मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ : 29 जनवरी, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-

अमृत-2.0 योजना के अन्तर्गत नगर निगम, गोरखपुर में सीवरेज योजना जोन-ए-3 से सम्बन्धित परियोजना तथा व्यय-वित्त समिति द्वारा
अनुमोदित लागत 72140.41 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने अटल नवीकरण और शहरी रूपान्तरण मिशन-2.0 (अमृत-2.0) योजना के अन्तर्गत जनपद गोरखपुर के नगर निगम, गोरखपुर में सीवरेज योजना जोन-ए-3 से सम्बन्धित परियोजना तथा व्यय-वित्त समिति द्वारा उसकी अनुमोदित लागत 72140.41 लाख रुपये (जी0एस0टी0 एवं सेंटेज सहित) का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित किया है।
सम्बन्धित परियोजना की व्यय-वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 72140.41 लाख रुपये (जी0एस0टी0 एवं सेंटेज सहित) में 2728.63 लाख रुपये सेंटेज सम्मिलित है। निर्धारित लागत में भारत सरकार का 23134.94 लाख रुपये, राज्य सरकार का 43500.36 लाख रुपये तथा निकाय का अंश 2776.48 लाख रुपये सम्मिलित है। यह भी उल्लेखनीय है कि सेंटेज की समस्त धनराशि का वहन राज्य सरकार द्वारा ही किया जायेगा।
इस परियोजना के क्रियान्वयन के उपरान्त नगर निगम, गोरखपुर के 17 वॉर्डों में जनित सीवेज को शोधित करते हुये 43,604 नग गृह संयोजन के माध्यम से लगभग 1,95,947 जनसंख्या को लाभान्वित किया जायेगा।
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अमृत-2.0 योजना के अन्तर्गत नगर निगम, वाराणसी में दुर्गाकुण्ड, नरिया सरायनंदन, जोल्हा उत्तरी एवं भेलूपुर वॉर्ड में सीवर लाइन बिछाने एवं गृह संयोजन कार्य सम्बन्धी परियोजना की लागत 26649.44 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित

 मंत्रिपरिषद ने अटल नवीकरण और शहरी रूपान्तरण मिशन-2.0 (अमृत-2.0) योजना के अन्तर्गत जनपद वाराणसी के नगर निगम, वाराणसी में दुर्गाकुण्ड, नरिया सरायनंदन, जोल्हा उत्तरी एवं भेलूपुर वॉर्ड में सीवर लाइन बिछाने एवं गृह संयोजन कार्य से सम्बन्धित परियोजना की व्यय-वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 26649.44 लाख रुपये (जी0एस0टी0 एवं सेंटेज सहित) का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित किया है।
विषयगत परियोजना की अनुमोदित लागत में से भारत सरकार का 6393.71 लाख रुपये, राज्य सरकार का 17135.17 लाख रुपये तथा निकाय का अंश 2045.99 लाख रुपये सम्मिलित है। अनुमोदित लागत में 1074.57 लाख रुपये सेंटेज का व्यय भार राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जायेगा।
इस परियोजना के क्रियान्वयन के उपरान्त नगर निगम, वाराणसी वॉर्ड संख्या-25 दुर्गाकुण्ड, वॉर्ड संख्या-54 नरिया, वॉर्ड संख्या-45 जोल्हापुर उत्तरी एवं वॉर्ड संख्या-51 भेलूपुर की शत-प्रतिशत जनसंख्या सीवरेज व्यवस्था से लाभान्वित होगी।
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‘उ0प्र0 शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ को लागू कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। नीति के प्राविधान मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त शासनादेश निर्गत किये जाने की तिथि से प्रभावी होंगे। नीति को लागू किये जाने से राज्य सरकार पर कोई व्यय भार नहीं आयेगा। इस नीति में भविष्य में किसी प्रकार के संशोधन/परिवर्धन एवं नीति के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के सम्बन्ध में मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।  
प्रदेश के नगरीय इलाकों में ऐसे क्षेत्र/भवन, जो कभी पूर्व में विकसित/निर्मित किये गये थे, परन्तु समय के साथ जीर्ण-शीर्ण संरचनात्मक अवस्था अथवा भूमि के ‘सब-ऑप्टिमल’ उपयोग अथवा पर्यावरणीय हृस के कारण वर्तमान में अप्रयुक्त अथवा निष्प्रयोज्य हो गये हैं, अथवा ‘अण्डरयूटिलाईज्ड’ पड़े हैं, की भौतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय दशाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से यह नीति प्रस्तावित की गयी है।
‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू हो जाने से वृहद विकास ‘पोटेन्शियल’ होने के बावजूद ‘अण्डरयूटिलाईज्ड’ आवासीय सम्पत्तियाँ जो शहरों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं, का पुनर्विकास किया जा सकेगा, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस नीति के लागू किये जाने से नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा गुणवत्तापूर्ण आवासीय परिसरों की उपलब्धता हो सकेगी। नगरीय क्षेत्रों में रियल एस्टेट क्षेत्र में निर्माण गतिविधियाँ बढ़ सकेंगी, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी।
पुनर्विकास योजना के अनुश्रवण तथा विभिन्न विभागों/संस्थाओं के मध्य समन्वय हेतु आवास बन्धु, उत्तर प्रदेश, राज्य स्तर पर नोडल एजेंसी होगी। नीति से सम्बन्धित विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिये प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर अन्तर्विभागीय समिति गठित की जायेगी।
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शहरी क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिये वित्तपोषण के रूप में विकास शुल्क की संशोधित प्रणाली लागू करने तथा उ0प्र0 नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 (यथा संशोधित 2021) में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिये वित्तपोषण के रूप में विकास शुल्क की संशोधित प्रणाली लागू किये जाने तथा उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 (यथा संशोधित 2021) में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
विकास शुल्क की संशोधित प्रणाली लागू किये जाने तथा उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 (यथा संशोधित 2021) में संशोधन होने से अवस्थापना सुविधाओं यथा महायोजना मार्ग, खुले स्थल, एस0टी0पी0 व अन्य जनसुविधाओं के विकास के लिये विकास प्राधिकरणों को विकास शुल्क के रूप में वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। नगरीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण नागरिक/अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिये संसाधनों की सुलभता बढ़ेगी। शहरी क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि सम्भावित है।
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बरेली में विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला का निर्माण किये जाने हेतु बरेली विकास प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद बरेली में बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा रामगंगा नगर आवासीय योजना, सेक्टर-8 में चिन्हित 5.33 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित मैराइन पार्क, स्पेस पार्क तथा ए0आई0 पार्क के साथ इसी चिन्हित भूमि में से 3,000 वर्गमीटर की भूमि पर विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला का निर्माण किये जाने हेतु बरेली विकास प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रकरण के सम्बन्ध में किसी भी कठिनाई के निवारण हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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मुरादाबाद में विज्ञान पार्क व नक्षत्रशाला के निर्माण हेतु मुरादाबाद विकास प्राधिकरण कार्यदायी संस्था नामित

मंत्रिपरिषद ने जनपद मुरादाबाद में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-बरेली मार्ग पर विकसित की जाने वाली गोविन्दपुरम् आवासीय योजना के अन्तर्गत 4.6 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित सेण्ट्रल पार्क में विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला का निर्माण किये जाने हेतु मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। प्रकरण के सम्बन्ध में भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी कठिनाई के निवारण हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लि0 मोरना, मुजफ्फरनगर की पेराई क्षमता विस्तार, तकनीकी अपग्रेडेशन एवं आधुनिकीकरण करते हुये नयी चीनी मिल की स्थापना का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लि0 मोरना, जनपद मुजफ्फरनगर की पेराई क्षमता विस्तार, तकनीकी अपग्रेडेशन एवं आधुनिकीकरण करते हुये नयी चीनी मिल की स्थापना किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल लि0, लखनऊ की अधीनस्थ दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना की पेराई क्षमता 2,500 टी0सी0डी0 से बढ़ाकर 3,500 टी0सी0डी0 (प्रथम चरण में 3,500 टी0सी0डी0 तत्पश्चात विस्तारित क्षमता 5,000 टी0सी0डी0) करते हुए नई चीनी मिल की स्थापना की जाएगी।
ज्ञातव्य है कि यह चीनी मिल वर्ष 1984-85 में 1,250 टी0सी0डी0 क्षमता पर स्थापित की गयी थी। वर्ष 1995-96 में मिल का 2,500 टी0सी0डी0 क्षमता पर विस्तारीकरण कराया गया था। यह चीनी मिल गन्ना बाहुल्य क्षेत्र में स्थित है। मिल की क्षमता कम होने के कारण गन्ने की पूर्ण पेराई नहीं हो पा रही। प्लाण्ट, मशीनरी व तकनीक पुरानी होने के कारण चीनी उत्पादन की लागत भी अधिक आती है। उपलब्ध गन्ने की पूर्ण पेराई सुनिश्चित करने के लिए कार्य क्षमता में सुधार हेतु तकनीकी अपग्रेडेशन एवं आधुनिकीकरण आवश्यक हो गया है।
दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना को आधुनिक मशीनरी के साथ स्थापित किये जाने से क्षेत्र के गन्ना किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने, आय दोगुनी किये जाने एवं समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने में सहायता प्राप्त होगी। नई तकनीक पर आधारित प्रस्तावित चीनी मिल के संचालन से लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन में भी उपयोगी होगी।
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जनपद लखनऊ-हरदोई में प्रस्तावित पी0एम0 मित्र टेक्सटाइल पार्क हेतु जलापूर्ति प्रायोजना की लागत 45850.11 लाख रु0 का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ-हरदोई में प्रस्तावित पी0एम0 मित्र टेक्सटाइल पार्क हेतु जलापूर्ति प्रायोजना की लागत 45850.11 लाख रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
निर्णय के अनुसार प्रस्तावित पी0एम0 मित्र टेक्सटाइल पार्क में जलापूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) द्वारा 16 एम0एल0डी0 टी0टी0पी0 के निर्माण, स्वच्छ जलापूर्ति (गोमती नदी से) के लिये 8.25 एम0एल0डी0 इन्टेकवेल एवं राइजिंग मेन तथा स्वच्छ जलापूर्ति (भू-गर्भ जल से) के लिये 4.50 एम0एल0डी0 ट्यूबवेल, पम्प हाउस एवं राइजिंग मेन से सम्बन्धित कार्यां को फेजवाइज़ आवश्यकतानुसार किया जाना है।
औद्योगिक जलापूर्ति के लिए 39 एम0एल0डी0 एस0टी0पी0 दौलतगंज के आउटलेट से प्राप्त शोधित जल को 16 एम0एल0डी0 टर्शियरी ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट (टी0टी0पी0) के माध्यम से पुनः शोधन करके प्रयोग करने से सम्बन्धित कार्य किये जाएंगे। इसके अलावा, स्वच्छ जलापूर्ति के लिए गोमती नदी के जल के साथ-साथ भू-गर्भ जल का प्रयोग करने सम्बन्धी कार्य किये जाएंगे।
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जनपद वाराणसी/चन्दौली में मोहनसराय उपाध्याय नगर चकिया मार्ग के 11.235 कि0मी0 लम्बाई में 04/06 लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की पुनरीक्षित लागत 32593.08 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद वाराणसी/चन्दौली में मोहनसराय उपाध्याय नगर चकिया मार्ग (राज्य मार्ग सं0-120) के चैनेज 21.000 से चैनेज 32.235 तक 04/06 लेन में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण (लम्बाई 11.235 कि0मी0) कार्य की सम्पूर्ण परियोजना की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित पुनरीक्षित लागत 32593.08 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि यह मार्ग एन0एच0-2 (वर्तमान में एन0एच0-19) से निकलकर पड़ाव चौराहे से प्रारम्भ होकर पं0 दीनदयाल उपाध्याय नगर होते हुए, गोधना मोड़ एन0एच0-2 तक जाता है। यह मार्ग जनपद वाराणसी को जनपद सोनभद्र, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, प्रयागराज के साथ-साथ बिहार एवं पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है।
मार्ग के कि0मी0-26 में स्थित चन्दासी कोयला मण्डी एवं ट्रकों की बॉडी बनाने की वर्कशॉप एवं कि0मी0-30 में पं0 दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन स्थित है। मार्ग पर यातायात घनत्व अधिक होने के कारण प्रायः जाम की समस्या बनी रहती है। प्रश्नगत मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से यातायात सुगम एवं क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा।
परियोजना के अन्तर्गत आई0आर0सी0 के निर्धारित मानकों से इतर निर्माण कार्य-सी0एन0सी0 रेलिंग, विक्टोरियन इलेक्ट्रिक पोल एन्ट्रेन्स गेट, फुटओवर ब्रिज एवं हेरिटेज स्तम्भ आदि कार्य भी सम्मिलित हैं।
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जनपद देवरिया में देवरिया कसया मार्ग का 31.500 कि0मी0 लम्बाई में 4-लेन चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण तथा 05 वर्षीय अनुरक्षण की लागत 29206.66 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद देवरिया में देवरिया कसया मार्ग (राज्य मार्ग संख्या-79) के चैनेज 1.600 से चैनेज 33.100 तक (लम्बाई 31.500 कि0मी0) 4-लेन में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना तथा कार्य की 05 वर्षीय अनुरक्षण सहित व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 29206.66 लाख रुपये (दो अरब बानवे करोड़ छः लाख छाछठ हजार रुपये) के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
इस मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से देश-प्रदेश व विदेशों के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को देवरिया शहर एवं भगवान बुद्ध की महा-परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर, कुशीनगर अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा व नेपाल राष्ट्र आदि आने-जाने में सुगम यातायात की सुविधा प्राप्त होगी एवं जनपद तथा क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा।
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उप निबन्धक कार्यालय में वर्ष 2002 से 2017 तक के पंजीकृत लेखपत्रों की स्कैनिंग एवं इण्डेक्सिंग की प्रथम चरण की परियोजना की अवधि 06 माह तक विस्तारित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उप निबन्धक कार्यालयों में पंजीकृत विलेखों के डिजिटाइजेशन सम्बन्धी समस्त अवशेष कार्य को सम्पन्न कराने के निर्देश के साथ उप निबन्धक कार्यालय में वर्ष 2002 से 2017 तक के पंजीकृत लेखपत्रों की स्कैनिंग एवं इण्डेक्सिंग की प्रथम चरण की परियोजना की अवधि 06 माह तक विस्तारित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में मंत्रिपरिषद द्वारा दिनांक 27 सितम्बर, 2022 को विभाग के अधीन निबन्धन कार्यालयों में संरक्षित विलेखों की स्कैनिंग एवं डिजिटाइज़ेशन हेतु 95 करोड़ रुपये लागत की कार्ययोजना को अनुमोदित किया गया था, जिसके क्रम में शासनादेश संख्या-1270/94-1-2022-312(101)/2016 टी0सी0 दिनांक 30 सितम्बर, 2022 द्वारा प्रथम चरण की योजना के क्रियान्वयन हेतु 01 वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गयी थी।
प्रथम चरण की उक्त योजना में विविध व्यावहारिक कारणों से हुए विलम्ब के आधार पर योजना की अवधि के विस्तार के विभागीय प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद द्वारा दिनांक 25 जुलाई, 2024 को अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके क्रम में शासनादेश संख्या-13/1156/94-1-2024-312(101)/2016 टी0सी0 दिनांक 29 जुलाई, 2024 द्वारा योजना की अवधि को एक वर्ष का विस्तार प्रदान किया गया तथा पूर्व में स्वीकृत योजना की लागत 95 करोड़ रुपये में अतिरिक्त 28.62 करोड़ रुपये की वृद्धि करते हुए अर्थात कुल व्यय लागत 123.62 करोड़ रुपये पर स्वीकृति प्रदान की गयी।
उक्त प्रथम चरण की योजना में वर्ष 2002 से 2017 की अवधि में निबन्धन कार्यालयों में पंजीकृत एवं संरक्षित विलेखों की स्कैनिंग एवं डिजिटाइज़ेशन का कार्य किया जाना था। उनमें से सम्प्रति इण्डेक्सिंग का कार्य 99.11 प्रतिशत एवं स्कैनिंग कार्य 98.37 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। इसी प्रकार प्रदेश के सभी जनपदों में उक्त योजना क्रियान्वित की गयी, जिनमें से अधिकांश जनपदों में कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। स्कैनिंग एवं डिजिटाइजेशन कार्य में प्रत्येक प्रविष्टि की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग के आन्तरिक तकनीकी परीक्षण प्रकोष्ठ के सहायक महानिरीक्षक निबन्धनगण को सत्यापन करने का कार्य दिया गया है। इस सत्यापन का भी पुनः परीक्षण करने का उत्तरदायित्व प्रदेश के सम्बन्धित मण्डलों/वृत्तो के उप महानिरीक्षक निबंधनगण को सौंपा गया है। यह प्रक्रिया परियोजना के प्रथम चरण के सम्पन्न होने के पश्चात् भी शत-प्रतिशत सत्यापन होने तक गतिमान रहेगी।
जनपद एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर एवं प्रयागराज में संरक्षित विलेखों की स्कैनिंग एवं डिजिटाइजेशन के कार्य अवशेष हैं। अवशेष कार्यों को 06 माह की समयावधि में पूर्ण किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि स्कैनिंग एवं इण्डेक्सिंग का कार्य एक अति महत्वपूर्ण प्रकृति का कार्य है, जिसके माध्यम से भविष्य में legacy records (कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था लागू होने से पूर्व के हैं) में कूटरचना को रोका जा सकेगा। इसलिए अभिलेखों की स्कैनिंग एवं इण्डेक्सिंग कार्य को पूर्ण किया जाना अति आवश्यक है। परियोजना की लागत को सीमित रखने एवं कार्य की गुणवत्ता को बनाये रखने हेतु विभाग द्वारा स्वयं ही इस कार्य को सम्पन्न कराने का उद्देश्य रखा गया था। विगत अवधि में विभागीय अधिकारियों एवं कार्मिकों के विशेष प्रयासों से परियोजना अब लगभग पूर्ण होने को है।
परियोजना के अवशेष कार्य को सम्पन्न कराने हेतु अवधि के विस्तार में परियोजना की स्वीकृत धनराशि 123.62 करोड़ रुपये में किसी प्रकार के पुनरीक्षण/विस्तारीकरण की आवश्यकता नहीं है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति तक अद्यतन व्यय 109.05 करोड़ रुपये है। संचित कुल अवशेष धनराशि के अन्तर्गत ही अवशेष कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा।
उपरोक्तानुसार समस्त अवशेष कार्य को सम्पन्न कराए जाने के निर्देश के साथ उप निबन्धक कार्यालय में वर्ष 2002 से 2017 तक के पंजीकृत लेखपत्रों की स्कैनिंग एवं इण्डेक्सिंग की प्रथम चरण की परियोजना की अवधि को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किये जाने की तिथि से 06 माह की अवधि तक विस्तारित किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में राजस्व ग्राम भरथापुर, ग्राम पंचायत आम्बा, जनपद बहराइच के आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री जी की घोषणा के क्रम में राजस्व ग्राम भरथापुर, ग्राम पंचायत आम्बा, जनपद बहराइच में आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन हेतु भूमि की व्यवस्था, आवंटन एवं उक्त भूमि पर विविध अवस्थापना सुविधाएँ प्रदान किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि राजस्व ग्राम भरथापुर, ग्राम पंचायत आम्बा, परगना धर्मापुर, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर), जनपद बहराइच एक तरफ गेरुआ नदी एवं दूसरी तरफ कौड़ियाल नदी से घिरा हुआ है। ग्राम के उत्तर में वन्य जीव क्षेत्र एवं नेपाल राष्ट्र की सीमा स्थित है। ग्राम के निवासियों के आवागमन हेतु कोई सड़क मार्ग न होने के कारण नदियों के जल मार्ग से नाव द्वारा आवागमन का एकमात्र विकल्प उपलब्ध है। साथ ही, ग्राम के निवासियों को वन्य जीवों से जन-धनहानि का खतरा प्रत्येक क्षण बना रहता है।
29 अक्टूबर, 2025 को राजस्व ग्राम भरथापुर के 22 ग्रामवासी नाव से कौड़ियाला नदी पार कर रहे थे। नाव पलट जाने के कारण 09 व्यक्तियों की मृत्यु नदी में डूबने/लापता हो जाने की हृदय विदारक दुर्घटना घटित हुई थी। मुख्यमंत्री जी ने 02 नवम्बर, 2025 को उक्त आपदा प्रभावित ग्राम का हवाई सर्वेक्षण किया था। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलने के उपरान्त तत्समय ग्राम भरथापुर को अन्य सुरक्षित एवं सुगम स्थान पर पुनर्वासित करते हुये मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ अन्य जीवनोपयोगी व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराये जाने की घोषणा की थी।
उक्त घटना के दृष्टिगत आपदा प्रभावित लोगों को पुनर्वासित किये जाने एवं अवस्थापना सम्बन्धी अन्य विविध सुविधायें प्रदान किये जाने हेतु जिलाधिकारी बहराइच द्वारा प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के दृष्टिगत आपदा पीड़ितों को निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध कराई जानी है :-
(1) ग्राम पंचायत-सेमरहना, तहसील-मिहींपुरवा (मोतीपुर) जनपद बहराइच वर्तमान खतौनी खाता संख्या 237, श्रेणी 5-1 नवीन परती के खाता में अंकित गाटा संख्या-4/2 रकबा 0.3410 हे0, गाटा संख्या 4/3 रकबा 0.3410 हे0, गाटा संख्या 4/4 रकबा 0.3410 हे0, गाटा संख्या 4/5 रकबा 0.3410 हे0 व गाटा संख्या 4/6 रकबा 0.3410 हे0, कुल रकबा 1.7050 हे0 भूमि पर आवासित किये जाने हेतु उक्त भूमि का निःशुल्क पुनर्ग्रहण राजस्व विभाग के पक्ष में जिलाधिकारी, बहराइच द्वारा किया जायेगा।
(2) भूमि पुनर्ग्रहण के पश्चात ग्राम पंचायत सेमरहना, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर), जनपद बहराइच में आपदा से विस्थापित हुए 136 परिवारों को आवास हेतु 22 x 34 = 748 वर्ग फुट भूमि प्रत्येक परिवार को आवंटित की जाएगी।
(3) आपदा से प्रभावित उक्त परिवारों को ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
(4) आपदा प्रभावित क्षेत्र में अन्य कार्य जैसे सड़क, ग्रीन बेल्ट, नाली, सी0सी0 मार्ग, एल0ई0डी0 स्ट्रीट लाइट, इण्टरलॉकिंग टाइल्स, अवसंरचानत्मक सुविधाओं सम्बन्धी कार्यों हेतु लोक निर्माण विभाग, प्रान्तीय खण्ड, बहराइच द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रारम्भिक आगणन के अनुसार अपेक्षित धनराशि ग्राम्य विकास विभाग एवं जलापूर्ति हेतु आवश्यक कार्यवाही जल जीवन मिशन के माध्यम से सम्पादित की जाएगी।
(5) आपदा प्रभावित 136 परिवारों को आवास हेतु 22 x 34 = 748 वर्गफुट भूमि प्रत्येक परिवार को आवंटित किये जाने हेतु उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा (मोतीपुर), जनपद बहराइच को नामित करते हुये अधिकृत करने एवं उक्त भूमि पर अवसंरचनात्मक अभिलेख मूलभूत सुविधाओं के विकास के उपरान्त ग्राम पंचायत को हस्तान्तरित किये जाने हेतु अनुमति प्रदान किया जाना।
(6) उपरोक्त प्रभावित क्षेत्र में जिन परिवारों द्वारा पूर्व के स्थान को रिक्त कर वन विभाग एवं अन्य विभागों को भूमि हस्तगत की गई है। ऐसे परिवारों को वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए पैकेज के अतिरिक्त उपरोक्त सुविधा प्रदान की जाएगी।
(7) उक्त प्रभावित क्षेत्रों में से पुनर्वासित कराए गए व्यक्तियों/परिवारों हेतु बसायी गयी बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री जी की अनुमति से किया जाएगा।
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ग्राम नंगला गोसाई, तहसील मवाना, जनपद मेरठ में निवासरत पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 99 हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने ग्राम नंगला गोसाई, तहसील मवाना, जनपद मेरठ में निवासरत पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 99 हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि यह परिवार जिस भूमि पर निवासरत हैं, वह भूमि राजस्व अभिलेखों में झील के रूप में दर्ज है। मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण दिल्ली के आदेशों के क्रम में इन परिवारों को अन्यत्र पुनर्वासित किया जाना है। जनपद कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद के ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 11.1375 हे0 (27.5097 एकड़) भूमि में 50 परिवारों तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हे0 (26.009 एकड़) भूमि में 49 परिवारों को प्रति परिवार 0.50 एकड़ भूमि आवंटित कर पुनर्वासित किया जाना है।
उक्त भूमि को प्रीमियम अथवा लीज रेन्ट पर 30 साल के पट्टे पर निष्पादित किया जायेगा, जिसे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत करने का प्रावधान होगा। पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। इस निर्णय से विस्थापित परिवारों को स्थायी रूप से पुनर्वासन का लाभ प्राप्त होगा।
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न
 
बेसिक शिक्षा के शिक्षकों/कार्मिकों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने का निर्णय

निर्णय से अनुमानित 11,95,391 शिक्षक/कार्मिक लाभान्वित होंगे

इसमें बेसिक शिक्षा परिषद के 4,34,226 शिक्षक, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल के 13,380 शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के 4,72,735 शिक्षक, 1,42,929 शिक्षा मित्र, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 24,717 अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 7,479 वॉडेन/पूर्णकालिक/अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के 97,344 रसोईयें तथा 2,581 विशेष शिक्षक समेकित शिक्षा सम्मिलित

योजना के क्रियान्वयन पर 358.61 करोड़ रु0 का वार्षिक व्ययभार अनुमानित

शिक्षक दिवस पर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों इत्यादि को कैशलेस सुविधा प्रदान करने सम्बन्धी मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन हेतु बेसिक शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव रखा

लखनऊ : 29 जनवरी, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों एवं बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों (अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित) में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों (सी0डब्ल्यू0एस0एन0), अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत वॉर्डेन, पूर्णकालिक/अंशकालिक शिक्षकों/शिक्षिकाओं एवं प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोईयों तथा उक्त कार्मिकों के आश्रितों के स्वास्थ्य के दृष्टिगत सरकारी चिकित्सालयों के अलावा निजी चिकित्सालयों में भी आई0पी0डी0 (अंतर्रोगी विभाग) उपचार हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा अनुमन्य किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा 05 सितम्बर, 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के कतिपय शिक्षकों इत्यादि को कैशलेस सुविधा प्रदान करने के सम्बन्ध में की गयी घोषणा के क्रियान्वयन हेतु बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा के इस निर्णय से अनुमानित 11,95,391 शिक्षक/कार्मिक लाभान्वित होंगे। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन 4,34,226 शिक्षक, बेसिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल में कार्यरत 13,380 शिक्षक, बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के 4,72,735 शिक्षक, 1,42,929 शिक्षा मित्र, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 24,717 अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 7,479 वॉडेन/पूर्णकालिक/अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के 97,344 रसोईयें तथा 2,581 विशेष शिक्षक समेकित शिक्षा सम्मिलित हैं।
योजना के क्रियान्वयन पर 358.61 करोड़ रुपये के वार्षिक व्ययभार का अनुमान है। यह व्यय भार प्रति शिक्षक/कार्मिक 03 हजार रुपये प्रीमियम की वार्षिक दर से अनुमानित है। योजना के क्रियान्वयन हेतु बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आय-व्ययक में आवश्यक बजट व्यवस्था करायी जायेगी।
कैशलेस उपचार सुविधा की इस योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रहेन्सिव हेल्थ एण्ड इन्टीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है। यह सुविधा राजकीय एवं साचीज के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में अनुमन्य होगी, जिसकी दरें वहीं होंगी, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण (एन0एच0ए0) द्वारा समय-समय पर संसूचित की जायेगी।
प्रकरण में भविष्य में किसी भी परिवर्धन/संशोधन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न

माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने का निर्णय

निर्णय से अनुमानित 2,97,579 शिक्षक लाभान्वित होंगे

इसमें अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 67,548 शिक्षक, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 2,120 शिक्षक, राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 2,000 व्यावसायिक विषय विशेषज्ञ, स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 2,24,525 शिक्षक तथा स्ववित्तपोषित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 1,386 शिक्षक शामिल

योजना के क्रियान्वयन पर 89.25 करोड़ रु0 का वार्षिक व्ययभार अनुमानित

शिक्षक दिवस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों इत्यादि को कैशलेस सुविधा प्रदान करने सम्बन्धी मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव रखा

लखनऊ : 29 जनवरी, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (व्यावसायिक शिक्षा के विषय-विशेषज्ञों एवं मानदेय शिक्षकों सहित), संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (मानदेय शिक्षकों सहित) एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद तथा संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय-विशेषज्ञों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी चिकित्सालयों के अलावा निजी चिकित्सालयों में भी आई0पी0डी0 (अंतर्रोगी विभाग) उपचार की कैशलेस सुविधा अनुमन्य किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा 05 सितम्बर, 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के कतिपय शिक्षकों इत्यादि को कैशलेस सुविधा प्रदान करने के सम्बन्ध में की गयी घोषणा के क्रियान्वयन हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया।
मंत्रिपरिषद के इस निर्णय से अनुमानित 2,97,579 शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसमें अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 67,548 शिक्षक, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 2,120 शिक्षक, राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 2,000 व्यावसायिक विषय-विशेषज्ञ, स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 2,24,525 शिक्षक तथा स्ववित्तपोषित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 1,386 शिक्षक शामिल हैं।
योजना के क्रियान्वयन पर 89.25 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय भार का अनुमान है। यह व्यय भार प्रति शिक्षक 03 हजार रुपये प्रीमियम की वार्षिक दर से अनुमानित है। योजना के क्रियान्वयन हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आय-व्ययक में आवश्यक बजट व्यवस्था करायी जायेगी।
कैशलेस उपचार सुविधा की इस योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रहेन्सिव हेल्थ एण्ड इन्टीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है। यह सुविधा राजकीय एवं साचीज के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में अनुमन्य होगी, जिसकी दरें वहीं होंगी, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण (एन0एच0ए0) द्वारा समय-समय पर संसूचित की जायेगी। प्रकरण में भविष्य में किसी भी परिवर्धन/ संशोधन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।

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