बलरामपुर -जनपद के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है,जिसमें अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी से एरियर भुगतान के नाम पर अवैध धन-वसूली किए जाने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सफाई कर्मी सनी कुमार से संबंधित लिपिक सौरभ दुबे द्वारा ₹20,000 (बीस हजार रुपये) की अवैध मांग किए जाने का वीडियो सार्वजनिक हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक द्वारा लिपिक को निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।
हालांकि, विभागीय जांच पूर्ण किए बिना ही निलंबन आदेश पारित किए जाने के कारण माननीय न्यायालय द्वारा लिपिक को बहाल करते हुए नियमानुसार जांच कराए जाने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद स्वास्थ्य अपर निदेशक एवं उपनिदेशक, देवीपाटन मंडल (गोण्डा) द्वारा आज तक कोई प्रभावी एवं ठोस जांच नहीं कराई गई,जिससे विभागीय उदासीनता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।
यह गंभीर मामला माननीय सांसद गोण्डा एवं निगरानी समिति बलरामपुर के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह जी की अध्यक्षता में आयोजित निगरानी समिति की बैठक में भी उठाया गया था। बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि माननीय न्यायालय द्वारा संबंधित लिपिक को उसी स्थान पर तैनात रखने का कोई आदेश नहीं है,अतः उसका स्थानांतरण किया जाना चाहिए। इसके बावजूद केवल औपचारिक प्रशासनिक स्थानांतरण कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
प्रकरण यहीं समाप्त नहीं होता। कई महीनों तक संबंधित लिपिक को चार्ज नहीं दिया गया और अत्यधिक पत्राचार के बाद जब चार्ज दिया गया,तब भी जानबूझकर सनी कुमार एवं विजय प्रताप सिंह की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) नहीं सौंपी गई। यह कृत्य न केवल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है,बल्कि दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी आता है।
इस मामले को लेकर जनपद के सभी माननीय विधायकगण,जिला अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा निदेशक स्वास्थ्य को जांच कराने हेतु कई पत्र भेजे गए,जिनकी प्राप्ति की पुष्टि स्वयं निदेशक स्वास्थ्य द्वारा की जा चुकी है। बावजूद इसके,आज तक कोई ठोस कार्रवाई न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे संबंधित लिपिक का मनोबल बढ़ा हुआ है और उसकी दबंगई लगातार बढ़ती जा रही है।
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी डी.पी.सिंह बैस ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में अवैध धन-वसूली की प्रवृत्ति व्यापक रूप से फैली हुई है,जिसके चलते विभागीय स्तर पर जानबूझकर कठोर कार्रवाई से बचा जा रहा है।
उन्होंने मांग की है कि सेवा पुस्तिका जानबूझकर न दिए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए,पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित लिपिक एवं उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने माननीय सांसद एवं निगरानी समिति अध्यक्ष से प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।
हिन्दी संवाद न्यूज से
रिपोर्टर वी. संघर्ष
बलरामपुर।
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