा का समापन बहुत ही प्रेरणादायी गीत ‘आज देश को नये विचार चाहिए......’ के सस्वर गायन एवं प्रसाद वितरण से हुआ।


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