मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा निष्पक्ष एवं
पारदर्शी चयन प्रक्रिया से लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के
912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किये

जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी परीक्षा से
होता, तो यह चयन प्रक्रिया केवल एक व्यक्ति और उसके परिवार के लिए
ही नहीं, बल्कि शासन और कॉमनमैन के प्रति विश्वास का भी प्रतीक बनता : मुख्यमंत्री

भर्ती प्रक्रिया में किए गए सुधारों का परिणाम कि वर्ष 2017 के बाद 9.5 लाख से
अधिक युवाओं को उ0प्र0 शासन में अपनी सेवाएं देने का अवसर प्राप्त हुआ

अगले छह माह में एक लाख नौजवानों को सरकारी
नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा

आज चयनित अभ्यर्थी बिना किसी सिफारिश और बिना किसी
लेन-देन के भर्ती प्रक्रिया से जुड़कर उ0प्र0 पुलिस बल का हिस्सा बन रहे

उ0प्र0 की छवि को एक उत्सवपूर्ण, कर्फ्यू-मुक्त और माफिया-मुक्त
प्रदेश के रूप में प्रस्तुत करने में उ0प्र0 पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका

उ0प्र0 पुलिस आज देश में एक मॉडल के रूप में चर्चा का विषय

आज देश में जहां भी चुनाव होते, वहां उ0प्र0
पी0ए0सी0 की 20 से 40 कम्पनियों तक की मांग

प्रदेश में 03 महिला पी0ए0सी0 बटालियनों का गठन किया गया, उसे 06 किया जा रहा

प्रदेश के 56 जनपदों में जहां सबसे हाईराइज
बिल्डिंग पुलिस बैरक अथवा पुलिस की आवासीय सुविधा की

पहले लगभग 6,000 पुलिसकर्मियों की एक साथ प्रशिक्षण क्षमता थी, जबकि आज
उ0प्र0 पुलिस के पास एक साथ 60,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता

महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हो गई

प्रत्येक जनपद में साइबर थाना स्थापित, प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था
 
लखनऊ : 20 सितम्बर, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किए गए सुधारों का परिणाम है कि वर्ष 2017 के बाद 9.5 लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में अपनी सेवाएं देने का अवसर प्राप्त हुआ है। आज पुलिस बल में विभिन्न संवर्गों के पदों पर 912 अभ्यर्थियों का चयन भी इसी पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है। अगले छह माह में एक लाख और नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा। गत दिवस 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया गया। आगामी 22 सितम्बर को नियुक्ति पत्र वितरण करने जा रहे हैं। हर सप्ताह एक बड़ा इवेन्ट होगा।
मुख्यमंत्री जी आज यहां उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया से लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के अन्तर्गत चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) तथा पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से विभिन्न पदों पर चयनित अभ्यर्थियों ने वीडियों क्लिप के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अपने अनुभव साझा किए किये। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस बल की विविध गतिविधियां पर आधारित एक लघु फिल्म प्रर्दशित की गई।
मुख्यमंत्री जी ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी परीक्षा से होता है, तो यह चयन प्रक्रिया केवल एक व्यक्ति और उसके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि शासन और कॉमन मैन के प्रति विश्वास का भी प्रतीक बनता है। आज 912 नियुक्ति पत्र केवल 912 व्यक्तियों को नहीं, बल्कि 912 परिवारों और सोसाइटी से जुड़े लोगों को दिये  जा रहे हैं। इन नवनियुक्त युवाओं को देखकर उनके मोहल्ले और गांव के दूसरे युवाओं में विश्वास उत्पन्न होगा कि वह भी भर्ती होकर उत्तर प्रदेश सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के युवाओं के सपनों को साकार करने और उन्हें प्रदेश शासन का हिस्सा बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग प्रदेश के विकास में दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों और अनियमितताओं को लेकर युवाओं के सामने निराशा और हताशा की स्थिति थी। उस समय भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता की कल्पना करना भी कठिन था। विज्ञापन निकलते ही युवा के मन में यह भावना पैदा होती थी कि बिना सिफारिश और लेन-देन के भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। परीक्षा की शुचिता पर प्रश्न खड़े होते थे, चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते थे तथा पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती थीं। ऐसी स्थिति भी रही कि परीक्षा कोई और देता था तथा परिणाम और नियुक्ति किसी और को प्राप्त होती थी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद सरकार ने तय किया कि भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और इसमें व्यापक सुधार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग तथा शिक्षा विभाग से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार किए गए। प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रस्तुतियों, संशोधनों और विशेषज्ञों की राय के बाद व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ की भर्ती में साक्षात्कार की व्यवस्था को समाप्त किया गया, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को प्रत्येक स्तर पर अवसर मिल सके और किसी भी स्तर पर भेदभाव की गुंजाइश न रहे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में मानव संसाधन, अधिकारियों और पदों की व्यवस्था वही है। मुख्य सचिव, डी0जी0पी0, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा गृह सचिव के पद भी वही हैं तथा अन्य सभी पद यथावत हैं। ऐसा नहीं है कि शासन चलाने के लिए बाहर से अधिकारियों को लाकर व्यवस्था में कोई बदलाव किया गया है, बल्कि उसी मानव संसाधन और उसी प्रदेश में कार्य करते हुए लोगों की दृष्टि में परिवर्तन आया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज चयनित अभ्यर्थी बिना किसी सिफारिश और बिना किसी लेन-देन के भर्ती प्रक्रिया से जुड़कर उत्तर प्रदेश पुलिस बल का हिस्सा बन रहे हैं। प्रदेश में जो परिवर्तन हुआ और लोगों की धारणा में जो बदलाव आया है, उसमें अब इन नवनियुक्त अभ्यर्थियों की भी भूमिका होगी। शासन की नवचयनित अभ्यर्थियों से अपेक्षा है कि आम आदमी से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए वह संवेदनशील रहें। यह संवेदनशीलता किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने अपेक्षा की कि नवचयनित अभ्यर्थी शासन की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विज्ञापन से लेकर भर्ती, नियुक्ति, प्रशिक्षण और अलग-अलग जनपदों में तैनाती तक किसी भी स्तर पर किसी अभ्यर्थी को सिफारिश की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए और न ही किसी के साथ भेदभाव होना चाहिए। सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम कर रही है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर नियुक्ति प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के लोगों के सामने अपनी पहचान छिपाने जैसी स्थिति थी। प्रदेश में लगातार दंगे, लम्बे समय तक कर्फ्यू तथा माफिया की चुनौती बनी रहती थी। बरेली, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर सहित अनेक स्थानों पर लम्बे समय तक दंगों की स्थिति भी रही। प्रशासन और पुलिस के सामने भी माफिया एक बड़ी चुनौती थे। लेकिन आज स्थिति में परिवर्तन आया है। अब कोई माफिया खुलेआम उपद्रव करने या कानून-व्यवस्था को चुनौती देने का दुस्साहस नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की छवि को एक उत्सवपूर्ण, कर्फ्यू-मुक्त और माफिया-मुक्त प्रदेश के रूप में प्रस्तुत करने में उत्तर प्रदेश पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तर प्रदेश के परसेप्शन को बदलने में भी उत्तर प्रदेश पुलिस का योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश उत्सव प्रदेश के रूप में बदला है। आज उत्तर प्रदेश में महाकुम्भ, कुम्भ, पर्व एवं त्योहारों की श्रृंखला, वी0आई0पी0 कार्यक्रम तथा स्थानीय स्तर पर होने वाले आयोजन सकुशल सम्पन्न होते हैं। महाकुम्भ के दौरान लगभग 66 करोड़ श्रद्धालु आए। किसी समय यह कल्पना करना कठिन था कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रदेश में आएंगे और इतने बड़े आयोजन सुचारु रूप से सम्पन्न होंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस आज देश में एक मॉडल के रूप में चर्चा का विषय बनी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले मध्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों और कस्बों में ऐसी स्थिति थी कि जिन परिवारों के पास सामर्थ्य थी, वे अपनी बेटियों को उत्तर प्रदेश से बाहर रिश्तेदारों के यहां या हॉस्टल में पढ़ाने के लिए भेजने को मजबूर होते थे। जिन परिवारों के पास सामर्थ्य नहीं थी, वे बेटियों को घर में रखने के लिए मजबूर होते थे। आज सड़क पर चल रही किसी बेटी के साथ दुर्व्यवहार करने का दुस्साहस करने वाला व्यक्ति यह जानता है कि उसके कृत्य का परिणाम क्या होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आधे से अधिक पद रिक्त थे। जिस प्रदेश में लगभग 4 लाख के पुलिस बल की आवश्यकता थी, वहां 2 लाख से भी कम पुलिसकर्मी उपलब्ध थे। भर्ती प्रक्रिया न्यायालयों में लम्बित मामलों और विभिन्न कारणों से प्रभावित थी। प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के साथ ही ऐसी कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित की कि किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति की भर्ती प्रक्रिया में घुसपैठ की गुंजाइश न रहे। पेपर लीक अथवा अवैध भर्ती के कारोबार से जुड़े लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का प्राविधान किया गया, जिसमें आजीवन कारावास तथा संपत्ति जब्त किए जाने तक की व्यवस्था शामिल है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस भर्ती की प्रक्रिया को दुरुस्त करने के साथ प्रशिक्षण क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई। पहले लगभग 6,000 पुलिसकर्मियों की एक साथ प्रशिक्षण क्षमता थी, जबकि आज उत्तर प्रदेश पुलिस के पास एक साथ 60,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता है। पहले महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10,000 से भी कम थी, जो अब बढ़कर 44,000 से अधिक हो गई है। वर्तमान में चल रहीं भर्ती प्रक्रियाओं को मिलाकर इस वर्ष के अंत तक यह संख्या 50,000 तक पहुंचने की सम्भावना है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस बल की संख्या बढ़ाने के साथ उसकी स्किलिंक पर भी ध्यान दिया गया। उत्तर प्रदेश में फॉरेन्सिक इन्स्टीट्यूट की स्थापना की गई। यह उत्तर प्रदेश और देश के बेहतरीन फॉरेन्सिक इन्स्टीट्यूट के रूप में कार्य कर रहा है। इसके लिए 110 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त कराया गया। भारत सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेन्सिक साक्ष्य की आवश्यकता होगी। इसके लिए तकनीकी रूप से ट्रेण्ड मानव संसाधन और मोबाइल फॉरेन्सिक लैब की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में व्यवस्था विकसित की गई है। आज प्रदेश के सभी पुलिस रेंज में फॉरेन्सिक लैब उपलब्ध हैं। 07 शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग केवल प्रशिक्षण और तकनीक से संभव नहीं है, बल्कि पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर सुविधाएं भी आवश्यक हैं। प्रदेश के 56 जनपदों में ऐसी व्यवस्था की गई है, जहां सबसे हाईराइज बिल्डिंग पुलिस बैरक अथवा पुलिस की आवासीय सुविधा की है। लेकिन पहले पुलिस लाइनों की स्थिति अच्छी नहीं थी। पुलिसकर्मियों को अत्यन्त खराब परिस्थितियों में रहना पड़ता था। इसी अनुभव के बाद प्रत्येक जनपद की पुलिस लाइन्स और थानों में बैरक तथा आवश्यक सुविधाओं के लिए धनराशि स्वीकृत की गई। पुलिस लाइन्स पुलिसिंग के लिए अत्यन्त आवश्यक है और इसके बिना स्मार्ट पुलिसिंग की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रत्येक जनपद में पुलिस लाइन्स विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पी0ए0सी0 की 34 कम्पनियों को पूर्व में समाप्त कर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने इन कम्पनियों को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया। आज देश में जहां भी चुनाव होते हैं, वहां उत्तर प्रदेश पी0ए0सी0 की 20 से 40 कम्पनियों तक की मांग होती है। प्रदेश में 03 महिला पी0ए0सी0 बटालियनों का गठन किया गया है। उसे 06 किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (यू0पी0एस0एस0एफ0) तथा राज्य आपदा मोचन बल (एस0डी0आर0एफ0) का गठन किया गया है। साइबर सुरक्षा आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसके दृष्टिगत प्रदेश के प्रत्येक जनपद में साइबर थाना स्थापित किया गया है। प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक दिन एक नई प्रतिस्पर्धा है। दुनिया निरन्तर बदल रही है और तकनीक नई-नई चुनौतियां लेकर आ रही है। इन चुनौतियों को समस्या मानकर नजरअन्दाज करने के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। सकारात्मक सोच, टीमवर्क और एक समान दृष्टिकोण के साथ स्वयं को प्रतिदिन नई प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना होगा। आज की युवा पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी के सपनों को उड़ान देने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वयं को तैयार करना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 9.5 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता मिली है और प्रति व्यक्ति आय भी तीन गुना हुई है। उत्तर प्रदेश अब उन राज्यों में शामिल है जो स्वयं को रेवेन्यू सरप्लस कह सकते हैं और जिनके पास नई योजनाओं को प्रारम्भ करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट नहीं है। वह देश के किसी भी हिस्से में सिर उठाकर जा सकते हैं और अपनी बात आत्मविश्वास के साथ रख सकते हैं। प्रदेश में नए निवेश और नए अवसर आ रहे हैं। इन अवसरों से जुड़ते हुए युवाओं को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग प्रदेश के विकास में करना होगा।
कार्यक्रम को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना तथा पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था श्री अमिताभ यश सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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