हिंदी के निरंतर प्रचार-प्रसार से देश में बढ़ रहा हिंदी का प्रभाव : विचार गोष्ठी आयोजित

लखनऊ, 19 सितम्बर 2026।
हिंदी के प्रचार-प्रसार, उन्नति एवं व्यापक प्रयोग को लेकर मंजूषा, लखनऊ द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने और युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए योजनाबद्ध प्रयासों पर जोर दिया। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित गोष्ठी में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश का विशेष सहयोग रहा।

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संजय जायसवाल ‘संजय’ ने कहा कि कोई भी भाषा कमतर नहीं है, सभी का अपने क्षेत्र में महत्व है। हिंदी देशभर में व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषा के रूप में उभरी है। अहिंदी भाषी क्षेत्रों में भी पर्यटन के दृष्टिकोण से स्थानीय लोगों में हिंदी समझने-बोलने का चलन बढ़ा है, जो हिंदी के निरंतर प्रचार-प्रसार का सकारात्मक परिणाम है।

प्रभारी संपादक दिनेश कुमार गुप्ता ने विभिन्न सरकारों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस जैसे अवसरों पर निरंतर प्रयासों से हिंदी के प्रति जागरूकता और इसके प्रयोग में वृद्धि हुई है।

मंजूषा के निदेशक शैलेश श्रीवास्तव ने युवाओं में ऑनलाइन अध्ययन के बढ़ते चलन के बीच हिंदी के कम प्रयोग पर ध्यान आकर्षित करते हुए जनरेशन-ज़ेड (Gen Z) को हिंदी से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध प्रयासों की आवश्यकता बताई।

वक्ता अलका सक्सेना और सियाराम पांडेय ‘शांत’ ने कहा कि हिंदी के निरंतर प्रचार-प्रसार के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और हिंदी के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

गोष्ठी का संचालन अजय मिश्रा ‘अजय श्री’ ने किया। उन्होंने हिंदी के व्यापक प्रसार तथा इसे राष्ट्रभाषा घोषित करने की आवश्यकता पर विचार रखे तथा काव्य पाठ के माध्यम से श्रोताओं को आनंदित किया।

युवा वक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने युवाओं में अंग्रेजी के प्रति बढ़ते रुझान पर चिंता व्यक्त करते हुए परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रुति जायसवाल की सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर सचिव विवेक कुमार शुक्ला ने स्वागत किया, जबकि उपाध्यक्ष प्रमोद अग्निहोत्री ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

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