उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज जनपद वाराणसी में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों तथा उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल को समर्पित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (09 सितम्बर से 08 अक्टूबर, 2026) का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों की आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों ने उनके आंगनवाड़ी केन्द्रों में हो रहे नवाचार पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना की 10 वर्ष की यात्रा, आंगनवाड़ी केन्द्रों में हो रहे नवाचार तथा विभिन्न राज्यों की आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रेरक कार्यों पर आधारित वीडियो प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम में देश भर के 14 लाख आंगनवाड़ी केन्द्र वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
कार्यक्रम से पूर्व, मुख्यमंत्री जी एवं केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन, महिलाओं की गोदभराई तथा बच्चों का अन्नप्राशन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 9वें राष्ट्रीय पोषण माह को केवल एक महीने का कार्यक्रम न मानकर इसे सतत जन आन्दोलन बनाया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत, परिवार और समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाए। किसी भी देश की वास्तविक ताकत उसका युवा होता है और युवा का भविष्य उसके बचपन से तय होता है। बचपन की शुरुआत स्वस्थ माँ और स्वस्थ बच्चे से होती है। स्वस्थ माँ और स्वस्थ बच्चे से ही समर्थ, शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की नींव रखी जा सकती है। माँ के गर्भ से लेकर प्रथम 01 हजार दिवस बच्चे के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण होते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की पावन धरा पर माँ गंगा के आशीर्वाद और माता अन्नपूर्णा की कृपा से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारम्भ होना स्वयं में विशेष अवसर है। माता अन्नपूर्णा की इस धरती से पोषण का संदेश पूरे देश में जाना अत्यन्त सार्थक है। हमारे यहाँ आदर्श शासन व्यवस्था को सामान्य भाषा में रामराज्य कहा गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामराज्य की अवधारणा को ‘नहिं दरिद्र कोउ दःुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’ के माध्यम से व्यक्त किया है। अर्थात ऐसी व्यवस्था, जिसमें कोई दरिद्र, दुःखी, दीन-हीन या कमजोर न हो और प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ, समर्थ तथा समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने में सक्षम हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियाँ व सहायिकाएँ स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और संस्कारों की अग्रदूत हैं। प्रत्येक बच्चा सुपोषित व माँ स्वस्थ हो, परिवार पोषण को प्राथमिकता बनाए, आंगनवाड़ी केन्द्र समाज के सहयोग से मजबूत हो, यही प्रधानमंत्री जी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में हमारा योगदान होगा। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक राज्य या एक केन्द्र की कहानी नहीं, बल्कि देशभर में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण है। सरकार नीतियाँ और व्यवस्थाएँ तैयार करती है, लेकिन योजनाओं को परिवार तक पहुंचाने का सबसे भरोसेमंद चेहरा आंगनवाड़ी की बहनें हैं।
वर्ष 2014 से पूर्व गरीबों, कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण को शासन के एजेण्डे में जिस गम्भीरता से होना चाहिए था, वह दिखायी नहीं देता था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2014 के बाद देश की नींव को मजबूत करने की दिशा में कार्य प्रारम्भ करते हुए पोषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। प्रधानमंत्री जी ने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए जिस विजन को धरातल पर उतारा, आज वही विजन पूरे देश में लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश भी इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
पोषण पर किया गया कोई भी निवेश व्यर्थ नहीं जाता है। इसलिए प्रदेश की बाल वाटिकाओं में बच्चों को 02 ड्रेस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा प्रदेश के 01 करोड़ 60 लाख बच्चों को ड्रेस, स्वेटर, बैग, जूते-मोजे आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से माध्यमिक विद्यालयों को नये भवन मुहैया कराए जा रहे हैं। 40 वर्ष पुराने 2,100 विद्यालयों के भवनों को धनराशि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2017 के बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आंगनवाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। पहले अधिकांश केन्द्र जर्जर स्थिति में थे। साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, हॉट मील और नियमित पोषाहार की समुचित व्यवस्था नहीं थी। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार की आपूर्ति में भी गम्भीर अनियमितताएँ थीं। कई बार तीन-तीन महीने तक पोषाहार नहीं पहुँचता था। बच्चों को टाट लेकर केन्द्र जाना पड़ता था। इन अव्यवस्थाओं का खामियाजा आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को भुगतना पड़ता था। अब आंगनवाड़ी केन्द्रों को आधुनिक और मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 09 वर्षों में प्रदेश में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों को नया स्वरूप दिया गया है। प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र के निर्माण और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। एक आंगनवाड़ी केन्द्र पर प्रदेश सरकार लगभग 30 लाख रुपये खर्च कर रही है। केन्द्रीय व राज्य वित्त आयोग तथा राज्य सरकार के बजट से आंगनवाड़ी केन्द्रों के निर्माण, बाउण्ड्री वॉल, बच्चों के लिए शौचालय तथा शुद्ध पेयजल जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। मॉडल आंगनवाड़ी केन्द्रों में बाल वाटिकाएँ संचालित हो रही हैं, जहां बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने अपने निरीक्षण का उदाहरण देते हुए बताया कि एक आंगनवाड़ी केन्द्र में उन्होंने बच्चों को खेल-खेल में शरीर के अंगों और अंकों की जानकारी सीखते देखा। तीन वर्ष की बच्ची ‘एक-मेरी नाक’, ‘दो-मेरी आँख’ जैसे उदाहरणों के माध्यम से सीख रही थी। इससे स्पष्ट है कि आंगनवाड़ी केन्द्र केवल पोषण देने का स्थान नहीं, बल्कि पोषण और प्रारम्भिक शिक्षा दोनों की आधारशिला बन सकते हैं। आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण केवल दिल्ली से नहीं होगा। गाँवों और गलियों से होकर विकसित भारत की आधारशिला रखी जाएगी। आंगनवाड़ी केन्द्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय इसके प्रारम्भिक केन्द्र होंगे।
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का अर्थ है कि आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री, सहायिका, ग्राम पंचायत और ग्राम पंचायत के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने आंगनवाड़ी केन्द्र को मजबूत बनाने में योगदान दे। आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए प्रबन्धन समितियों के गठन की पहल से समाज को भी इसकी जिम्मेदारी से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस वर्ष पोषण माह के लिए पांच प्रमुख विषय आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केन्द्रों पर ताजा एवं गर्म पका हुआ भोजन, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, पोषण एवं प्रारम्भिक बाल विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं की सहायता निर्धारित किए गए हैं। बच्चों को संतुलित एवं विविधतापूर्ण भोजन मिलना चाहिए। केवल मूंग की दाल की खिचड़ी ही नहीं, बल्कि उसमें मौसमी सब्जियाँ, गाजर, पालक आदि शामिल किए जाएं। भोजन में नमक और चीनी की मात्रा भी बच्चों की आयु के अनुरूप संतुलित होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार व्यवस्था लागू की है। टेक होम राशन (टी0एच0आर0) की व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केन्द्र तक जी0पी0एस0 ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यू0आर0 कोड लगाया गया है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित हो सके। पोषण तभी सफल होगा जब बच्चा उसे खुशी से खाए। इसलिए टी0एच0आर0 में स्वाद, विविधता और नए व्यंजनों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना के अन्तर्गत गर्भवती व धात्री महिलाओं को आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। इसके अन्तर्गत प्रदेश की 05 करोड़ माताओं को 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध करायी गयी है। उत्तर प्रदेश में टी0एच0आर0 के 204 प्लाण्ट लगाए गए हैं। महिला स्वयंसेवी समूह इन कार्यों का संचालन कर रहे हैं। इस अभियान से 20 लाख से अधिक बहनें जुड़ी हैं। टी0एच0आर0 की गुणवत्ता की जाँच के लिए भारत सरकार की महत्वपूर्ण संस्था के माध्यम से क्वालिटी कण्ट्रोल की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 01 लाख 90 हजार आंगनवाड़ी केन्द्र स्वीकृत हैं। 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएँ उपलब्ध करायी जा रही हैं। प्रत्येक माह लगभग 01 करोड़ 56 लाख लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं। लगभग 35 लाख 46 हजार बच्चों को हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है। लगभग 46 लाख बच्चों की नियमित निगरानी करते हुए उनके वजन, लम्बाई और स्टण्टिंग की जाँच की जा रही है। आज आंगनवाड़ी बहनों के पास स्मार्टफोन हैं, जिनके माध्यम से वह रियल टाइम में डाटा अपलोड कर सकती हैं। इससे सेवाओं की निगरानी, लाभार्थियों की पहचान और पोषण सम्बन्धी गतिविधियों की पारदर्शी मॉनिटरिंग सम्भव हुई है।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि काशी की पावन धरती से आज हम राष्ट्रीय पोषण माह के संकल्प को सम्पूर्ण देश में आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान को राष्ट्रीय विकास के केन्द्र में रखते हुए एक सुपोषित भारत की मजबूत नींव रखने का संकल्प लिया था। प्रधानमंत्री जी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार किसी विशाल भवन के निर्माण के लिए मजबूत नींव आवश्यक होती है, उसी प्रकार विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ और सुपोषित बचपन की मजबूत नींव आवश्यक है।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि जनहित की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर कैसे लागू किया जाता है, यह मुख्यमंत्री जी ने करके दिखाया है। उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों को केवल पोषण वितरण के केन्द्र के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के समग्र केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पोषण और बाल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश में ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना को मजबूत जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में महिला पुलिस, एण्टी रोमियो स्क्वॉड, वन स्टॉप सेण्टर, महिला हेल्पलाइन और सुरक्षित शहर परियोजनाओं के माध्यम से महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा रहा है।
पोषण और महिला सुरक्षा अलग-अलग विषय नहीं हैं। जब महिलाएँ सुरक्षित होंगी, तभी वे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और अपने बच्चों के भविष्य से जुड़े निर्णयों में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। मिशन इन्द्रधनुष, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना और महिलाओं के लिए बढ़ाया गया 12 से 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने कहा कि प्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण के साथ-साथ प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बच्चों के लिए पुस्तकें, खिलौने, टी0एल0एम0, गतिविधि पुस्तिकाएँ और कहानी की पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री अनिल राजभर, स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री रवीन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, महिला कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिभा शुक्ला एवं एम0एस0एम0ई0 राज्य मंत्री श्री हंस राज विश्वकर्मा, विधान परिषद सदस्य श्री धर्मेन्द्र सिंह, विधायक डॉ0 नीलकण्ठ तिवारी, श्री सौरभ श्रीवास्तव, श्री त्रिभुवन राम, डॉ0 सुनील पटेल, वाराणसी के महापौर श्री अशोक कुमार तिवारी, सचिव केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास श्री अनिल मलिक, अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल विकास श्रीमती लीना जौहरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know