​बलरामपुर - एमएलके पीजी कॉलेज के शिक्षाशास्त्र विभाग की ओर से बुधवार को सेमिनार कक्ष में "भारतीय ज्ञान परंपरा एवं गुरु-शिष्य संबंध" विषय पर एक विशेष विद्वत व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता के साथ-साथ प्राचीन और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में गुरु-शिष्य संबंधों की गहराई पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

​मां सरस्वती के वंदन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जे.पी. पाण्डेय, मुख्य वक्ता एवं विभागाध्यक्ष डॉ. स्वदेश भट्ट, कार्यक्रम समन्वयक शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश कुमार मौर्य और कार्यक्रम संयोजक लेफ्टिनेंट (डॉ.) देवेन्द्र कुमार चौधरी द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

​प्राचार्य प्रो. जे.पी. पाण्डेय के विचार

छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. जे.पी. पाण्डेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक और बौद्धिक विरासत है। यह वेदों, उपनिषदों और पांडुलिपियों के माध्यम से पीढ़ियों तक पहुंची है। यह परंपरा जीवन के हर पहलू—विज्ञान, कला, साहित्य, गणित और खगोल विज्ञान—को देखने का एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है।

​मुख्य वक्ता डॉ. स्वदेश भट्ट का संबोधन

मुख्य वक्ता डॉ. स्वदेश भट्ट ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु-शिष्य का रिश्ता केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण, आत्मबोध और आंतरिक रूपांतरण की एक पवित्र आध्यात्मिक प्रक्रिया है। शिक्षा का मूल उद्देश्य नौकरी पाना नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने अनुशासन और चिंतन को इस रिश्ते का सबसे सशक्त माध्यम बताया।

​अतिथियों का स्वागत और आभार

  • ​स्वागत भाषण: कार्यक्रम समन्वयक प्रो. दिनेश कुमार मौर्य ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए व्याख्यान के मुख्य विषय पर प्रकाश डाला।
  • ​संचालन: कार्यक्रम का कुशल संचालन सह-संयोजक डॉ. श्रीनारायण सिंह ने किया।
  • ​आभार प्रदर्शन: कार्यक्रम के संयोजक लेफ्टिनेंट (डॉ.) देवेन्द्र कुमार चौहान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य का संबंध एक अत्यंत पवित्र, आध्यात्मिक और नैतिक बंधन है।

​इस अवसर पर शिक्षाशास्त्र विभाग के स्नातक और परास्नातक के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं संकाय सदस्य मौजूद रहे।

           हिन्दी संवाद न्यूज से                     रिपोर्टर वी. संघर्ष                          बलरामपुर। 

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