उतरौला बलरामपुर - नगर सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा, आस्था और परम्परा गत के तरीके से बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर प्रातःकाल से ही क्षेत्र के मन्दिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ पड़ी। सनातन धर्मावलं बियों ने स्नान के उप रान्त भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया विधि-विधान से पूजा- अर्चना  भी किया गया और दीपदान कर पुण्य लाभ भी प्राप्त किया। इसके बाद खिचड़ी, वस्त्र व अन्न का दान ब्राह्मणों एवं जरूर त मंदों को दिया गया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रां ति का विशेष महत्व है। इसी दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन आरम्भ माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि इसी तिथि को सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर गए थे, जिससे आपसी वैमनस्य समाप्त हुआ,और समर सता का सन्देश मिला। यही कारण है, कि इस दिन तिल-गुड़ के सेवन और दान की परम्परा चली आ रही है,जो आपसी मधुरता और सामाजिक सौहार्द का एक प्रतीक मानी जाती है। मकर संक्रांति से जुड़ी एक मान्यता यह भी है, कि इसी दिन गंगा माता का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस लिए पवित्र नदियों में स्नान और दान को विशेष फलदायी बताया गया है।हालांकि नगर क्षेत्र में गंगा स्नानसम्भव न होने के कारण श्रद्धा लुओं ने घरों व मन्दिरों में स्नान-दान कर पुण्य अर्जित किया।और ग्रामीण अंचलों में भी महिलाओं ने अपने पारम्परिक तरीके से गीत गाए, बच्चों नेपतंग बाजी का आनन्द लिया और घर-घर खिचड़ी व तिलकुट का प्रसाद वित रित किया गया। पूरे क्षेत्र में पर्व को लेकर उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। मकर संक्रांति केमाध्यम से लोगों ने धर्म, परम्परा और सामाजिक एकता का सन्देश देते हुए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक से मनाया गया।

           हिन्दी संवाद न्यूज से
          असगर अली की खबर
           उतरौला बलरामपुर। 

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