नमस्कार दोस्तों मैं संतोष कुमार मौर्य आज आप लोगों के बीच अपनी एक शानदार कविता को प्रस्तुत कर रहा हूं हमें आशा नहीं विश्वास है कि हमारी यह कविता आप लोगों को बेहद पसंद आएगी और आप अपने जीवन में जब-जब धोखा खाएंगे तब तब आप "संतोष कुमार मौर्य " (Kavi JEE)की यह लाइन गुनगुन आएंगे
कविता की लाइन कुछ इस प्रकार है ______
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया । २
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया ,उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया।। २
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया ।। "
नफ़रत भारी ये जिंदगी को हंस के मैं जिया।२
हजारों विष के प्याले को अमृत बना दिया।।२
मुश्किल था जो सफर मुमकिन बना दिया।२
कोई साथ ना दिया तो अकेले ही चल दिया।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया ,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया , उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसया।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया , उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।। "
तालीम दी थी हमने उसे नेंक बनेगा।२
गलत है और सही में फर्क देंख सकेगा।।२
सोचा नहीं था हमने धोखा ही मिलेगा। २
मेरे एहसान के बदले में फरामोश बनेगा।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया ,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया ,उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसया।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।। "
काजल समझ के जिनको आंखों में सजाया।२
चेहरे पे खुशी देखके सांसों में बसाया।। २
हमने तो उनकी राहों में फूलों को सजाया ।
पर उसने मेरी राह में शूलों को सजाया।।
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया ,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया ,उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया उसने ही मेरी ही दुनिया में है आग लगाया।। "
मुश्किल घड़ी में मैंने ही है साथ निभाया। २
खुद से ज्यादा उनसे ही हैं आस लगाया।।२
हमने तो इनकी याद को दिल में ही बसाया
पर उसने तो मेरा ही मजाक बनाया।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया, उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया ।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया ।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया , उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।। "
जिसने नहीं समझी है आंखों की नमी को।२
जीवन में नहीं समझी मेरी भी कमी को।।२
हमने तो लुटा दी है यूं हंस के खुशी को।२
पर हो तो ढूंढते हैं बातों में कमी को।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया, उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया ।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया, उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया ।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया ,उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।। "
हमने तो उनकी याद को दिल में ही बसाया।
पर उसने मेरी बात को दुनिया को बताया ।।२
हमने तो उन्हें याद किया सोते जागते ,
पर उसने तो मेरे नाम को दिल से ही मिटाया।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया, उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया ।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया ।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया, उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया।। "
कल तलक ओ कहते थे मैं जान दे दूंगा।२
तुम हंस के अगर मांग लो तो प्राण दे दूंगा।।२
थे हमसे रिश्ते नाते कितने पल भर में दिख गया। २
देखो आज अपना नोटों पे बिक गया।।२
मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया, उसने ही मेरी दुनिया में है आग लगाया ।२
अपना समझ के जिसको सीने से लगाया उसने ही मेरे पीठ में खंजर को घुसाया ।।२
" मासूम सा चेहरा था जिसे दिल में बसाया उसने ही मेरी ही दुनिया में है आग लगाया।। "

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