वृक्षारोपण महायज्ञ 2026 - “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान दृ हरित भविष्य की ओर एक सशक्त कदम
लखनऊ: 30 जून, 2026
प्रकृति मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, उपजाऊ भूमि और संतुलित जलवायु हमें प्रकृति से ही प्राप्त होती है। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और वनों की कटाई जैसी चुनौतियों ने पर्यावरण संरक्षण को अत्यंत आवश्यक बना दिया है। ऐसे समय में वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने का माध्यम बन गया है। इसी उद्देश्य को लेकर उत्तर प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा 76वें वन महोत्सव के अवसर पर “वृक्षारोपण महायज्ञ 2026 दृ एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत इस वर्ष 35 करोड़ पौधें 5.25 लाख चिन्हित स्थलों पर रोपित किये जा रहे है। 1900 से अधिक पौधशालाओं में विकसित किये गये कुल 52.44 करोड़ पौधे मौजूद है। यह अभियान केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लिया गया है।

अभियान का उद्देश्य
“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का मूल उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के प्रति जागरूक करना और उन्हें प्रकृति संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। माँ जीवन का प्रथम आधार होती है। जिस प्रकार माँ हमें स्नेह, सुरक्षा और जीवन प्रदान करती है, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन को संरक्षण और पोषण प्रदान करते हैं। इस भावनात्मक संदेश के माध्यम से लोगों को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभियान का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करना है। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने लगाए गए पौधे को अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी वृक्षारोपण अभियान वास्तविक सफलता प्राप्त कर सकेगा।

वन महोत्सव और वृक्षारोपण का महत्व
भारत में वन महोत्सव की शुरुआत लोगों को वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से की गई थी। वन महोत्सव के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वृक्ष हमारे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। इसके अतिरिक्त वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, भूजल स्तर को बनाए रखते हैं और जैव विविधता के संरक्षण में सहायक होते हैं। आज विश्व जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएँ
पर्यावरणीय असंतुलन के परिणाम हैं। ऐसे में वृक्षारोपण इन चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी और सरल उपाय माना जाता है।

प्रदूषण नियंत्रण में वृक्ष के महत्व पर जन जागरूकता
वृक्ष वायुमण्डल से हानिकारक गैसों को हटाकर, ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित कर, ग्रीन हाउस के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ वायु की गुणवत्ता में सुधार करता है। पर्यावरण शुद्ध करने, धूल व तापमान नियंत्रण व ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में वृक्ष प्रजातियों पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर, नीम, आम, जामुन, महुआ, इमली, अमलतास, अशोक, सहजन आदि सहायक हैं। आज पूरा विश्व इस बात से अवगत है कि किसी स्थान पर वृक्षावरण बढ़ाकर वहाँ की मृदा व भू-जल स्तर में सुधार, आक्सीजन की प्रचुरता द्वारा वायु की शुद्धता आदि से उस स्थान के माईक्रो क्लाइमेट में सुधार हो जाता है।
आक्सीजन टैंकः- एक वृक्ष प्रतिवर्ष औसतन 260 पाउण्ड अथवा 82,420 लीटर आक्सीजन का उत्पादन करता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 550 लीटर आक्सीजन की आवश्यकता रहती है। वृक्षारोपण जन आन्दोलन 2026 में प्रदेश में 35 करोड़ पौधा रोपण से भविष्य में स्थापित होने वाले वृक्ष लगभग 14.36 करोड़ नागरिकों की आक्सीजन आवश्यकता के लिये पर्याप्त है।
कार्बन सिंकः- वृक्ष कार्बन डाईआक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण शुद्ध करता है। वनावरण एवं वृक्षावरण कार्बन सिंक का कार्य करते हैं। एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष 13 पाउण्ड कार्बन अवशोषित करता है। वर्षाकाल 2026 में प्रदेश में 35 करोड पौधा रोपण से स्थापित होने वाले वृक्षों द्वारा वर्ष 2030 तक लगभग 18.55 मिलियन टन कार्बन का अवशोषण होगा।
वृक्षों द्वारा प्राप्त जीवनदायनी आक्सीजन के लिये हम सदैव ऋणी रहेंगे। यह आवश्यक है कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, सहित सभी प्रजातियों के पौधों का रोपण तथा वृक्ष के रूप में स्थापित होने तक उनका संरक्षण कर ऋण मुक्त हों। साथ ही, कार्बन अवशोषण में वृक्षों की भूमिका का जन मानस में प्रचार-प्रसार किया जाय। आज यह आवश्यक है कि मारल एथिक्स के साथ-साथ पर्यावरण नैतिकता (म्दअपतवदउमदजंस म्जीपबे) की भावना को जागृत कर आक्सीजन टैंक तथा कार्बन सिंक में वृक्षों के महत्व पर सभी को शिक्षित किया जाय।
हरित सारथी अभियान जन-जागरूकता का अभिनव प्रयास
“वृक्षारोपण महायज्ञ 2026” के अंतर्गत डिजिटल जन-जागरूकता कार्यक्रम “हरित सारथी अभियान” प्रारंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के मिशन से जोड़ना है। अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के 75 जिलों से 76 हरित सारथियों का चयन किया जाएगा। ये चयनित हरित सारथी 1 जुलाई से 7 जुलाई तक अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जन-जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे। वे स्थानीय समुदायों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को जोड़कर वृक्षारोपण को जन आंदोलन का स्वरूप देंगे। हरित सारथी केवल वृक्ष लगाने का कार्य नहीं करेंगे, बल्कि लोगों को पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान के प्रति भी जागरूक करेंगे। इस प्रकार वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनेंगे। किसी भी सामाजिक परिवर्तन में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए अभियान के अंतर्गत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लिए “स्कूल ऑफ हरित सारथी सम्मान” कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षण संस्थानों को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यार्थी पौधारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण कार्यक्रम और पर्यावरण जागरूकता रैलियों में भाग लेकर प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझेंगे। जब बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी, तब भविष्य में वे जिम्मेदार नागरिक बनकर प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कर सकेंगे। डिजिटल युग में सोशल मीडिया जन-जागरूकता का सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष सहभागिता अभियान शुरू किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भूमिका
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करें, तो देश में हरित क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो सकता है। अपने घर, विद्यालय, कार्यालय, खेल और सार्वजनिक स्थानों पर पौधें लगाकर पर्यावरण सरंक्षण में योगदान दे सकते है। इसके साथ ही जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, ऊर्जा की बचत और स्वच्छता जैसे प्रयास भी पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ‘‘वृक्षारोपण महायज्ञ 2026-एक पेड़ माँ के नाम’’ केवल एक पर्यावरण अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक प्रयास है। यह पहल समाज के प्रत्येक वर्ग को एक साझा उद्देश्य से जोड़ती है।

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