उतरौला बलरामपुर - सोमवार की रात्रि ग्राम रेहरा माफ़ी की शिया मस्जिद में एक प्रसिद्ध कवि शुजा उतरौलवी के पिता हसन जाफ़र की बरसी के अवसर पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया। मजलिस को सम्बोधित करते हुए मौलाना ज़ाय र अब्बास साहब ने कहा कि ऐसे बनो कि जब तक जिन्दा रहो लोग तुमसे मिलने की तमन्ना करें, और जब तुम इस दुनिया को छोड़कर चले जाओ तो लोग तुम्हें याद करके आंसू बहाएं। मौलाना ज़ायर अब्बास ने कहा कि एक सफ़ल इंसान की सफ़लता के पीछे उसके माता पिता के प्रयासों और संघर्षो का बहुत बड़ा योगदान होता है। संसार में एक पिता ही अपने पुत्र को स्वयं से आगे देखना चाहता है। समाज की विडम्बना देखिये कि सफ़लता मिलने के बाद अधिकतर लोग सबसे पहले अपने बूढ़े माता पिता को ही भूल जाते हैं जिन्हें बुढ़ापे में उनके सहारे की सबसेअधिक अवश्यकता होती है।
इस अवसर पर इरफ़ान हैदर, फ़हमीद रज़ा, तौसीफ़ हसन,साजिद ईमाम, जौन जाफ़री, किश्वर रिज़वी, इरफ़ान जाफ़री, हिलाल रिज़वी अब्बास जाफ़र, समीर रिज़वी, तौक़ीर हसन, अली शहंशाह,जुहैर अब्बास, मुहम्मद अज मल, मोजिज़ अब्बास, मुहम्मद राशिद, सिराज अब्बास,अली मुर्तुज़ा और कैसर अब्बास के अलावा भारी संख्या शिया समुदाय के लोग मौजूद रहे।

                हिन्दी संवाद न्यूज से
               असगर अली की खबर
                   बलरामपुर। 

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