वैशाख पूर्णिमा पर सोमवार को मां विंध्यवासिनी दरबार में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर देवी धाम पहुंचे श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धा भाव से मां के चरणों में मत्था टेका। माता के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर दर्शनार्थी निहाल हो उठे। माता के जयकारे से परिसर गुंजायमान रहा। गंगाघाटो पर स्नान-ध्यान के लिए दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।
आस्था धाम के विभिन्न गंगाघाटों पर स्नान-ध्यान के बाद हाथों में नारियल, चुनरी, माला फूल व प्रसाद लेकर श्रद्धालु मंदिर की ओर जाने वाले विभिन्न मार्गों पर कतारबद्ध रहे। किसी ने झांकी तो किसी ने गर्भगृह पहुंचकर विधिवत मां का दर्शन पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। भोर में मंगला आरती के बाद से ही शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। सोमवार को तल्ख धूप के बावजूद दूरदराज से आए दर्शनार्थियों में मां विंध्यवासिनी की भक्ति के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा था। माता के जयकारे से पूरा परिसर गुजंयमान रहा। जगत जननी का दर्शन पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिसर में विराजमान समस्त देवी देवताओं के मंदिरों में भी पहुंचकर श्रद्धा भाव से शीश झुकाया। विंध्य दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी और सदस्य दर्शनार्थियों की सेवा में लगे रहे।

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