विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रीता जैन की दो किताबों 

स्मृतियां और उपासना का लोकार्पण 

विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित रीता जैन की दो किताबों आत्मकथात्मक संस्मरण स्मृतियां और कथा-संग्रह उपासना का लोकार्पण समारोह गत 29 जून की शाम इंटरनेशनल बुद्ध शोध संस्थान , गोमती नगर में संपन्न हुआ।  समारोह की अध्यक्षता पूर्व पुलिस महानिदेशक महेशचंद्र द्विवेदी ने की। मुख्य अतिथि रिटायर्ड आई ए एस डाक्टर अनीता भटनागर जैन थीं। जब कि सिटी मांटेसरी स्कूल के संस्थापक जगदीश गांधी सम्मानित अतिथि। 


इस अवसर पर महेशचंद द्विवेदी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि रीता जी की दोनों पुस्तकों के लेख जीवन के भोगे अथवा देखे यथार्थ पर आधारित हैं। आज का आयोजन लोकार्पण समारोह से कहीं अधिक त्रासदी से उत्पन्न दुख को सकारात्मक दिशा में मोड़कर समाज हित के कार्यों में लगा देने  का उत्सव है। रीता जी की भाषा सहज , सुग्राह्य एवं सपाट है। परंतु उनके भाव हृदय से निःस्रत हैं, अतः मर्मस्पर्शी हैं। अनीता भटनागर जैन ने रीता जैन की स्मृतियां और उपासना की विस्तार से चर्चा की। ख़ास कर उपासना की दो कहानियों औलाद और समाज का अभिमान की चर्चा की। इन कहानियों के बहाने अनीता भटनागर जैन ने अपने कुछ प्रशासनिक अनुभव साझा किए और स्त्री को और सशक्त बनाने की पैरवी की। कहा कि स्त्रियां ससुराल में ही जल कर क्यों मरती हैं , मायके में क्यों नहीं। अनीता ने रीता जैन की कहानियों की चर्चा करते हुए समाज और परिवार में बढ़ती संवेदनहीनता को विस्तार से रेखांकित किया। अनीता भटनागर जैन ने लेखिका रीता जैन और उपस्थित जन से पर्यावरण बचाने का अभियान चलाने की भी अपील की। 


जगदीश गांधी ने विश्रुत की मेधा के बारे में विस्तार से चर्चा की। कहा कि उन्हें गर्व है कि विश्रुत जैसा तेज़ और होनहार छात्र सिटी मांटेसरी स्कूल का छात्र था। विश्रुत की तमाम बातों और उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए जगदीश गांधी ने विश्रुत के सिंगापुर जाने और वहां के शिक्षा जगत में झंडा गाड़ कर अपने कैरियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाने का बखान किया। डाक्टर अरुण कुमार जैन विश्रुत की चर्चा करते हुए बहुत भावुक हो गए। विश्रुत के सामाजिक कामों की चर्चा करते हुए डाक्टर जैन ने कहा कि इन किताबों या और भी कार्यकलापों से जो भी आय होती है , सारी धनराशि विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट को दे दी जाती है। शिक्षा और सामाजिक सरोकार में खर्च करने के लिए। लेखक दयानंद पांडेय ने रीता जैन की किताब स्मृतियां की विस्तार से चर्चा की। स्मृतियां में वर्णित एक घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि अनजाने ही रोज-रोज दूध में सोंठ की जगह खटाई मिला कर देने वाली , टोकने पर , नखरे मत करिए , पी लीजिए , कहने वाली मासूम देवरानी सुचित्रा , यशोदा बुआ जैसे परिवारीजन भी स्मृति की इस नदी की प्रमुख धारा हैं। दयानंद पांडेय ने विमल राय निर्देशित फ़िल्म की चर्चा करते हुए कहा कि देवदास का अभिनय करते हुए दिलीप कुमार गहरे डिप्रेसन में चले गए थे। बाद में इस डिप्रेसन का इलाज विदेश जा कर करवाया। पर देवदास लिखते हुए शरतचंद तो डिप्रेशन में नहीं आए। बेटे की याद में भारत व्यास के लिखे गीत ज़रा सामने तो आओ छलिए , छुप-छुप कर छलने में क्या राज है तथा आ लौट के आ जा मेरे मीत , तुझे मेरे गीत बुलाते हैं , का ज़िक्र किया। कहा कि अपने काम के मार्फ़त ही सही विश्रुत लौट-लौट तो आते ही हैं। 


लेखिका अलका प्रमोद ने कहा कि स्मृतियां श्रीमती रीता जैन द्वारा संकलित की गयी जीवन की स्मृतियों का एक स्तवक है जिसमें उनके बाल्यकाल से वर्तमान तक के अनेक खट्टे-मीठे संस्मरण हैं। स्मृतियां हमारी अनुभूतियों की धरोहर हैं जो यदि पन्नों पर उतर जायें तो निजी धरोहर के साथ-साथ तत्कालीन संस्कृति, समाज और इतिहास का एक अभिलेख बन जाती हैं।रीता जी का संकलन तत्कालीन संस्कृति, क्षेत्रीय समाज, परिवार का परिचय तो देता ही है उनके निजी जीवन की अनुभूतियों, संघर्षों, मान्यताओं, आदर्शों, संबंधों और परिवार की झलक भी देता है। शुकदेव पांडेय प्रबल ने रीता जैन के कथा-संग्रह प्रबल पर एक लिखित आलेख पढ़ा। मंच संचालन श्रीमती अंजना मिश्रा ने किया।    


उल्लेखनीय है कि विश्रुत रीता जैन और हड्डी रोग विशेषज्ञ डाक्टर अरुण कुमार जैन का बेटा है। असमय ही विश्रुत का निधन हो गया। तो विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट बना कर डाक्टर अरुण कुमार जैन और रीता जैन ने विश्रुत द्वारा शुरू किए गए सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाया है। ख़ास कर निर्धन और ज़रूरतमंद लड़कियों की शिक्षा का काम। विश्रुत सिंगापुर में रहते हुए भी नेपाल की ग़रीब बेटियों को हर साल पढ़ाने , रहने और भोजन का खर्च उठाते थे। इस काम के लिए विश्रुत ने कन्या नाम की एक संस्था बनाई थी। वह प्रति वर्ष निर्धन कन्याओं का चयन करते थे और नेपाल प्रशासन की सहमति से उन को शिक्षित करने का काम करते थे। वह नेपाल में इसी कार्य के लिए गए थे और वहीं अचानक हुए हार्ट अटैक से उन की मृत्यु हो गई। 


तब ही से डाक्टर अरुण कुमार जैन और रीता जैन ने विश्रुत मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट बना कर विश्रुत के इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। अलका प्रमोद ने कहा भी कि रीता जी ने डा अरुण के सहयोग से जिस प्रकार अपने बेटे विश्रुत के वियोग की अपनी असहनीय दुख की धारा को मोड़कर अपना ध्यान पुत्र के स्वप्न को पूर्ण करने हेतु समर्पित कर दिया वह सराहनीय एवं प्रेरणादायी है। मेरा विश्वास है कि यह संकलन समाज को राह दिखाने के लिये एक प्रेरणा का प्रकाश-स्तम्भ बन कर स्थापित होगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

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