शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर काशी में उल्लास के रंग बिखरे। शाम से पंडाल और गलियां रंग-बिरंगी रौशनी से दमक उठीं। शंख ध्वनि, ढाक की थाप और घंटा-घड़ियाल से माता की आराधना के स्वर गूंजते रहे। बुधवार को शाम ढलते ही शहर के पंडालों में लोगों की चहल-पहल बढ़ी तो रौनक नजर आने लगी। कोरोना संक्रमण काल के कारण पंडालों में भव्यता तो नहीं है, लेकिन आस्था का रेला देर रात तक उमड़ता रहा।सनातन धर्म के पूजा पंडाल में मां दुर्गा अपने वाहन पर सवार होकर महिषासुर का वध कर रही हैं। माता की चलायमान प्रतिमा भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जिले की सबसे बड़ी प्रतिमा भी सनातन धर्म में ही स्थापित की गई है।पांडेय हवेली स्थित काशी दुर्गोत्सव सम्मिलनी सौ साल के दुर्गोत्सव का आयोजन कर रही है। संध्या आरती के बाद आयोजन समिति के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ भी नजर आई। ढाक की धुन पर पूजा समिति के लोगों ने माता की आरती उतारी तो श्रद्धालु भी मस्ती में झूमते नजर आए।अर्दली बाजार में अस्पताल की थीम पर पंडाल का निर्माण किया गया है। मां दुर्गा अपने भक्तों को डॉक्टर के स्वरूप में दर्शन दे रही हैं। पंडाल में ऑक्सीजन सिलिंडर को भी प्रतीकात्मक स्वरूप में रखा गया है।

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