लखनऊ :ः 20 सितम्बर, 2026 :ः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी हजारों वर्ष पुरानी सनातन परम्परा, ऋषि संस्कृति और उस जीवन-दृष्टि में है, जिसने हमेशा सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की कामना की। भारत की आत्मा सनातन है और सनातन का मूल भाव किसी व्यक्ति, पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण से जुड़ा हुआ है। हमारी परम्परा ने कभी अपने ज्ञान को अन्तिम अथवा संकीर्ण सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि दुनिया के प्रत्येक कोने से आने वाले श्रेष्ठ विचारों का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री जी आज गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, गौतमबुद्धनगर में आयोजित ‘नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ पर केन्द्रित ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेरणा विमर्श आज के समय एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पहल है। समाज में अनेक ऐसे विषय हैं, जिन पर स्वस्थ संवाद और विमर्श की आवश्यकता है। ऐसे विषयों को दबाने अथवा उनसे बचने के बजाय समाज के बीच रखकर उनके विभिन्न पहलुओं को समझना चाहिए। प्रेरणा विमर्श ने इसी आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास किया है। इसके माध्यम से विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श, कार्यक्रम, वीडियो और शोधपरक सामग्री तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की ऋषि परम्परा को समझने के लिए उसके मूल मंत्रों और जीवन-दर्शन को समझना आवश्यक है। हमारी प्रार्थना रही है कि ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ अर्थात दुनिया की सभी दिशाओं से हमारे पास श्रेष्ठ और कल्याणकारी विचार आएं। यह एक ऐसी सभ्यता की पहचान है, जो अपने चारों ओर दीवार खड़ी करने के बजाय अच्छे विचारों के लिए अपने द्वार खोलती है। भारत ने ज्ञान को कभी किसी एक वर्ग या व्यक्ति की निजी सम्पत्ति नहीं माना। ऋषियों ने ज्ञान का अर्जन भी किया और उसे समाज के कल्याण के लिए उपलब्ध भी कराया।
भारत ने दुनिया को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश दिया। हमारी संस्कृति में कहा गया ‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात यह अपना है और यह पराया है, ऐसी गणना छोटे मन वाले करते हैं। उदार चरित्र वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है। यही भारतीय दृष्टि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के रूप में दिखाई देती है। भारत ने कभी केवल अपने सुख की कामना नहीं की। हमारी प्रार्थना रही ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्’ अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सबका मंगल हो और कोई भी दुख का भागी न बने।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारतीय दर्शन का विस्तार इतना व्यापक है कि यहां ‘एकम् सत्य विप्रा बहुधा वदन्ति’ कहा गया अर्थात सत्य एक है, विद्वान उसे अलग-अलग नामों और रूपों में व्यक्त करते हैं। इसीलिए भारत ने अलग-अलग पूजा पद्धतियों और उपासना के मार्गों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान की परम्परा विकसित की। भारत की संस्कृति में नारी के सम्मान को अत्यन्त उच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। यह केवल श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था का मूल दर्शन रहा है। भारतीय संस्कृति ने नारी को परिवार, समाज और राष्ट्र की शक्ति के रूप में स्वीकार किया।
भारत की संस्कृति में धरती के प्रति भाव भी अत्यन्त विशिष्ट रहा है। हमारी परम्परा कहती है कि ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ अर्थात पृथ्वी हमारी माता है और हम सब उसके पुत्र हैं। इसी भाव से भारत की प्रकृति, पर्यावरण और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा जुड़ी हुई है। भारतीय दर्शन में ‘समत्वं योग उच्यते’ कहा गया है अर्थात समभाव ही योग है। यह दृष्टि व्यक्ति को भेदभाव से ऊपर उठाकर व्यापक मानवता से जोड़ती है। उन्होंने भगवान बुद्ध के संदेश ‘अप्प दीपो भव’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से व्यक्ति को अपने अन्दर स्वयं प्रकाश उत्पन्न करने की प्रेरणा दी गई। भारत की आध्यात्मिक परम्परा व्यक्ति को अंधानुकरण नहीं, बल्कि सत्य की खोज, आत्मचिन्तन और आत्मबोध की ओर ले जाती है।
मुख्यमंत्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे’ केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य की स्थापना का संदेश है। समाज में सज्जनों की रक्षा और दुष्ट प्रवृत्तियों के नियंत्रण के बिना स्वस्थ व्यवस्था कायम नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की सनातन परम्परा की उदारता का प्रमाण यह भी है कि जब दुनिया के कई हिस्सों में विभिन्न समुदायों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, तब भारत ने उन्हें आश्रय दिया। उनसे यहां यह प्रश्न नहीं किया गया कि उनकी पूजा-पद्धति क्या है अथवा वे किस परम्परा का पालन करते हैं। भारत ने विभिन्न मतों और उपासना पद्धतियों को स्थान दिया। इसलिए भारत की सनातन परम्परा को संकीर्णता के चश्मे से देखने का प्रयास उसकी मूल प्रकृति को समझने में विफलता है।
मुख्यमंत्री जी ने पूर्व उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी के हालिया बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए पद की गरिमा और संविधान की मर्यादा सर्वोच्च होनी चाहिए। ऐसे पदों पर रह चुके व्यक्तियों के वक्तव्यों का प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव देश की सामाजिक और राष्ट्रीय छवि पर भी पड़ता है। भारत की सनातन चेतना और सांस्कृतिक पहचान को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। राष्ट्र की एकता, अखण्डता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिबद्धता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिन लोगों ने देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर दायित्व निभाया है, उनसे समाज स्वाभाविक रूप से अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है। श्री हामिद अंसारी के बयान को लेकर अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां भारत की मूल चेतना और सनातन परम्परा को लेकर गलत संदेश देती हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी के इंदौर के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश की संस्कृति में महिला, बुजुर्ग, दिव्यांग अथवा अपने से बड़े व्यक्ति को सम्मान देने और पहले उन्हें रास्ता देने की परम्परा रही है, वहां नारी सम्मान केवल राजनीतिक वक्तव्य का विषय नहीं हो सकता। भारतीय समाज में महिलाओं तथा वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संस्कार का हिस्सा है। कार्यक्रम से सम्बन्धित प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों से भारतीय सामाजिक मूल्यों और मर्यादा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है।
जिन प्रवृत्तियों से समाज में महिलाओं की गरिमा कम होती है अथवा युवाओं के सामने गलत उदाहरण प्रस्तुत होता है, उनसे समाज को सावधान रहना चाहिए। भारत के समक्ष केवल आर्थिक विकास की चुनौती नहीं है, बल्कि देश को ऐसी प्रवृत्तियों से भी सावधान रहना होगा, जो समाज को जाति, पंथ, क्षेत्र और संकीर्ण राजनीतिक हितों के आधार पर बांटने का प्रयास करती हैं। कुछ लोग भारत की संस्कृति और परम्परा के सम्बन्ध में युवाओं के मन में भ्रम पैदा करना चाहते हैं। युवाओं के सामने यदि अपनी जड़ों, इतिहास और महापुरुषों की सही जानकारी नहीं होगी तो उनके अन्दर पहचान का संकट पैदा हो सकता है। भारत की युवा पीढ़ी को अपने देश, अपनी संस्कृति और अपने महापुरुषों के प्रति गौरव की भावना के साथ आधुनिक ज्ञान और तकनीक से भी जुड़ना होगा।
भारतीय नारी शक्ति की परम्परा अत्यन्त प्राचीन और गौरवशाली है। गार्गी और मैत्रेयी ने ज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। अनसूया ने तप, त्याग और साधना का आदर्श प्रस्तुत किया। मीराबाई ने भक्ति के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। अहिल्याबाई होल्कर ने शासन और लोक कल्याण का आदर्श स्थापित किया। रानी दुर्गावती ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध वीरतापूर्वक संघर्ष किया। रानी लक्ष्मीबाई ने मात्र 26 वर्ष की आयु में मातृभूमि के लिए बलिदान दिया। उनका जीवन आज भी युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री जी ने रानी अवन्तीबाई लोधी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 27 वर्ष की आयु में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। मुख्यमंत्री जी ने झलकारी बाई कोरी और ऊदा देवी पासी के साहस और बलिदान का भी उल्लेख किया और कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष में समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं ने अद्वितीय भूमिका निभाई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वीरांगनाओं की स्मृति और योगदान को सम्मान देने के लिए रानी अवन्तीबाई लोधी, झलकारी बाई कोरी और ऊदा देवी पासी के नाम पर तीन महिला पी0ए0सी0 बटालियन स्थापित की हैं। इसका उद्देश्य केवल स्मरण करना नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को यह बताना भी है कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र रक्षा में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है।
मुख्यमंत्री जी ने सुश्री कल्पना चावला का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मूल की बेटी ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने श्रीमती पी0टी0 ऊषा का उदाहरण देते हुए कहा कि खेल के क्षेत्र में उन्होंने भारतीय महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व किया। उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक सुश्री अस्मिता डे का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्होंने ग्लासगो राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। आज भारतीय महिलाएं अंतरिक्ष, विज्ञान, पुलिस, प्रशासन, खेल, उद्योग, शिक्षा, उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने विकास की रणनीति में चार प्रमुख वर्गों गरीब, किसान, युवा और महिला को केन्द्र में रखा है। महिला सशक्तिकरण के लिए केन्द्रीय स्तर पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ व ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ और उत्तर प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ संचालित की जा रही हैं। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के अन्तर्गत प्रदेश सरकार बालिका के जन्म से लेकर स्नातक शिक्षा तक के विभिन्न चरणों में सहयोग उपलब्ध कराती है। इससे बालिका को बोझ समझने की मानसिकता को बदलने में मदद मिलती है।
‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के अन्तर्गत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सरकार सहयोग करती है। योजना के अन्तर्गत 01 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल विवाह सम्पन्न कराना नहीं, बल्कि गरीब परिवार की बेटी को सम्मानजनक जीवन की शुरुआत के लिए सहयोग देना है।
‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के माध्यम से देश में लगभग 04 करोड़ परिवारों को आवास उपलब्ध कराया गया है। उत्तर प्रदेश में लगभग 65 लाख परिवारों को इसका लाभ मिला है। लगभग 12 लाख और परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। गरीब के लिए पक्का मकान केवल एक भवन नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता का आधार है।
देश में लगभग 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में लगभग 16 करोड़ लोग इसका लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गरीब परिवार के जीवन में तब बड़ा परिवर्तन आता है, जब उसे भोजन की चिन्ता से मुक्ति मिलती है और वह अपनी आय को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च कर सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘स्वामित्व योजना’ के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आवासीय सम्पत्ति का अभिलेखीकरण किया जा रहा है। लगभग 03 करोड़ परिवारों तक घरौनी पहुंचाने का कार्य किया गया है। महिलाओं को सम्पत्ति के स्वामित्व में प्राथमिकता मिलने से उनके आर्थिक अधिकार और सामाजिक सम्मान को मजबूती मिलती है।
‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के अन्तर्गत देश में लगभग 12 करोड़ निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को लकड़ी और धुएं से होने वाली परेशानियों से राहत मिली है। महिला के स्वास्थ्य, समय और सम्मान की रक्षा करना भी महिला सशक्तिकरण का हिस्सा है। देश में लगभग 12 करोड़ घरेलू शौचालयों का निर्माण कराया गया। खुले में शौच से मुक्ति के बाद अब गांवों को स्वच्छ, सुंदर और स्थायी रूप से स्वच्छ बनाए रखने के लिए ओ0डी0एफ0 प्लस-प्लस की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 54 हजार बी0सी0 सखी कार्य कर रही हैं। बैंकिंग सेवाओं को गांव तक पहुंचाने वाली ये महिलाएं स्वयं भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। डिजिटल और बैंकिंग व्यवस्था के विस्तार से गांव की महिला अब वित्तीय लेन-देन, सरकारी योजनाओं के लाभ और बैंकिंग सेवाओं तक ग्रामीण परिवारों की पहुंच आसान बना रही है।
झांसी में वर्ष 2019 में केवल 05 महिलाओं से शुरू हुई बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी आज लगभग 62 हजार महिलाओं को जोड़ चुकी है। इस संस्था का कारोबार लगभग 115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और इससे जुड़ी महिलाओं को लगभग 08 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है। इसी प्रकार आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी महिला उत्पादक संगठनों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन विभिन्न प्रयासों से लगभग 04 लाख महिलाएं जुड़ चुकी हैं। महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ तब होगा, जब महिला आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम हो और अपने परिवार के साथ-साथ व्यापक आर्थिक गतिविधि में भी योगदान दे।
प्रदेश की लगभग 08 हजार न्याय पंचायतों में से 04 हजार न्याय पंचायतों में महिलाओं को डिजिटल उद्यमिता से जोड़ने, प्रशिक्षित करने और उन्हें नए आर्थिक अवसरों से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। इससे गांव की महिला भी डिजिटल तकनीक के माध्यम से अपने उत्पाद और सेवाएं बड़े बाजार तक पहुंचा सकती है। तकनीक को महिला सशक्तिकरण का माध्यम बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में है। प्रदेश में लगभग 1.10 करोड़ निराश्रित महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का दायित्व है कि समाज के कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिले और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में लगभग 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। अब यह संख्या बढ़कर लगभग 44 हजार हो चुकी है। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या और बढ़ाने के लिए आगे भी भर्ती की जाएगी। इससे महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी बढ़ेगी। प्रदेश के कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी भी लगभग 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत तक पहुंची है।
भारत दुनिया का सबसे युवा कार्यबल रखने वाला देश है। उत्तर प्रदेश की लगभग 56 प्रतिशत आबादी युवा है। युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, कौशल, उद्यमिता और निवेश के अवसर बढ़ाना आवश्यक है। युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बने, यही नए भारत की दिशा है। विगत लगभग 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश में करीब 09 लाख सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई गई हैं। पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को अवसर देने का प्रयास किया गया है।
प्रदेश में लगभग 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाइयां हैं। इनसे लगभग 3.25 करोड़ युवा जुड़े हुए हैं। छोटे और मध्यम उद्यम प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं। इन्हें तकनीक, पूंजी, बाजार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर रोजगार के अवसर और बढ़ाए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का भूमि पूजन/शिलान्यास किया जा चुका है। इन परियोजनाओं से लगभग 65 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की सम्भावना है। निवेश का अर्थ केवल पूंजी आना नहीं, बल्कि उसके साथ उद्योग, रोजगार, तकनीक, कौशल और स्थानीय अर्थव्यवस्था का विस्तार होना है।
उत्तर प्रदेश का बजट विगत वर्षों में लगभग तीन गुना हुआ है। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है और प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस राज्य के रूप में आगे बढ़ रहा है। जिस उत्तर प्रदेश को कभी ‘बीमारू’ राज्य के रूप में देखा जाता था, वह अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बन रहा है।
विकास के लिए कानून-व्यवस्था का मजबूत होना आवश्यक है। सरकार ने भगवान श्रीराम से मर्यादा, भगवान श्रीकृष्ण से कर्तव्य और भगवान बुद्ध से आत्मनिर्भरता एवं आत्म प्रकाश की प्रेरणा लेते हुए अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। भगवान श्रीराम मर्यादा के प्रतीक हैं। उनके जीवन से शासन में अनुशासन, न्याय, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण कर्म और सत्य की प्रेरणा देते हैं। कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता और शासन का दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराए।
मुख्यमंत्री जी ने वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू, अव्यवस्था और विभिन्न प्रकार के सामाजिक विभाजन की घटनाएं होती थीं। उस समय सत्ता और राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने इन परिस्थितियों का लाभ उठाया। आज जब कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है, निवेश बढ़ा है और विकास की गति तेज हुई है, तब पहले की व्यवस्था से लाभ उठाने वाले लोग असहज हैं। ऐसे तत्व फिर से समाज को विभाजित करने और अराजकता पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। युवाओं को ऐसे प्रयासों को समझना होगा और समाज को विकास तथा राष्ट्रहित के मार्ग पर आगे बढ़ाना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयास से नहीं होता। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध होना आवश्यक है। उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के जीवन और उनकी राष्ट्रभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारत में बार-बार जन्म लेकर राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने की भावना व्यक्त की थी। उन्होंने ठाकुर रोशन सिंह और चन्द्रशेखर आजाद के बलिदान को स्मरण किया। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं ने अपने जीवन की चिन्ता किए बिना राष्ट्र को सर्वोच्च स्थान दिया।
मुख्यमंत्री जी ने वीर विनायक दामोदर सावरकर का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 28 वर्ष की आयु में उन्हें दो आजीवन कारावास की सजा दी गई। उन्होंने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और गुरु गोबिन्द सिंह जी के संघर्ष और त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास ऐसे महापुरुषों से भरा है, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में लगभग 120 स्टार्ट-अप थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। इनमें लगभग आधे स्टार्ट-अप महिलाओं द्वारा संचालित हैं। यह युवा और महिला शक्ति के नए आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है। आज का युवा केवल नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वयं रोजगार पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
विगत लगभग 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की बॉटम 05 अर्थव्यवस्थाओं से निकलकर शीर्ष 05 अर्थव्यवस्थाओं में पहुंची है। यह परिवर्तन भारत की आर्थिक क्षमता और नीति-निर्णयों में आए बदलाव का परिणाम है। अब लक्ष्य केवल बड़ी अर्थव्यवस्था बनना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में समृद्धि पहुंचाना और भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।
भारत को अपनी विरासत को विकास से जोड़ना होगा। हमारी संस्कृति, आध्यात्मिक परम्परा, तीर्थ, महापुरुष और ऐतिहासिक धरोहर केवल अतीत की वस्तुएं नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा और आर्थिक विकास के अवसर भी हैं। विरासत का संरक्षण और आधुनिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक, उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय के जीवन में राष्ट्र प्रथम की भावना होनी चाहिए। यदि राष्ट्र सुरक्षित है तो धर्म, उपासना की स्वतंत्रता, जाति, परिवार और व्यक्ति भी सुरक्षित है। इसलिए किसी भी संकीर्ण हित से ऊपर राष्ट्रहित को स्थान देना आवश्यक है। राष्ट्र की सुरक्षा और एकता केवल सेना अथवा सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के प्रत्येक नागरिक को अपने आचरण और कार्य के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत करना होगा।
उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश की युवा व महिला शक्ति, कृषि, एम0एस0एम0ई0, उद्योग, निवेश, पर्यटन, आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक शक्ति का समुचित उपयोग किया जाए तो प्रदेश देश की विकास यात्रा में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वर्ष 2047 में भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। प्रत्येक भारतीय का सपना होना चाहिए कि उस समय भारत दुनिया का विकसित, आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरवबोध रखने वाला राष्ट्र हो।
भारत का युवा दुनिया के किसी भी हिस्से में अवसर प्राप्त कर सकता है। वह विज्ञान, तकनीक, उद्योग और ज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकता है, लेकिन उसके अन्दर अपनी मातृभूमि, संस्कृति और विरासत के प्रति गौरव की भावना भी बनी रहनी चाहिए। आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों को छोड़ देना नहीं है। भारत की शक्ति आधुनिक ज्ञान और प्राचीन ज्ञान परम्परा के समन्वय में है।
प्रेरणा विमर्श जैसे मंचों का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है, क्योंकि यह समाज के सामने मौजूद प्रश्नों पर संवाद का अवसर उपलब्ध कराते हैं। समाज में स्वस्थ विमर्श होना चाहिए। युवाओं को प्रश्न पूछने, अपनी जड़ों को समझने, इतिहास को जानने और वर्तमान की चुनौतियों पर विचार करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रेरणा विमर्श-2026 के आयोजन के लिए सभी आयोजकों और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल निरंतर आगे बढ़नी चाहिए।
नारी सम्मान और युवा स्वाभिमान केवल कार्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की आवश्यकता है। नारी को सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक अवसर मिलेंगे तो परिवार मजबूत होगा। युवा को शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे तो राष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। और जब दोनों के साथ राष्ट्र प्रथम की भावना जुड़ेगी तो भारत की विकास यात्रा और अधिक तेज होगी। भारत की सनातन परम्परा ने सदैव मानवता, समरसता, कर्तव्य, सत्य, नारी सम्मान और विश्व कल्याण का मार्ग दिखाया है। इसी परम्परा से प्रेरणा लेकर आधुनिक भारत का निर्माण किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने आह्वान किया कि सभी लोग सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता, नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान, सुशासन, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र प्रथम की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएं। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ही आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार बनेगा और विकसित उत्तर प्रदेश विकसित भारत की यात्रा को नई गति देगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मंच भविष्य में भी समाज और राष्ट्र के महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री स्वान्त रंजन तथा संसद टी0वी0 के सम्पादक श्री श्याम किशोर ने भी सम्बोधित किया। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राणा प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के दौरान ‘केशव संवाद’ एवं ‘प्रेरणा विचार’ पत्रिका तथा महिलाओं एवं युवाओं की स्थिति में आए सकारात्मक परिवर्तनों पर आधारित लघु फिल्में प्रदर्शित की गयीं।
इस अवसर पर प्रेरणा विमर्श के कार्यकारी अध्यक्ष श्री बी0के0 गुप्ता, अध्यक्ष श्री अनिल त्यागी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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