बलरामपुर- धारा 34 के संबंध में ज्ञापन देने पहुँचे अधिवक्तागण से मुलाकात न हो पाने को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि ज्ञापन प्राप्त करने से इंकार करने जैसी कोई बात नहीं थी, बल्कि पूर्व सूचना का अभाव और समय की बाध्यता ही इस घटनाक्रम की मुख्य वजह बनी।
'बच्चों की प्रतीक्षा और पूर्व प्रतिबद्धता थी प्राथमिकता'
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने वस्तुस्थिति रखते हुए बताया कि अधिवक्ता संघ द्वारा कलेक्ट्रेट आगमन की कोई पूर्व सूचना प्रशासन को नहीं दी गई थी। जिस समय अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुँचे, उस समय वह अपने पूर्व निर्धारित राजकीय कार्यक्रम के लिए प्रस्थान कर चुके थे।
उन्होंने बताया कि समेकित दिव्यांग विद्यालय में दिव्यांग बच्चों का एक विशेष कार्यक्रम आयोजित था, जहाँ बच्चे पूर्वाह्न 12 बजे से उनकी राह देख रहे थे। मासूम बच्चों की प्रतीक्षा, उनके प्रति संवेदनशीलता और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की मर्यादा के दृष्टिगत वहाँ समय पर पहुँचना अत्यंत आवश्यक था।
'तथ्यों को गलत रूप में प्रस्तुत करना अनुचित'
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कलेक्ट्रेट में मुलाकात न हो पाना केवल समय की परिस्थितियों और पूर्व सूचना न होने का परिणाम था। उन्होंने ताकीद की कि इस घटनाक्रम को किसी अन्य रूप में प्रस्तुत करना या ज्ञापन न लेने से जोड़ना वास्तविक तथ्यों के बिल्कुल विपरीत है।
"जिला प्रशासन अधिवक्ता समाज का पूर्ण सम्मान करता है। अधिवक्तागण न्यायिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। उनके द्वारा उठाए जाने वाले विधिक एवं जनकल्याणकारी मुद्दों पर नियमानुसार संवाद और आवश्यक कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन सदैव तत्पर है।"
— डॉ. विपिन कुमार जैन, जिलाधिकारी
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