उतरौला बलरामपुर- विकास खण्ड उतरौला अन्तर्गत ग्राम पंचायत रुस्तम नगर के योजना ओं की लम्बी सूची के बीच की जमीनी हकी कत बेहद चिन्ता जनक है। यहां पर सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव ने ग्रामीणजीवन को कठिन और असुरक्षित बना दिया है। गांव की प्रमुख सड़कें पिछले लगभग 20 वर्षों से ईंटों के पुराने खड़ंजों के सहारे किसी तरह चल रही हैं, जो अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह ईंटें धंस चुकी हैं, कई हिस्सों में गहरे गड्ढे भी बन गए हैं और हालात ऐसे हैं,कि ग्रामीणों को मजबूरी में खेतों की मेढ़ोंऔर कच्चे रास्तों से आवागमन कर ना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही है, और यह उपेक्षा का परिणाम है। गांव राप्ती नदी के निकट में स्थित है, जिसके कारण बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। बारिश शुरू होते ही जल भराव से रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते हैं। कई बार तो गांव का सम्पर्क आस पास के क्षेत्रों से कट जाता है। ऐसे में बीमारों को अस्पताल ले जाना, बच्चों को स्कूल भेजना या दैनिक जरूरतों का सामान लाना तक बड़ी चुनौती बन गई है। ग्रामी णो ने आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में विकास कार्य केवल चयनात्मक ढंग से कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नालियों की नियमित साफ सफाई और मरम्मत के न होने के कारण वे खुद सड़कों में तब्दील हो चुकी हैं नालियों का पानी सड़ कों पर बहता रहता है, जिससे सड़कें तेजी से धंसती चली जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में न तो समुचित चिकित्सा सुविधा उप लब्ध है,और न ही आवा गमन की कोई पुख्ता व्यवस्था है। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, क्योंकि खराब रास्तों के चलते कई छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीणो  ने यह भी बताया कि गांव की सड़कें इतनी खराब हो चुकी हैं, कि पैदल चलना भीजोखिम  हो गया है। बुजुर्गों और गर्भ वती महिलाओं के लिए तो स्थिति और भी गम्भीर है। बरसात के दिनों में फिसलन और गड्ढों के कारण गिरने का डर हमेशा बना रह ता है। वहीं पर ग्रामीणों  ने अपनी नाराजगी जता ते हुए कहा कि जिम्मे दार जनप्रतिनिधि और अधिकारी गांव केभीतर आने से बचते हैं। वे गांव के किनारे से ही निकल जाते हैं,ताकि ग्रामीण उनसे अपनी समस्याओं को लेकर सवाल न कर सकें।इस पूरे मामले पर ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामप्रधान और सम्बन्धित अधि कारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से इस समस्याओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों को मौके पर बुलाकर जमीनी हालात को भी दिखाया गया हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। सड़क निर्माण या मरम्मत को लेकर आज तक कोई ठोस कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी है। इस प्रशासनि क उदासीनता के चलते ग्रामीणों में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है।विश्ले षण करें, तो ग्रामरुस्तम नगर की समस्या केवल सड़क तक सीमित नहीं है। बल्कि सड़क के अभाव ने शिक्षा,स्वास्थ्य रोजगार और सामाजि क जीवन सभी को प्रभावित किया है। खराब रास्तों के कारण एम्बुलेंस और अन्य आपात कालीन वाहन भी गांव तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। छात्र-छात्राओं को स्कूल जाने में काफी दिक्कत होती है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय किसानोंको अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भी परे शानी होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के द्वारा चलाई जा रही ग्रामीण सड़क योजना ओं और विकास कार्य क्रमों का लाभ उन्हें अब तक नहीं मिल सका है। यदि समय रहते सड़क और नाली निर्माण का कार्य कराया गया होता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न न होती। गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएं सबसे अधिक इस बदहाली की कीमत चुका रहे हैं।
अब ग्रामीणों का सब्र जवाब देने लगा है। महिलाओं, छात्र- छात्रा ओं और बुजुर्गों के अलावा पूरे गांव ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क नाली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूल भूत सुविधाओं पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो वे आन्दोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने जिलाप्रशासन से मांग की है कि वह स्वयं हस्त क्षेप कर गांव की बद हाल स्थिति का संज्ञान में ले और स्थायी समा धान सुनिश्चित करे।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवा गमन का साधन नहीं, बल्कि विकास की बुनि याद होती है। जब तक रुस्तम नगर को पक्की और सुरक्षित सड़क नहीं मिलेगी, तब तक गांव का समग्र विकास सम्भव नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशा सन ग्रामीणों की पीड़ा को कितनी गम्भीरता से लेता है, और कब तक उन्हें मेढ़ों और कच्चे रास्तों से गुजरने की मजबूरी से मुक्ति मिल पाती है।

              हिन्दी संवाद न्यूज से
             असगर अली की खबर
              उतरौला बलरामपुर। 

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