उतरौला बलरामपुर- नगर के मोहल्ला आर्य नगर में स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में सिखों के दसवें गुरु,गुरु गोविन्द सिंह का प्रकाश पर्व (जयंती) अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति और गरिमामय के वातावरण में मनायागया इस अवसर पर गुरुद्वारा के परिसर में “वाहे गुरु” के जयकारों से गूंजउठा और श्रद्धालुओं ने गुरु साहेब के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प भी लिया गया।सिख परम्परा में जन्म दिवस को “प्रकाश पर्व” कहा जाता है,जो गुरु के अवतरण (जन्म) की स्मृति का प्रतीक होता है। गुरु गोविन्द सिंह का प्रकाश पर्व केवल सिख समाज ही नहीं,बल्कि सम्पूर्ण देश को साहस, त्याग,धर्म-रक्षा और आत्म सम्मान के मूल्यों की प्रेरणा देता है। गुरुद्वारा सिंह सभा के मुख्य ग्रंथी सरदार बल वान सिंह ने गुरु गोविन्द सिंह के जीवन पर प्रका श डालते हुए कहा कि गुरु साहिब का जन्म पटना के साहिब(वर्त मान बिहार) में हुआ था उनके पिता गुरुतेग बहा दुर एक महान बलिदानी गुरु थे, जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देदिया था, जब कि माता माता गुजरी त्याग,धैर्य और संस्कारों की प्रतिमूर्ति थीं।उन्होंने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह बचपन से ही अद्भुत साहस,आध्या त्मिक चेतना औरनेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण थे।
ज्ञानी जी ने बताया कि गुरु गोविन्द सिंह का सबसे महान योगदान बैसाखी1699 में खाल सा पंथ की स्थापना की है। इसी के साथ पंज प्यारे की परम्परा प्रारम्भ हुई,जिसने समाज को समानता,अनुशासनऔर अन्याय के विरुद्ध संग ठित संघर्ष का मार्ग दिखाया। गुरु साहिब का प्रेरक उद्घोष “सवा लाख से एक लड़ाऊं, तभी गोविन्द सिंह के नाम कहाऊं”आज भी अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का शाश्वत सन्देश देता है। इस अवसर पर गुरुद्वारा के प्रधान सर दार दलबीर सिंह खुरा ना ने गुरु गोविन्द सिंह के चार साहिब जादों के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि यह भारतीय इतिहा स का स्वर्णिम और अनु पम अध्याय है।उन्होंने यह भी बताया कि बड़े साहिबजादे अजीतसिंह और जुझार सिंह युद्ध भूमि में वीर गति को प्राप्त हुए, जबकि छोटे साहिब जादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने धर्म परिवर्तन से इनकार करते हुए दीवार में उन को चिनवाकर अमर बलिदान दिया। यह बलिदान धर्म, सत्य और आत्म सम्मान की सर्वो च्च का एक मिसाल है।
इस कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि गुरु गोविन्द सिंह ने मान व गुरुओं की परम्पराको समाप्त कर “गुरु ग्रंथ साहिब” को सिखों का शाश्वत और अन्तिम गुरु घोषित किया गया, जिससे ज्ञान,शब्द और समानता की सर्वोच्चता स्थापित हुई।प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा में अखण्ड पाठ, कीर्तन-कथा तथा विशाल लंगर सेवा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु साहि ब के दिखाए मार्ग पर चलने,मानवता की सेवा करने और अन्याय के विरुद्ध सदैव खड़े रहने का संकल्प लिया।विधा यक राम प्रताप वर्मा की धर्म पत्नी सुनीता वर्मा ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह का प्रकाश पर्व हमें सिखाता है कि अन्याय के सामने कभी न झुकें, सत्य और धर्म की रक्षा करें, तथा समाज में समानता,साहस और सेवा की भावना को अपने जीवन में उतारें।
इस पावन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अनूप चन्द गुप्ता,रघुवीर सिंह, प्रीत पाल सिंह, गुरविन्दर सिंह, सुरेन्द्र पाल पाहु जा, परमजीत सिंह, प्रताप सलूजा, भूपिन्दर सिंह, हर चरन सिंह, त्रिलोचन सिंह, राजेश खुराना, संदीप खुराना, राकेश खुराना, महेंन्द्र प्रताप सिंह, मनोज कसेरा,दीपक पाहुजा, रघुवीर सिंह पाहुजा, अमित खुराना, विंकल खुराना, देवेन्द्र सिंह के अलावा भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और लंगर प्रसाद भी ग्रहण किया। समूचा आयोजन श्रद्धा,अनु शासन और आपसी सौहार्द का जीवन्त उदाहरण बना, जिसने गुरु गोविन्द सिंह के महान आदर्शों को जन- जन तक पहुंचाने का कार्य किया गया।
हिन्दी संवाद न्यूज से
असगर अली की खबर
उतरौला बलरामपुर।
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