जलालपुर, अम्बेडकर नगर।
नगरपालिका परिषद द्वारा किये जा रहे कार्यों में भ्रष्टाचार का मुद्दा हिंदी संवाद द्वारा प्रमुखता से उठाने के बाद कस्बे की भाजपा इकाई द्वारा नींद से उठकर यथास्थिति को जानने का प्रयास किया गया। पोर्टल पर खबर प्रकाशित होने के बाद मंगलवार की रात भाजपा नगर अध्यक्ष संदीप अग्रहरि के नेतृत्व में किए गए आकस्मिक निरीक्षण ने नगर प्रशासन की कार्यशैली की वह तस्वीर सामने रख दी, जिसे आमतौर पर फाइलों में ढककर रखा जाता है।
नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित गौशाला का निरीक्षण
रात करीब 7:30 बजे जब टीम गौशाला पहुँची तो मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला, मानो गायें नहीं, कोई गोपनीय दफ्तर बंद पड़ा हो। परिसर में एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। अधिशासी अधिकारी को कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन जवाब वही पुराना—पूर्ण मौन। सूचना उपजिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता तक पहुँची, पर उनके निर्देश भी ज़मीन पर नहीं उतर सके। न वरिष्ठ लिपिक आए, न कोई जिम्मेदार अधिकारी। प्रशासन मानो “देखेंगे” की नींद में सोया रहा।
कागज़ों की दुनिया और ज़मीनी हकीकत के बीच का फासला भी निरीक्षण में खुलकर सामने आया। अभिलेखों में जहां गौशाला में 72 पशु दर्ज हैं, वहीं मौके पर गिनती 68 पर ही थम गई। सवाल सीधा है—चार पशु आखिर गए कहां? जवाब किसी के पास नहीं, लेकिन रजिस्टर पूरे हैं।
रैन बसेरे का किया निरीक्षण
इसके बाद नगरपालिका के रैन बसेरे का निरीक्षण किया गया, जहां स्थिति और भी ‘बेहतर’ मिली। न कर्मचारी, न जिम्मेदारी—सिर्फ इमारत और सन्नाटा।
निरीक्षण के दौरान नगर महामंत्री कृष्ण गोपाल गुप्ता, आनंद मिश्र, मीडिया प्रभारी विकास निषाद, नगर मंत्री सोनू गुप्ता, पिछड़ा मोर्चा नगर अध्यक्ष जितेंद्र गौड तथा युवा मोर्चा नगर उपाध्यक्ष दुर्गेश गुप्ता मौजूद रहे।
भाजपा नगर अध्यक्ष की शिकायत
भाजपा नगर अध्यक्ष संदीप अग्रहरि ने इसे नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित उदासीनता बताते हुए प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। अलाव के नाम पर गीली लकड़ियों और पीपल जैसे संरक्षित वृक्ष की लकड़ियों के उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया, लेकिन अब तक कार्रवाई का हाल यह है कि सवाल खड़े हैं और फाइलें मौन।
कारवाई का इंतजार
हालात ऐसे हैं कि मुद्दे गरम हैं, शिकायतें लिखित हैं, लेकिन कार्रवाई ठंडी। भाजपाई नेता विरोध में खड़े तो हैं, पर फिलहाल वे ऐसे शेर नजर आ रहे हैं, जिनकी दहाड़ सुनाई तो देती है, पर दांत प्रशासन को अब तक नहीं चुभे।
अब देखना यह है कि यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकता है या फिर सच में किसी जिम्मेदार तक आंच पहुँचती है।
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| Jeevan_Prakash |





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