मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर ’पौधरोपण महाभियान-2026’ के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद किया। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षदों आदि की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान जनान्दोलन का स्वरूप ले चुका है। 05 जून, 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर भी 05 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 247 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई को ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियाँ पूरी की जा सकें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन स्थापित किए जाएं। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भण्डारा, आम भण्डारा भी हो। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएं। इसके अलावा, 15 अगस्त को वन्दे मातरम् वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबन्धन पर भाई-बहन पौधरोपण व 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गरीबों व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपलब्ध कराया जाए। यह पौधा कुपोषण से बचाव में काफी कारगर साबित होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से संवाद बनाकर उन्हें भी पौधरोपण जन अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवरों, नदियों के किनारे, खाली जमीन, हाइवे-एक्सप्रेस-वे के किनारे, मण्डी समितियों में आवश्यकतानुसार फलदार-छायादार पौधे रोपित किए जाएं। गंगा जी, यमुना जी समेत अन्य नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सघन पौधरोपण किया जाए। पौधे लगवाने के साथ इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ट्री गार्ड आदि लगाकर इनकी सुरक्षा भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 09 वर्ष पहले जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान प्रारम्भ किया गया था, तब वन एवं उद्यान विभाग की नर्सरियों में 05 करोड़ पौधे भी उपलब्ध नहीं थे। आज स्थिति यह है कि दोनों विभागों के पास 57 करोड़ से अधिक पौधों का भण्डार है। इनमें फलदार, औषधीय, इमारती तथा सजावटी प्रजातियों सहित सभी प्रकार के पौधे शामिल हैं और प्रत्येक जनपद में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय दायित्व है। ग्लोबल वॉर्मिंग, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है और उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के 72 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि सभी जनप्रतिनिधि पूरी सक्रियता से इस अभियान से जुड़ेंगे तो वृक्षारोपण का लक्ष्य सहजता से प्राप्त किया जा सकेगा और यह अभियान जन-आन्दोलन का स्वरूप ग्रहण करेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण और संवर्धन की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई, सुरक्षा एवं देख-रेख की व्यवस्था करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सुरक्षित पौधा ही भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आम, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, हरड़ सहित पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नुक्कड़ नाटक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए, जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वाभाविक जागरूकता और उत्साह का वातावरण बने।
मुख्यमंत्री जी ने प्रत्येक वृक्षारोपण कार्यक्रम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कर वन विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए। इससे अभियान की पारदर्शी मॉनीटरिंग के साथ-साथ प्रदेश के उत्कृष्ट आयोजनों को डिजिटल, सोशल, प्रिण्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आयोजन स्थल पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का बैनर लगाया जाए, ताकि जनसहभागिता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुँचे। वृक्षारोपण कार्यक्रमों को एक प्रेरक जनअभियान के रूप में प्रस्तुत किया जाए, जिससे अधिकाधिक नागरिक स्वयं इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक डॉ0 जगदीश चन्द्र बसु ने सिद्ध किया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन और संवेदनाएँ होती हैं। इसलिए वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि प्रकृति और धरती माता के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त वर्षा हो चुकी है और यह वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे में सभी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस अभियान को सफल बनाएं। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक इकाई के साथ समन्वय स्थापित कर समय पर पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने विश्वास व्यक्त किया कि 12 जुलाई को आयोजित होने वाला ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृहद वृक्षारोपण महाभियान जनसहभागिता का नया कीर्तिमान स्थापित करेगा और उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक बार फिर मिसाल बनेगा।
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