उतरौला (बलरामपुर)  शुक्रवार की शब में महदेइया बाजार के  मदरसा दारुल उलूम कादिरिया हशमतिया गुलशने रजा और अंजुमन गुलामाने ताजुश्शरिया नौजवान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में जश्न-ए-ईद मीलादुन्नबी व पैगाम-ए-ताजुश्शरिया कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया गया। जिसमें देश के मशहूर व मारूफ उलमा के साथ इलाकाई उलेमाओं ने खिताब फरमाया। कार्यक्रम की शुरुआत कारी अख्तर रजा ने कुरान-ए-पाक की मुकद्दस आयतें पढ़कर की। कार्यक्रम की सरपरस्ती मुफ्ती जियाउल मुस्तफा कादरी व अध्यक्षता मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने की। उलमा ने नबी की सुन्नतों पर अमल करने, अल्लाह को याद रखने और इंसानियत के रास्ते पर चलने की सलाह दी। निजामत अफाक रजा मुशाहिदी ने किया। 
      मुफ्ती जियाउल मुस्तफा कादरी ने रसूलल्लाह की शान बयां किया उन्होंने कहा कि ईमान की जान रसूल की मुहब्बत है। इसी वजह से सहाबा रसूल से वालेहाना मुहब्बत करते थे। जान-माल और दुनिया से ज्यादा अपने नबी की मुहब्बत को तरजीह देते थे। ताजुश्शरिया की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हुजूर ताजुश्शरिया अल्लामा अख्तर रजा अजहरी बहुत बड़े बुजुर्गों में से एक बुजुर्ग थे उनकी गिनती विश्व के प्रसिद्ध आलिमों में होती है, वह इल्म का दरिया थे। जिनके फैसले पर अहले सुन्नत व जमात के तमाम उलेमा अपने इत्मिनान का इजहार करते थे। हुज़ूर ताजुश्शरिया पेचीदा मसलों के हल निकाला करते थे, उनके इल्म का लोहा बातिल भी मानते थे।
       मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम भी बच्चों को जरूर सिखाए, जिससे बच्चें अपने ईमान और अकीदत की हिफाजत कर सकें। कहा अल्लाह के नबी ने फरमाया है कि अल्लाह को याद रखना और इंसानियत के रास्ते पर चलना हर मुसलमान का फर्ज है। उन्होंने एक-दूसरे की मदद करने, नेकी के रास्ते पर चलने व नबी की सुन्नतों पर अमल करने की सलाह दी और मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआ की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हुजूर कायदे मिल्लत के हाथों पर शरफ ए बेयत हासिल किया।

जलसे में मुफ़्ती शमशाद अहमद मुशाहीदी, मुफ़्ती मो.अबू यूसुफ अजहरी, मुफ़्ती मोहम्मद आशिक़ हुसैन कश्मीरी, मुफ़्ती निज़ामुद्दीन ने भी खिताब फरमाते हुए अपनी दुआओं में अपने मुल्क के अम्नो अमान खुशहाली, तरक्की व सुख शान्ति के लिए दुआएं मांगी। शायरे इस्लाम नूर अली नूर कानपुरी, नफीस रजा बलरामपुरी, रहीम रजा बलरामपुरी सहित अन्य शायरों ने भी अपने कलाम को खूबसूरती के साथ पेश किया। आए मेहमानों के लिए (लंगर-ए- आम) भोजन व बैठने के लिए माकूल इंतजाम किए गए थे। सलातो सलाम के बाद मुल्क की तरक्की खुशहाली व अमनो अमान की दुआ के बाद जलसे का समापन किया गया।

इस मौके पर कमेटी के संरक्षक हाजी अब्दुल मजीद, अध्यक्ष मोहम्मद नफीस कादरी, सिद्दीक अमजदी,  सलीम कादरी, डॉ नफीस, मुबारक अमजदी, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद अलाउद्दीन आदि मौजूद रहे।
असगर अली
उतरौला 

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