जलालपुर, अम्बेडकर नगर।
एक ओर सरकार पुराने वृक्षों के संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को लेकर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों की कथित मिलीभगत से वन माफिया खुलेआम हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला जलालपुर महिला अस्पताल परिसर का है, जहां सैकड़ों वर्ष पुराने हरे पीपल के पेड़ को काट दिया गया।
बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से नगर पालिका परिषद द्वारा जलाए जा रहे अलाव में पीपल की हरी लकड़ियों के उपयोग का मामला सामने आ रहा था, जिसको लेकर नगरवासियों में आक्रोश था। नागरिकों के विरोध के बावजूद नगर पालिका प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी बीच सरकारी परिसर में स्थित अति प्राचीन पीपल के पेड़ को काट दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी परिसर में हरे-भरे वृक्ष को काटे जाने की जानकारी वन विभाग को कैसे नहीं हुई। हरे पेड़ों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठाने वाले विभाग की इस चुप्पी को लोग संदेह की नजर से देख रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका, वन विभाग और संबंधित विभागों की मिलीभगत से लाखों रुपये की कीमती लकड़ी और अलाव के नाम पर जारी बजट को ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला पर्यावरण समिति के सदस्य केशव प्रसाद श्रीवास्तव, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष देवेश मिश्रा, एमएलसी प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल कसौधन, समाजसेवी शत्रुघ्न सोनी और उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष आनंद जायसवाल सहित कई लोग मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस संबंध में क्षेत्रीय वनाधिकारी स्नेह कुमार ने बताया कि घटना की सूचना पर मौके से ट्रैक्टर ट्राली तथा लकड़ियों को जब्त कर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रशासन तथा हाफ़िज़ नाम के ठेकेदार की भूमिका पाई गई। पीपल की हरी लकड़ियों के नगर पालिका परिषद के अलाव में प्रयोग होने के सवाल पर वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि इस संबंध में नगर पालिका परिषद से पत्राचार कर सही स्थिति का पता लगाया जाएगा और दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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