जलालपुर, अम्बेडकर नगर। पिंडोरिया क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक सीताघाट तट आज सामाजिक-सांस्कृतिक एकता के नए प्रतीक के रूप में उभरा, जहाँ 'श्री समाधि साहब सर्व समाज सेवा समिति' के तत्वावधान में निषादराज एवं वीर एकलव्य देव की प्रतिमाओं को एक भव्य मंदिर में स्थापित किया गया। इस गौरवशाली उद्घाटन समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का ऐतिहासिक अध्याय रचा। निषाद समाज के आचार्य कथा वाचक, निषाद संस्कृति प्रचारक विजयानन्द निषाद महाराज, श्यामजीत निषाद महाराज, रविन्द्र निषाद महाराज ने अन्य महराजों के साथ पूजन कार्य विधिवत करा के द्वारा अनावरण समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न कराया गया। सांस्कृतिक पुनर्पहचान का प्रतीक कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सांसद रितेश पाण्डेय ने कहा कि श्रीराम और निषादराज की मित्रता सनातन संस्कृति में सामाजिक समरसता, स्नेह और आपसी सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने जोर देकर कहा, "निषाद समाज का इतिहास बहुत समृद्ध और वीरतापूर्ण है। यह मंदिर नई पीढ़ी को उस गौरव से जोड़ेगा।"
मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने निषादराज के गौरवशाली इतिहास और वीर एकलव्य के अद्वितीय त्याग, समर्पण तथा गुरुभक्ति की महिमा को याद करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक प्रतीकों की स्थापना समाज की पहचान को सहेजने के लिए अत्यंत आवश्यक है। नई पीढ़ी को विरासत का ज्ञान राष्ट्रीय संयोजक निषाद पार्टी एवं पूर्व सांसद प्रवीण निषाद ने इस अवसर पर कहा, "यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र है। ऐसे प्रतीकों की स्थापना से आने वाली पीढ़ियों को अपनी महान विरासत, त्याग और वीरता का ज्ञान होगा तथा वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।" समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वामी रामनयन दास जी, वीरेंद्र महराज जी सहित अनेक धार्मिक विभूतियों ने बताया कि यह मंदिर समाज में आपसी प्रेम, सम्मान और सद्भावना को बढ़ाएगा। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद राजभर, विधायक धर्मराज निषाद, पूर्व जिलाध्यक्ष राम प्रकाश यादव, डॉ मिथिलेश त्रिपाठी, वरिष्ठ नेता पंकज वर्मा,डॉ महेंद्र प्रताप चौहान, अंशुमान सिंह, आशुतोष उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह, त्रिभुवन नाथ, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सहेन्द्र प्रताप वर्मा, जिला पंचायत सदस्य माखनलाल निषाद, निषाद पार्टी जिलाध्यक्ष संजय निषाद, धड़कन निषाद, स्वामी रामनयन दास जी, संदीप अग्रहरि, सरिता निषाद, संजीव मिश्र,धनंजय त्रिपाठी, दीपक शुक्ल, वीरेंद्र महराज जी, शुभम पांडे, प्रवीण गौड, विनय सिंह, महंथ निर्भय दास, महंथ पाण्डेय, गजेन्द्र निषाद, रामधनी निषाद, सुनील गुप्ता, राम सूरत निषाद, आनंद मिश्र, अरुण मिश्र, विकाश निषाद, सोनू गौड, बबलू त्रिपाठी,अभिषेक उपाध्याय, शिवम आर्या, विपिन पांडे, अनुज सोनकर समेत मौजूद रहे। ऐतिहासिक महत्व निषादराज (गुरु) और एकलव्य की संयुक्त उपस्थिति इस मंदिर को विशेष बनाती है। यह गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा, समर्पण, और सामाजिक समावेशन के सनातन मूल्यों का प्रतीक है। इसके माध्यम से सदियों पुरानी वीर गाथाओं और मूल्यों को नए युग तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस भव्य आयोजन ने सीताघाट को एक नए सांस्कृतिक तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित किया है, जहाँ आने वाले समय में दूर-दूर से लोग अपनी ऐतिहासिक विरासत के दर्शन कर सकेंगे।

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