जलालपुर (अंबेडकर नगर)।

भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मनाए जाने वाले पूर्व सैनिक सम्मान दिवस के अवसर पर 1971 के युद्ध में अप्रतिम योगदान देने वाले 85 वर्षीय पूर्व सैनिक ऑनरेरी कैप्टन का एनसीसी कैडेटों द्वारा सम्मान किया गया।


नगर क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालय रेडिएंट एकेडमी की एनसीसी इकाई द्वारा विद्यालय के पुस्तकालय में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य अखिलेश शुक्ला ने की। कार्यक्रम में तहसील क्षेत्र के बदरुद्दीनपुर गांव निवासी पूर्व सैनिक ऑनररी कैप्टेन जगन्नाथ दुबे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।




विद्यालय आगमन पर प्राचार्य द्वारा मुख्य अतिथि का माल्यार्पण कर एवं बुके भेंट कर स्वागत किया गया। इसके बाद शाल ओढ़ाकर उनकी उत्कृष्ट सैन्य सेवा का अभिनंदन किया गया। एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए वयोवृद्ध कैप्टन ने सैन्य सेवा से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान के अनुभवों को विस्तार से बताते हुए उस समय महसूस किए गए क्षणों से कैडेटों को अवगत कराया।


कैप्टन दुबे ने वर्तमान परिस्थितियों में अनुशासन के महत्व पर विशेष जोर देते हुए युवाओं से देश सेवा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुशासन और समर्पण ही एक सशक्त राष्ट्र की पहचान है।


विद्यालय के प्राचार्य अखिलेश शुक्ला ने अपने संबोधन में एनसीसी और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त किया।


इस अवसर पर एएनओ जीवन, दीपिका शुक्ला, लाइब्रेरियन अंजू सिंह, सुजीत श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे।


ऑनररी कैप्टन जगन्नाथ दुबे 



जलालपुर क्षेत्र के ग्राम बदरुद्दीनपुर निवासी जगन्नाथ दुबे ने वर्ष 1965 में जवान के रूप में सैन्य सेवा की शुरुआत की। हवलदार, नायब सूबेदार, सूबेदार से होते हुए एक जवान के रूप में पदोन्नति की सर्वोच्च रैंक सूबेदार मेजर तक पहुंचे। उत्कृष्ट सैन्य सेवा को देखते हुए सरकार ने ऑनररी कैप्टन रैंक पर प्रमोट किया। शानदार सेवा अवधि को पूर्ण कर 1996 में सेवा से अवकाश प्राप्त किया।


 कैप्टन दुबे 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में शामिल रहे। लगभग छः महीनों तक ढाका व उसके आसपास के क्षेत्र में अपनी पलटन के साथ युद्ध लड़ते हुए बांग्लादेश के निर्माण के प्रत्यक्षदर्शी बने। युद्ध खत्म होने के बाद भी लगभग दो महीनों तक बांग्लादेश की थल सेना को खड़ा करने तथा उसके प्रशिक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई।



Author 

Jeevan_Prakash


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