जलालपुर | अंबेडकर नगर, अवैध वसूली, धमकी और जन उपेक्षा के आरोपों से पंचायत व्यवस्था कटघरे में।।
जनपद अंबेडकर नगर की जलालपुर तहसील में तैनात ग्राम पंचायत सचिव कमिता यादव पर लगे गंभीर आरोपों ने पंचायत व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और शासन की जमीनी हकीकत पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। किसानों, विद्यार्थियों और आम ग्रामीणों को जानबूझकर दौड़ाने, फोन न उठाने, धमकी देने और अवैध धन उगाही जैसे आरोप अब औपचारिक रूप से जिलाधिकारी अंबेडकर नगर तक पहुंच चुके हैं।
इस पूरे प्रकरण को लेकर क्षेत्र में तीव्र जन आक्रोश व्याप्त है। शिकायतकर्ता सनउवर खान द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए लिखित प्रार्थना पत्र में उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। यह प्रकरण ग्राम सभा गौसपुरककरहिया (करौंदी) का बताया जा रहा है।
❗ “पैसा दो, तभी होगा काम” — पंचायत व्यवस्था पर सीधा आरोप
शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह कोई व्यक्तिगत या अपवादस्वरूप मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में सर्वविदित तथ्य है कि ग्राम पंचायत सचिव द्वारा—
- किसानों और विद्यार्थियों को वैध एवं छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी
दिनों और हफ्तों तक दौड़ाया जाता है, - प्रमाण पत्र, अभिलेख एवं पंचायत से जुड़े आवश्यक कार्य
जानबूझकर लंबित रखे जाते हैं, - जब तक कथित रूप से अवैध धन की मांग पूरी नहीं होती,
तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती।
ग्रामीणों का आरोप है कि मजबूरी में कई लोग पैसे देकर काम करवाते हैं, जबकि जो लोग पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
📵 फोन न उठाना, बैक कॉल नहीं, ऊपर से धमकी
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत सचिव आम जनता, जनप्रतिनिधियों और यहां तक कि पत्रकारों के फोन तक नहीं उठातीं। पूछताछ या शिकायत करने पर कथित तौर पर धमकी भरी और अहंकारपूर्ण भाषा का प्रयोग किया जाता है।
शिकायत के अनुसार सचिव द्वारा कहा जाता है—
“मुझे सरकार ने फोन नहीं दिया है।
मैं किसी का फोन उठाने के लिए बाध्य नहीं हूं।
मेरा मन होगा तो उठाऊंगी, नहीं होगा तो नहीं उठाऊंगी।
जिसे जहां शिकायत करनी हो कर दीजिए,
मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है,
नौकरी से निकालना इतना आसान नहीं है।”
इन कथनों ने न केवल ग्रामीणों को आहत किया है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली और लोक सेवक की गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
⚠️ “पूरे क्षेत्र में त्राहि-त्राहि” — जन आक्रोश चरम पर
ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवहार से पूरा क्षेत्र त्रस्त हो चुका है।
- किसान समय पर दस्तावेज न मिलने से परेशान हैं,
- विद्यार्थी प्रमाण पत्रों के लिए भटक रहे हैं,
- आम जनता पंचायत कार्यालय के चक्कर काट-काटकर हताश हो चुकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो पंचायत स्तर पर सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी और शासन-प्रशासन पर जनता का भरोसा और कमजोर होगा।
🏛️ डीएम से सख्त कार्रवाई की मांग
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि—
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
- यदि अवैध धन उगाही और धमकी के आरोप सही पाए जाएं तो
तत्काल निलंबन सहित कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए, - तथा शिकायतकर्ताओं और गवाहों को किसी भी प्रकार के प्रतिशोध से
प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
❓ अब सवाल प्रशासन से
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या ग्राम पंचायत सचिव स्वयं को कानून और शासन से ऊपर मानने लगी हैं?
- और क्या जिला प्रशासन इस मामले में त्वरित व सख्त कदम उठाकर
पंचायत व्यवस्था में जनता का टूटता विश्वास बहाल कर पाएगा?
फिलहाल यह मामला पूरे जलालपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
हिंदी- संवाद- न्यूज़, दिल से हिंदी।।
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