सोमवार की देर शाम से निजी चैनल पर वीडियो लीक होने के बाद मंगलवार तक फुटेज लोगों के मोबाइल तक में पहुंच गए। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोगों ने इन फोटो व वीडियो के जरिए चर्चा शुरू कर दी है।
वीडियो में दिखाई दे रहे शिवलिंग जैसी आकृति, त्रिशूल, स्वास्तिक सहित अन्य धार्मिक चिह्न पर लोग अपने-अपने दावे कर रहे हैं। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने शृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग करने वाली रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी, मंजू व्यास और सीता साहू को सशर्त कमीशन की कार्यवाही की फोटो व वीडियोग्राफी की प्रति दी थी।  देर रात तक ज्यादातर लोगों के पास वीडियो फुटेज पहुंच गए। इसमें लोगों ने अब सोशल मीडिया पर अपलोड कर इस पर चर्चा छेड़ दी है।  फोटो व वीडियो को लेकर लोग अपने-अपने दावे भी करने लगे हैं। कोई शिवलिंग होने का दावा कर रहा है तो कोई उसे फव्वारा बता रहा है। फिलहाल इस फुटेज के लीक होने के बाद पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट है और लगातार निगाह बनाए है। ज्ञानवापी परिसर में हुई कमीशन कार्यवाही की तस्वीरें व वीडियो निजी चैनल पर लीक होने की जांच की मांग जिला जज से की गई है। मामले की चार हिंदू महिला वादियों ने मंगलवार को कार्यवाही की तस्वीरें, रिपोर्ट व वीडियो के सीलबंद लिफाफे अदालत में पेश िकए और वीडियो लीक की जांच का आवेदन दिया।  जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश ने लिफाफे लेने से इनकार कर दिया और कहा कि जांच के आवेदन पर चार जुलाई को आदेश पारित करेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वाद की पोषणीयता (सुनने योग्य है या नहीं) पर सुनवाई के बाद ही अन्य आवेदनों पर सुनवाई करेेंगे

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