बबलू गर्ग ब्यूरो चीफ हिंदी संवाद न्यूज़
लोनी! बेहटा हाजीपुर, पाइपलाइन रोड, न्यू रामप्रस्थ विहार कॉलोनी में वार्षिकोत्सव माघ षुक्ल अष्टमी (भीष्माष्टमी) को दरबार प्रांगण में बडी धूमधाम से मनाया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता परम पूज्य श्री महंत नारायण गिरि जी महाराज ने की। इस धर्मसभा में उपस्थित संतों व गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे। सिद्धपीठ जल वाला मन्दिर, की आज से 32 साल पहले भव्य जग जननी दरबार के नाम पर स्थापना हुई थी वह दरबार आज अपना भव्य रूप लेकर सिद्धपीठ जल वाला मन्दिर के रूप में स्थापित हो चुका है। मां भगवती जगत जननी की असीम अनुकम्पा से दरबार में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को अनेकों लाईलाज बिमारियों में लाभ प्राप्त हुआ है। भव्य जग जननी दरबार में अभी तक 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालु भक्त आकर मत्था टेक चुके हैं। दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं में अभी तक 622 लोगों को नेत्र ज्योति और 657 लोगों को बोलने और सुनने की षक्ति प्राप्त हुई है। 2756 लोग टी. बी., कैंसर, ब्रेन हेमरेज जैसी घातक एवं असाध्य बिमारियों से मां भगवती की कृपा से ठीक हुए है। 6120 दंपतियों को सन्तान की प्राप्ति हुई है ओैर 1,14,354 लोग नशे की लत से निजात पा चुके हैं। इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए जल वाले गुरु जी ने कहा कि भव्य जग जननी दरबार लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र तो है ही साथ ही आज के समय में जब धर्म के प्रति लोगों की आस्था कम हो रही है, यह दरबार अपने आप में एक प्रमाण है जहांष्षास्त्र एवं ग्रंथों में वर्णित भगवान की अदृष्य षक्ति एवं मां भगवती की कृपा का साक्षात दर्षन किया जा सकता है। भगवान की कृपा जीव पर हमेषा बनी रहती है पर मनुष्य स्वयं ही सांसारिक भटकाव में आकर उसको भूल जाता है जिसके परिणामस्वरूप जीवन के सही मार्ग से हटकर कईं बार तो गलत मार्ग पर चला जाता है जिसके परिणामस्वरूप उसको अनेकानेक कष्ट भोगने पड़ते हैं। एक प्रषन के उत्तर में उन्होंने कहा कि जहां तक धर्मगुरुओं और सन्त महात्माओं पर प्रषनचिन्ह की बात है सबसे पहली बात गुरु परम्परा से धर्म से जुडे लोग आज भी अपनी जगह ठीक हैं केवल कुछ स्वयंभू मर्यादाविहीन लोगों ने धर्म के नाम पर कुछ ऐसे कार्य किए जिससे लोगों की आस्था में कमी आयी, इसके लिए उनके साथ-साथ आम आदमी भी दोषी है जो ऐसे लोगों के बहकावे में आकर अपनी सनातन संस्कृति को भूलकर भगवान तक की उपेक्षा करके ऐसे लोगो को ही भगवान मानकर उनका अनुकरण करने लगे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने धर्म की सही अनुपालना करे और वैदिक सनातन धर्म की मान्यताआंे को स्वीकार कर ऐसे तथाकथित लोगों जो स्वयं अपने आप को भगवान तक बताते हैं से अपने आप को बचाकर धर्म का अनुषरण करते हुए भगवान एवं भगवती जहां उसकी आस्था हो उनका नित्य प्रति सनातन रीति से भजन, पूजा यथासंभव करता रहे। इसी में उसका स्वयं का उसके परिवार एवं धर्म के साथ-साथ राष्ट्रहित की सुरक्षा एवं कल्याण संभव है। दरबार के सचिव श्याम वर्मा ने दरबार की वार्षिक रिपोर्ट पड़ी एवं मंच का संचालन एडवोकेट प्रदीप शर्मा ने कियाl धर्म सभा में साधु संत एवं क्षेत्र के काफी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थ्ति रहे।
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