बलरामपुर - विश्व आत्महत्या निरोध दिवस के अवसर पर एमएलके पीजी कॉलेज, बलरामपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा आत्महत्या की रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आत्महत्या के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं पारिवारिक कारकों तथा इसकी रोकथाम के प्रभावी उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे. पी. पाण्डेय के उद्बोधन से हुई। उन्होंने आत्महत्या की बढ़ती समस्या के प्रति सामाजिक जागरूकता एवं संवेदनशीलता को आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच एवं जीवन-मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि गायत्री शक्तिपीठ से पधारे सतीश चंद्र मिश्र रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कृतिका तिवारी ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. स्वदेश भट्ट ने आत्महत्या के विभिन्न मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक कारकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को समझना, उसकी बात को संवेदनशीलता के साथ सुनना तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. सुनील कुमार शुक्ला ने आत्महत्या की रोकथाम में संस्कार, संस्कृति, पारिवारिक जुड़ाव और सामाजिक सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक जड़ों से जोड़ना, परिवार और समुदाय के साथ संवाद को मजबूत करना तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। उन्होंने बिहार में आत्महत्या की दर अपेक्षाकृत कम होने के संदर्भ में सांस्कृतिक एवं सामाजिक जुड़ाव की भूमिका पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर राजर्षि मणि त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में आत्महत्या की रोकथाम के लिए “संवाद करें, सुनें, साथ दें और जीवन को चुनें” का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की समस्या को समझने और उसकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनने की पहल कई बार उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों की भावनात्मक परेशानियों के प्रति संवेदनशील रहें तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वंदना सिंह ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अन्य शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अतिथियों, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं को आत्महत्या निरोध तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशील संवाद, सामाजिक एवं पारिवारिक सहयोग तथा जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा।
हिन्दी संवाद न्यूज से
रिपोर्टर वी. संघर्ष
बलरामपुर।
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