उतरौला बलरामपुर-पूर्ति महकमा पात्र लोगों के राशन कार्ड जारी करने, मृतकों का नाम हटाने व नये लोगों के नाम जोड़ने में हीला हवाली कर रहे है। बिचौलियोंऔर कोटेदारों के हस्तक्षेप के बिना कोई काम नहीं होता है। स्थिति इतनी दयनीय है कि दो-दो बार आनलाईन कराने के बाद न तो पात्रों का कार्ड जारी होता है और न ही नाम को घटाने-बढ़ाने की.प्रक्रिया ही तेज हो रही है। बिचौलिएऔर कोटेदार जरूरत मंदों का आर्थिक शोषण भी पूर्ति कार्यालय के नाम पर करते हैं।नया राशन कार्ड बनवाने की रकम एक हजार रुपये, यूनिट बढ़वाने की फीस पांच सौ रुपये बिचौलियों के द्वारा तय कर रखी है। अब इसमें कितनी रकम अधिकारियों को जाती है और कितनी रकम बिचौलियों के पास रहती है। इसका जवाब सिर्फ महकमे केअधिकारी-कर्मचारी ही दे सकते हैं। पोर्टल पर लंबित पड़े नये राशन कार्डों और यूनिट बढ़वाने के आवेदन आवेदकों की शिकायतों का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। नामित सभासद कोल्हू राम बताते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी के निधन के बाद लगभग एक साल पहले उनका नाम हटाकर पुत्र वधू का नाम जोड़ने का आवेदन किया था। हर महीने पूर्ति कार्या लय का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही थी। उतरौला ग्रामीण के निवासी सेबी, सुनी ता के अलावा दर्जनों लोग पूर्ति कार्यालय का चक्कर लगाकर थक चुके हैं, हर तीन महीने बाद नया आन लाईन करवाने की सलाह दे दी जाती है लेकिन राशन कार्ड मे बच्चों का नाम नहीं बढ़ाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अगर इसी काम के लिए किसी खास कोटेदार को तय शुदा रकम दे दी जाए, तो फिर हफ्ते भर में ही काम पूरा हो जाता है। अधिकारी इसके लिए बाहरी कर्मचारियों से काम करवाने की दली ल देकर सुविधा शुल्क लेने-देने को गलत भी नहीं मानते हैं। हर महकमे मे पारदर्शी और जन हितकारी काम होने के दावों की हकीकत उच्चअधिका रियों को धरातल पर जांच करने की जरुरत है।

                 हिन्दी संवाद न्यूज से
                असगर अली की खबर
                 उतरौला बलरामपुर। 

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