*वृद्ध आश्रम, गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन*

           उ0 प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ व माननीय जनपद न्यायाधीश श्री मयंक कुमार जैन के निर्देश के अनुपालन में वृद्ध आश्रम, गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा के सचिव श्री कृष्ण प्रताप सिंह की अध्यक्षता में किया गया। विधिक साक्षरता शिविर में सचिव श्री सिंह द्वारा वृद्ध आश्रम, गोण्डा में निवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि जीवन को मुख्यतः तीन अवस्थाओं में बांटा गया है, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था। जिस प्रकार बाल्यावस्था के बाद युवावस्था आती है, ठीक उसी प्रकार युवावस्था के बाद वृद्धावस्था आती है, इसलिए हर कोई सदैव युवा रहने का स्वप्न देखता है।
            वृद्धावस्था में उसे समाज एवं परिवार की नजरों में बोझ, अनुपयोगी आदि समझे जाने से उसे मानसिक पीड़ा होती है। जो व्यक्ति कुछ समय पहले तक सबके लिए विशिष्ट था, महत्वपूर्ण था, अचानक ही उसे बोझ समझा जाने लगता है, जब उसके मान-सम्मान व भावनाओं का महत्व काफी कम हो जाता है और वह मानसिक रूप से स्वयं को अकेला पाता है तो वह उसके जीवन का सबसे कठिन समय होता है। आज हममें से बहुत से लोग बुजुर्गों के महत्व से भली-भांति परिचित नही है। बड़े बुजुर्गों से परिवार में अनुशासन बना रहता है। 
           अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए बुजुर्गों के अनुभव बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। वृद्धावस्था उसके आराम करने की अवस्था होती है। वह जीवन भर दूसरों की जरूरतों को पूरा करने और अपने कर्तव्यों को निभाने में ही लगा रहता है। सभी व्यक्तियों को मानसिक रूप से यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि वृद्धावस्था एक न एक दिन सबके जीवन में आती है। वृद्धों के साथ सम्मानजनक व्यवहार न करना पूर्णतः अनैतिक है, इसलिए हमें उनका महत्व समझते हुए उनका सम्मान करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए। उनकी उपस्थिति तथा मार्गदर्शन परिवार और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी है। यदि आज हम उनका सम्मान करेंगे, तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी से सम्मान पाने के अधिकारी होंगे।
           वृद्धजनों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में सचिव द्वारा संवैधानिक उपबन्धों पर विशिष्ट रूप से जानकारी देते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 पर विषय बल देते हुए यह बताया गया कि यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति अपने पिता या माता का, जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, भरण पोषण करने में उपेक्षा करता है या भरण पोषण करने से इन्कार करता है, तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, ऐसी उपेक्षा साबित हो जाने पर ऐसे व्यक्ति को पिता या माता का भरण पोषण करने के लिए मासिक भत्ता देने के सम्बन्ध में निर्देश दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त सचिव द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के विधि-व्यवस्था, सरकारी नीतियों एवं निःषुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की विस्तृत जानकारी दी गयी। सचिव द्वारा वृद्ध आश्रम, गोण्डा में प्रवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के आश्रय एवं भण्डार/पाक गृह के साफ-सफाई हेतु आवष्यक निर्देश देते हुए कोविड-19 प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करने हेतु बताया गया। 
           इस अवसर पर वृद्ध आश्रम के प्रबन्धक सहित संवासी जगदीश भारती, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गोण्डा के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा व पराविधिक स्वयं सेवक प्रभुनाथ सहित अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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