जौनपुर। रात-रात भर तुमको गाया सुबह छपे अखबार में

जौनपुर। कालजयी रचनाकार पत्रकार महाकवि पं0 रूपनारायण त्रिपाठी की 32वीं पुण्यतिथि पर रूप सेवा संस्थान एवं उ0प्र0 भाषा संस्थान के तत्वावधान में गीत रूप नमन समारोह एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि स्व0 त्रिपाठी की रचनाएं सार्वभौमिक एवं सर्वकालिक हैं। इनमें भारतीय संस्कृति के उदात्त मूल्य निहित हैं। जीवन मूल्यों को उकेरने वाली स्व0 त्रिपाठी की कविताओं से नयी पीढ़ी को अवगत कराया जाना चाहिए। 

जिलाधिकारी अनुज झा ने कहा कि स्व0 त्रिपाठी शीर्षस्थ रचनाकार होने के साथ-साथ इस जनपद की पहचान भी हैं। राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी ने कहा कि पं0 रूपनारायण त्रिपाठी की कविताओं से राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। पूर्व कुलपति राममोहन पाठक ने कहा कि स्व0 त्रिपाठी की कविताएं मानवीय मूल्यों को समर्पित हैं जो प्लेटो के आदर्शों को चुनौती देती है। लोकसेवा आयोग उ0प्र0 के सदस्य प्रो0 आर0एन0 त्रिपाठी ने कहा कि स्व0 त्रिपाठी की कविताएं अत्यन्त लोकप्रिय हैं। उनमें लोक जीवन का यथार्थ बिखरा पड़ा है। सांसद श्याम सिंह यादव ने कहा कि कवि सदैव समाज को जोड़ने का कार्य करता है। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ पं0 हरिराम द्विवेदी ने वाणी वन्दना से किया। वाराणसी से पधारे पं0 धर्म प्रकाश मिश्र ने हास्य रस की कविताएं सुनाकर लोगों को ठहाके लगाने के लिए बाध्य कर दिया। उन्होंने-सर्प बनूँ तो निवास के रूप में, सज्जनों की आस्तीन मिले। भैंस बनूँ तो हरी-हरी घास हो,बाराबंकी की धरती से पधारे सुप्रसिद्ध गीतकार गजेन्द्र प्रियांशु ने जहाँ- इतना निर्मोही कैसे सजन हो गये। किसकी बाँहों जाकर मगन हो गए। लौट करके न आये वो परदेश से, आदमी तो नहीं कालाधन हो गए। जैसी कविताओं से फागुनी वातावरण का सृजन किया वहीं-‘‘जैसे-तैसे उमर बितायी मैंने तेरे प्यार में,रात-रात भर तुमको गाया सुबह छपे अखबार में,अब मुस्कानें बेच रहा हूँ, आंसू के बाजार में,जैसी रचनाओं से कवि-मन की व्यथा का चित्रण किया। प्रयागराज से पधारे कवि श्लेष गौतम ने- ‘‘किधर जा रही है, किधर की है होली। इधर आये, चाहे जिधर की है होली।। मेरे गाल को यदि तेरा रंग छू ले। इधर भी होली उधर भी है होली। जैसी कविताओं से श्रृंगार रस की अनुपम छटा बिखेरी। पूर्व आईएएस अधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने ’दृष्टि-दोष’ चिन्तन प्रधान कविता प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को सोचने के लिए विवश कर दिया। इस अवसर पर डा0 पीसी विश्वकर्मा, गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव गिरीश, डा0 अशोक मिश्र, बेहोश जौनपुरी, फूलचन्द भारती सहित स्थानी कवियों ने अपनी रचनाओं से ओत प्रोत किया। रूप सेवा संस्थान द्वारा जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी एनपी सिंह राज्यसभा सदस्य लोकसभा सदस्य, उ0प्र0 लोक सेवा आयोग के सदस्य पूर्व कुलपति एवं आगन्तुक कवियों को स्मृतिचिन्ह तथा अंगवस्त्रम प्रदान करके सम्मानित किया गया।

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