जलालपुर, अम्बेडकर नगर। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य संध्या "एक शाम अटल जी के नाम" ने बुधवार की संध्या को रामलीला मैदान, जलालपुर को साहित्य और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। यह कार्यक्रम अटल जी के काव्यमय व्यक्तित्व और उनकी राष्ट्रनिर्माण की विरासत को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि बनकर उभरा।
मुख्य अतिथि राष्ट्रधर्म पत्रिका के निदेशक मनोजकांत तथा अध्यक्षता कर रहे आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण (महंत, श्री हनुमत निवास अयोध्या) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस ऐतिहासिक काव्य संध्या के मंच से देश के प्रख्यात कवियों ने शब्दों के जरिए अटल जी के व्यक्तित्व को पुनर्जीवित कर दिया। वरिष्ठ कवि हरिओम पवार, डॉ. सर्वेश अस्थाना, डॉ. शशि श्रेया, अमन अक्षर, विकास बौखल, अभय निर्भीक तथा धीरेन्द्र पाण्डेय 'क्षणिक' ने अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को एक ऐसी भावनात्मक यात्रा पर ले जाया, जहाँ अटल जी का राष्ट्रप्रेम, राजनीतिक दूरदर्शिता और कोमल मानवीय संवेदनाएँ एक साथ प्रकट हुईं।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं अयोध्या जिला प्रभारी डॉ मिथिलेश त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, कवियों और उपस्थित जनसमूह का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने जोर देकर कहा, "अटल जी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार, एक संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की एक जीवंत मिसाल थे। ऐसे आयोजन न केवल उनकी स्मृति को ताजा करते हैं, बल्कि समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी को, वैचारिक ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।" कार्यक्रम का सफल संचालन आयोजक पंकज वर्मा एवं सी.एन. संवारे ने किया।
इस गरिमामयी सांस्कृतिक समागम में भाजपा जिलाध्यक्ष त्रयंबक तिवारी,जिला पंचायत अध्यक्ष साधु वर्मा, वरिष्ठ नेता राम प्रकाश यादव, केशरी नंदन त्रिपाठी, संजय सिंह, संजीव मिश्र, शिव कुमार गुप्ता, रजनीश सिंह, रमेश गुप्ता, अमरेंद्रकांत सिंह, चन्द्रिका प्रसाद, राम किशोर राजभर, विनय पांडे, डॉ अखिलेश त्रिपाठी, शाश्वत मिश्र, अमित त्रिपाठी, डॉ शिवपुजन वर्मा, अंशुमान सिंह, डॉ योगेश उपाध्याय, दीपक त्रिपाठी, आशुतोष उपाध्याय, गौरव सिंह, त्रिभुवन नाथ, सुरेश गुप्त, सुदीप मिश्र, संदीप अग्रहरि, संदीप मिश्र, सुभम पांडे, देवेश मिश्र, आनंद जायसवाल, आदित्य गोयल, सीताराम अग्रहरि, सरिता निषाद, प्रवीण गौड, विनय सिंह, प्रिंस सिंह, शिवराम मिश्र, राकेश पांडे, बेचन पांडे, सुरेंद्र सोनी, अरुण मिश्र, अनुज सोनकर, मानिकचंद सोनी, विशाल त्रिपाठी, विपिन पांडे, आशीष सोनी, आनंद मिश्र, कृष्ण गोपाल गुप्त,नृपेन्द्र कुशवाहा, अभिषेक उपाध्याय, आशाराम मौर्या, शीतल सोनी, अजीत निषाद, विकास निषाद, सोनू गौड, प्रिंस सोनी, जितेन्द्र शिल्पी, विपिन कन्नौजिया, आनंद सिंह, बबलू त्रिपाठी, दिलीप यादव, मनीष सोनी एवं दुर्गेश अग्रहरि सहित शहर के तमाम गणमान्य नागरिक, साहित्यप्रेमी, बुद्धिजीवी एवं आम नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संध्या का समापन एक ऐसे वातावरण में हुआ जो अटल जी के अमर विचारों और उनकी काव्यात्मक विरासत से स्पंदित हो रहा था। यह आयोजन केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि एक महान राष्ट्रनायक के प्रति कृतज्ञता और उनके आदर्शों को आत्मसात करने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन गया।
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