उतरौला बलरामपुर - निजी अस्पतालों में मरीजों के आर्थिक शोषण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिना आवश्यक उपकरणों और स्तरहीन चिकित्सकों के दम पर बड़ी बड़ी बीमारि यों के इलाज का दावा करने वाले सीएचसी मार्ग पर स्थितफातिमा हॉस्पिटल का अमानवीय चेहरा गुरुवार की रात्रि में उजागर हो गया। तुलसीपुर के निवासी सुरेश कुमार अपने ढाई साल के बच्चे का इलाज करा ने के लिए 23 अगस्त को लाए थे।आरोप है कि दवा इलाज व बेड चार्ज के नाम पर लग भग साठ हजार रुपये वसूल लिए गए। बच्चे की हालत नाजुकदेख कर गुरुवार की रात्रि में उसे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह देकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। सुरेश का कहना था, कि अब उसके पास पैसे नहीं हैं इसलिए अस्प ताल के प्रबन्धनअपने स्तर से किसी अन्य अस्पताल में भेजने की व्यवस्था करवा दे। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे उसके पत्नी गुड़िया व बच्चे समेत बाहर निकाल दिया। अस्पताल के बाहर बैठकर सुरेश व उसकी पत्नी लोगों से मदद करने की फरियाद कर रही थी। निजी एम्बुलेंस वाला आया तो उसने गोण्डा तक जाने के लिए बारह हजाररुपये की मांग की। पैसों के अभाव में दंपत्ति अस हाय स्थिति में उस घड़ी को कोस रहे थे जब उन्होने एक बिचौ लिए के कहने पर अपने बच्चे को यहां लाकर भर्ती कराया था। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा या गया। नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के साथ सरकारी एम्बुलेंस से उसे जिला चिकित्सालय भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बच्चे की स्थिति शुरू से गम्भीर थी, और अस्पताल में उसके उपचार की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं थी, तो उसे उसी समय रेफर क्यों नहीं किया गया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बड़े-बड़े चिकित्सकों का नाम बोर्ड पर लिखवा कर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले अस्पताल संचालित कैसे हो रहे हैं। मरीजों का आर्थिक दोहन करने के बाद उनको उसी हालत में छोड़ने वाले संचालकों पर नकेल क्यों नहीं लग पा रही है। स्वास्थ्य महकमे को आरोपित अस्पताल के द्वारा बच्चे को पांच दिनों तक दी गई दवाओं, इंजेक्शन या अन्य चिकित्सीय मामलों की सूक्ष्मता से जांच करने के साथ रेफर करने वाली परिस्थि तियों की भी गहन पड़ताल करने की जरूरत है। यदि जांच में अस्पताल की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही, नियमों का उल्लंघन, मरीज के उपचार में अनिय मितता मिलती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही भी होनी चाहिए। इस सम्बन्ध में अस्पताल के निदे शक डाक्टर साकिब का पक्ष लेने की कोशिश की गई, तो उन्होनें कुछ भी कहने से मना करते हुए फोन काट दिया। सीएचसी अधीक्षक डाक्टर चन्द प्रकाश ने बताया कि गुरुवार की देर रात्रि में उस बच्चे को सी एच सी पर लाया गया था। इमरजेंसी पर तैनात चिकित्सक ने प्रारम्भि क इलाज करके उसे जिला चिकित्सालय एम्बुलेंस के द्वारा भेज वा दिया गया। निजी अस्पताल के मनमाने रवैए की जानकारी उन्हे बच्चे के माता- पिता से मिली थी। मामले से सीएमओ को भी अवगत करा दिया गया है।
हिन्दी संवाद न्यूज से
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