उतरौला बलरामपुर- क्षेत्र के थाना गैड़ास बुजुर्ग के अंतर्गत एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ बीते 20 जुलाई 2026 की सुबह से 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है। परिजनों के अनुसार, किशोरी अशिक्षित है और उसकी मानसिक समझने-बूझने की क्षमता भी सामान्य से काफी कम है। लगातार स्थानीय पुलिस थाने के चक्कर काटने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर परेशान पीड़ित मां ने अब पुलिस अधीक्षक (SP) बलरामपुर की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई है।
20 जुलाई से लापता किशोरी, मां का आरोप— "थाने में दिनभर बैठाकर खाली हाथ भेजते रहे"
पीड़िता नफीसा बानो ने बताया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी 20 जुलाई 2026 की सुबह करीब 6:00 बजे घर से अचानक गायब हो गई। परिजनों ने गांव और अपनी रिश्तेदारियों में हर संभव स्थान पर तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
मां का गंभीर आरोप है कि उन्होंने थाना गैड़ास बुजुर्ग में कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन पुलिस केवल आश्वासन देती रही। उन्हें बार-बार थाने बुलाकर दिनभर बैठाया जाता और शाम को बिना कोई ठोस जानकारी दिए वापस भेज दिया जाता।
गांव के ही युवक पर बहला-फुसलाकर ले जाने का संदेह
एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में नफीसा बानो ने गांव के ही निवासी शाहबाज (पुत्र अतीउल्लाह) पर अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर गलत नीयत से कहीं ले जाने की आशंका जताई है। पीड़िता की मां को डर है कि उनकी बेटी के साथ कोई अप्रिय या गंभीर अपराध हो सकता है।
ध्यान दें: शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए इन आरोपों की सत्यता और युवक की भूमिका निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस अधीक्षक (SP) का कड़ा रुख: थानाध्यक्ष को स्वयं जांच कर सकुशल बरामदगी के निर्देश
स्थानीय पुलिस के उदासीन रवैये से थक-हारकर पीड़िता ने 25 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के समक्ष उपस्थित होकर न्याय और बेटी की सकुशल वापसी की मांग की।
मामले की संवेदनशीलता और नाबालिग की स्थिति को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष गैड़ास बुजुर्ग को स्वयं इस प्रकरण की गहराई से जांच करने और किशोरी की त्वरित व सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सवाल: क्या समय पर हुई लापरवाही की तय होगी जवाबदेही?
किसी मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग किशोरी का लापता होना बेहद गंभीर विषय है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
यदि किशोरी के लापता होने की सूचना समय पर दे दी गई थी, तो पुलिस ने तुरंत एफआईआर (FIR) और तलाश के लिए क्या कदम उठाए?
क्या शिकायत मिलने के बाद किसी संदिग्ध से पूछताछ की गई थी?
क्या पीड़िता की मां द्वारा लगाए गए पुलिस लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
न्याय की आस में पीड़ित परिवार
बेटी के गायब होने से नफीसा बानो और उनका परिवार बेहद दुखी और चिंतित है। उनकी केवल एक ही मांग है—"मेरी बेटी को सकुशल वापस लाया जाए।" अब क्षेत्र के लोगों और पीड़ित परिवार की निगाहें पुलिस अधीक्षक के निर्देशों के बाद होने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर टिकी हैं।
हिन्दी संवाद न्यूज से
असगर अली की खबर
उतरौला बलरामपुर।
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know