विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में लेखिका रीता जैन की
दो नव-प्रकाशित कृतियों ‘उपासना’ एवं ‘स्मृतियाँ’ का लोकार्पण
‘गागर में सागर’ हैं रीता जैन की पुस्तकें
-- मंचासीन वक्ताओं की आम राय

लखनऊ, 30 जून। विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में प्रख्यात लेखिका श्रीमती रीता जैन की दो नव-प्रकाशित कृतियों ‘उपासना’ एवं ‘स्मृतियाँ’ का लोकार्पण इण्टरनेशनल बुद्ध शोध संस्थान, विपिन खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में सम्पन्न हुआ। भारी संख्या में उपस्थित पुस्तक प्रेमियों के साथ ही साहित्यकारों, शिक्षाविद्ों, समाजसेवियों आदि की उपस्थिति में समारोह की मुख्य अतिथि डा. अनीता भटनागर जैन, आई.ए.एस. ने दोनों पुस्तकों को जनमानस के लिए लोकार्पित किया जबकि समारोह की अध्यक्षता श्री महेशचंद द्विवेदी, आई.पी.एस., पूर्व पुलिस महानिदेशक ने की। इस अवसर पर सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गाँधी, साहित्यकार श्रीमती अलका प्रमोद एवं श्री शुक देव पाण्डेय ‘प्रबल’ एवं पत्रकार श्री दयानंद पांडे ने अपने सारगर्भित विचारों से दोनों पुस्तकों के मर्म को उजागर किया। मंचासीन वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि दोनों पुस्तकें ‘गागर में सागर’ के समान हैं, जो पाठकों को रोचक तरीके से जीवन की वास्तविकताओं से अवगत कराती हैं। कार्यक्रम के संयोजक डा. अरुण कुमार जैन ने आमान्त्रित अतिथियों का स्वागत किया।
पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए मुख्य अतिथि डा. अनीता भटनागर जैन, आई.ए.एस., ने कहा कि डा. रीता जैन की दोनों ही पुस्तकें पाठकों को सकारात्मक व रचनात्मक विचारों से ओतप्रोत करने में महती भूमिका निभायेंगी।  ये पुस्तकें अपने आप में अनूठी है और व्यावहारिकता की कसौटी पर सौ प्रतिशत खरी है। सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने अपने संबोधन में कहा कि डा. रीता जैन अपने लेखनी से समाज को नई दिशा दिखा रही हैं, उसके लिए बधाई की पात्र हैं। डा. जैन की दोनों पुस्तकें समाज के सभी वर्गों के लिए मार्गदर्शक हैं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री महेशचंद द्विवेदी, आई.पी.एस., ने कहा कि इस पुस्तकों के माध्यम से श्रीमती जैन ने अपने अनुभव का निचोड़ पाठकों के सामने रखा है।
इस अवसर पर पाठकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए लेखिका श्रीमती रीता जैन ने कहा कि आप सभी की उपस्थिति ने मेरा मनोबल व उत्साह को शतगुणित कर दिया है, साथ ही मेरी लेखनी को नई प्रेरणा दी है। आशा है कि पाठकों के स्नेह मेरे आगामी लेखन का संबल बनेगा।

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