जलालपुर, अम्बेडकर नगर: नवरात्रि की पहली किरण ने जैसे ही जलालपुर की पावन धरती को स्पर्श किया, वैसे ही श्री शीतला माता मठिया मंदिर और विभिन्न मंदिरों के परिसर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मां शैलपुत्री की आराधना के लिए सूर्योदय से पूर्व ही भक्त इस जागृत पीठ पर पहुंच गए। मां के जयकारों से गूंजता मंदिर परिसर मानो किसी दिव्य उत्सव का साक्षी बन गया।दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं और यह स्थान आज पूरे क्षेत्र में एक शक्तिशाली और जागृत शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है। नवरात्रि का यह पवित्र पर्व यहां आस्था, भक्ति और अटूट विश्वास का अद्भुत संगम पैदा कर देता है।
मंदिर परिसर में माथा टेकने पहुंचीं श्रद्धालु सुनीता मिश्रा ने बताया कि हमारे पूर्वजों की आस्था का केंद्र रहा है। कई पीढ़ियों से हम यहां आ रहे हैं। यह कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि चमत्कारों का साक्षी जागृत स्थल है। जो भी यहां सच्चे मन से आया, मां ने उसे कभी निराश नहीं किया।" अपने इस विश्वास को दोहराते हुए उन्होंने बताया कि हर पर्व पर वे यहां उपस्थिति दर्ज कराती हैं। स्थानीय निवासी रंजू बिन्द ने बताया, "भोर में ही मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। ऐसा लग रहा था मानो हर कोई मां के दरबार में सिर्फ एक ही स्वर गूंज रहा हो - जय माता की! इस मंदिर का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितनी यहां की मान्यता। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कभी यह मंदिर मिट्टी के एक साधारण टीले के रूप में विद्यमान था, जो आज स्वरूप ले चुका है। समय के साथ और श्रद्धालुओं के बढ़ते विश्वास के चलते अब यह मंदिर मंदिरों के समूह में तब्दील हो गया है। आज पूरे परिसर में एक दर्जन से अधिक देवी-देवताओं के मंदिर विराजमान हैं, जो इस स्थान की दिव्यता को और बढ़ा देते हैं।
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